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Operation Sindoor: 'PAK के आतंकी हमलों पर कोई शक नहीं, चीन की तकनीक का तोड़ निकाला', मध्यस्थता पर भी बोले थरूर

Thu, 05 Jun 2025 09:08 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 05 Jun 2025 09:08 PM IST
सार

Shashi Tharoor on Mediation: भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर अमेरिकी अधिकारियों को जानकारी देते हुए शशि थरूर ने कहा, 'मध्यस्थता का मतलब है दोनों पक्षों को बराबर मानना, और ऐसा कोई समान स्तर यहां है ही नहीं'। बता दें कि, शशि थरूर के नेतृत्व में भारत के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से भी मुलाकात की है।

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'No equivalence': Shashi Tharoor expresses scepticism on mediation in conflicts involving terrorism
शशि थरूर, सांसद, कांग्रेस - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका दौरे पर गए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आतंकवाद से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की मध्यस्थता की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद फैलाने वालों और आतंक के शिकार देशों में कोई नैतिक या तथ्यात्मक समानता नहीं हो सकती। शशि थरूर एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं जो भारत की 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर दुनिया के तमाम देशों को जानकारी दे रहा है।
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अमेरिका की भूमिका पर उठाए सवाल
शशि थरूर से जब पूछा गया कि क्या भारत और पाकिस्तान के बीच अमेरिका की मध्यस्थता मददगार हो सकती है, तो उन्होंने कहा, 'मध्यस्थता ऐसा शब्द नहीं जिसे हम स्वीकार करते हैं। आप एक ऐसा तर्क दे रहे हैं जैसे दोनों पक्ष बराबर हों – जबकि एक तरफ आतंकियों को शरण देने वाला देश है, और दूसरी तरफ एक लोकतांत्रिक राष्ट्र जो अपने नागरिकों की रक्षा कर रहा है।' उन्होंने कहा कि अमेरिका की दिलचस्पी और चिंता को भारत ने सराहा, लेकिन असली दबाव पाकिस्तान पर डालना जरूरी था। थरूर ने कहा, 'मुझे लगता है कि अमेरिका ने पाकिस्तान से बात की होगी, क्योंकि उन्हें ही इस आतंकवाद को रोकने के लिए मनाने की जरूरत थी'। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह उनका केवल अनुमान है और उन्हें पता नहीं कि अमेरिका ने पाकिस्तान से क्या कहा।
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'हमने चीन की तकनीक का तोड़ निकाला'
इस दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा है कि भारत ने चीन की उन्नत तकनीक को मात देते हुए पाकिस्तान पर जवाबी कार्रवाई में बड़ी सफलता पाई। उन्होंने बताया कि चीन की 'किल चेन' प्रणाली – जिसमें रडार, जीपीएस, मिसाइल और विमान आपस में जुड़कर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं – का इस्तेमाल पाकिस्तान की ओर से किया गया, लेकिन भारत ने अपनी रणनीति समय के अनुसार बदली और 11 पाकिस्तानी एयरबेस को निशाना बनाकर उनकी आपूर्ति और सुरक्षा प्रणाली को तोड़ दिया। उन्होंने कहा, 'अगर हम रणनीति नहीं बदलते तो इतने प्रभावशाली ढंग से कार्रवाई नहीं कर पाते। लड़ाई के दौरान ही हम आकलन कर रहे थे और रणनीति को फिर से तैयार कर रहे थे।' थरूर ने यह भी कहा कि पाकिस्तान में चीन के गहरे हित हैं, खासकर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी), जो बेल्ट एंड रोड परियोजना का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसलिए चीन की पाकिस्तान के प्रति प्रतिबद्धता को भारत नजरअंदाज नहीं कर सकता।
'भारत ने सिर्फ आतंकवादियों को निशाना बनाया'
शशि थरूर ने स्पष्ट किया कि भारत ने सिर्फ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया है, जबकि पाकिस्तान के पास भारत में ऐसे कोई ठिकाने नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'भारत में कोई आतंकी संगठन नहीं हैं जिनको संयुक्त राष्ट्र या अमेरिका के विदेश विभाग ने सूचीबद्ध किया हो। तो फिर पाकिस्तान किसे निशाना बनाएगा? निर्दोष लोगों को? यही इस संघर्ष की असमानता है।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'हमने कोशिश की कि हमारा जवाब सटीक, सीमित और शांति का संदेश देने वाला हो। हमारा उद्देश्य पाकिस्तान के आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि आतंकवाद का जवाब देना था।'
पाकिस्तान का इंकार कोई नई बात नहीं- थरूर
इस दौरान शशि थरूर से जब उनके बेटे ने पूछा कि क्या किसी देश ने भारत से सबूत मांगा कि पाकिस्तान ने पहलगाम हमले को अंजाम दिया, तो उन्होंने कहा, 'हमसे किसी ने सबूत नहीं मांगे, क्योंकि किसी को कोई शक नहीं था। मीडिया ने जरूर कुछ सवाल पूछे- लेकिन भारत ने कार्रवाई से पहले पूरी तरह विश्वसनीय जानकारी हासिल की थी।' उन्होंने कहा कि 37 वर्षों से पाकिस्तान से आतंकवादी हमले होते आए हैं और हर बार पाकिस्तान इनकार करता रहा है। 'मुंबई हमलों पर भी पाकिस्तान ने इनकार किया था, और दुनिया जानती है कि ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान की मिलिट्री छावनी के पास सुरक्षित ठिकाने में छिपा रखा गया था। यही पाकिस्तान की असलियत है – आतंकवाद भेजो, फिर इनकार करो।'

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'भारत ने विश्वसनीय जानकारी के आधार पर कार्रवाई की'
थरूर ने बताया कि भारत ने हर स्तर पर कूटनीतिक रूप से जानकारी साझा की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में सिविल और मिलिट्री अधिकारियों ने नियमित ब्रीफिंग दी। उन्होंने एक खास बात पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि इन ब्रीफिंग्स में सेना की महिला अधिकारी भी शामिल थीं, जिनमें एक मुस्लिम अधिकारी भी थीं। थरूर ने कहा, 'हमने यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया कि यह हिंदू बनाम मुस्लिम नहीं है, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुट भारत की लड़ाई है। और यह बात अमेरिकी अधिकारियों तक अच्छे से पहुंची।'



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