पाकिस्तान: परदे के पीछे से इमरान को 'इज्जत' बचाने के लिए मिले हैं तीन विकल्प, खोला कठपुतली के मालिक का राज!
इमरान खान ने पुष्टि की कि खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख की नियुक्ति के सवाल पर उनका सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा से मतभेद उभरा था। उन्होंने कहा- ‘पिछले साल अक्तूबर में मैं चाहता था कि लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद आईएसआई के महानिदेशक पद पर आगे भी बने रहें, क्योंकि तब अफगाननिस्तान में गृह युद्ध भड़कने का भय था...
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार रात एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कई विस्फोटक बातें कहीं। यह पहला मौका है, जब पाकिस्तान के किसी सत्ताधारी नेता ने सियासी विवाद में सीधे तौर पर ‘एस्टेब्लिशमेंट’ को घसीटा हो। ये आम समझ है कि पाकिस्तान में असली सत्ता ‘डीप स्टेट’ के हाथ में होती है, जिसे ‘एस्टेब्लिशमेंट’ के नाम से भी जाना जाता है। इसका अर्थ मोटे तौर पर सेना और खुफिया तंत्र से समझा जाता है। विशेषज्ञों की राय रही है कि पाकिस्तान में सरकार चाहे जिसकी भी हो, वह ‘एस्टेब्लिशमेंट’ के हाथ की कठपुतली रहती है। लेकिन ये बात परदे के पीछे रहती है।
इमरान के सामने रखे तीन विकल्प
मगर इमरान खान ने ये बात टीवी इंटरव्यू में बताई कि उनकी सरकार के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव के सिलसिले में ‘एस्टेब्लिशमेंट’ ने उनके सामने तीन विकल्प रखे। उन्हें अविश्वास प्रस्ताव का मुकाबला करने, नए चुनाव में उतरने, या प्रधानमंत्री पद छोड़ने का विकल्प दिया गया। खान ने कहा कि उन्होंने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव का आखिरी वक्त तक मुकाबला करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा- ‘मैंने उनसे कहा कि समय से पहले चुनाव सबसे बढ़िया विकल्प है। इस्तीफा देने के बारे में तो मैं सोच भी नहीं सकता। जहां तक अविश्वास प्रस्ताव का प्रश्न है, तो मैं उसका आखिरी पल तक मुकाबला करुंगा, ताकि लोग देख सकें कि किन लोगों ने अपनी वफादारियों का सौदा कर लिया है।’
इसके पहले विदेशी मीडिया के एक हिस्से में कयास लगाए गए थे कि स्वतंत्र फैसले लेने की कोशिश करने कारण ‘एस्टेब्लिशमेंट’ इमरान खान से नाराज हो गया है। यह भी कहा गया है कि ‘एस्टेब्लिशमेंट’ के इशारे पर ही विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार के खिलाफ लामबंद और सक्रिय हुए। इमरान खान ने टीवी इंटरव्यू में बताया कि उन्हें पिछले साल अगस्त में ही भनक लग गई थी कि उन्हें सत्ता से हटाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने अपना ये आरोप दोहराया कि ये षडयंत्र लंदन से रचा गया। तभी से ये खबरें मिलने लगीं कि कुछ लोग बार-बार लंदन आ-जा रहे हैं।
पूर्व आईएसआई चीफ की नियुक्ति पर उभरे मतभेद
इमरान खान ने बेलाग कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ इस साजिश के सूत्रधार हैं। नवाज शरीफ 2019 से लंदन में रह रहे हैं। इंटरव्यू के दौरान इमरान खान ने कई ऐसे लोगों के नाम लिए, जिनकी लंदन में नवाज शरीफ से मुलाकात हुई। उन्होंने बताया कि इस सिलसिले में लंदन में आखिरी बैठक बीते तीन मार्च को हुई, जिसमें अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी भी शामिल हुए।
इमरान खान ने पुष्टि की कि खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख की नियुक्ति के सवाल पर उनका सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा से मतभेद उभरा था। उन्होंने कहा- ‘पिछले साल अक्तूबर में मैं चाहता था कि लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद आईएसआई के महानिदेशक पद पर आगे भी बने रहें, क्योंकि तब अफगाननिस्तान में गृह युद्ध भड़कने का भय था। जनरल बाजवा के इस बारे में अलग विचार थे। मैं देश की सरकार के प्रमुख के रूप में सोच रहा था। मैं किसी के साथ पक्षपात नहीं करना चाहता था।’
ये बात पहले से चर्चा में रही है कि इस मुद्दे पर ही जनरल बाजवा इमरान खान से नाराज हो गए। उसके बाद से इमरान विरोधी लामबंदी मजबूत होने लगी। अब इमरान खान और उनकी पार्टी ने यह खुला आरोप भी लगाया है कि इमरान खान की जान खतरे में है।