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न्यूजीलैंड: क्राइस्टचर्च नरसंहार के बाद पुलिस सतर्क, सशस्त्र बल को लेकर उठाया यह बड़ा कदम
Fri, 18 Oct 2019 12:09 PM IST
योगेश साहू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश साहू
Updated Fri, 18 Oct 2019 12:09 PM IST
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christchurch mosque shooting
- फोटो : PTI
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न्यूजीलैंड में क्राइस्टचर्च नरसंहार के बाद पुलिस अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि देश के कुछ हिस्सों में सतर्कता बरतने के लिहाज से सशस्त्र पुलिसबल की गश्त बढ़ाने का फैसला लिया गया है। बता दें कि इस साल के शुरू में क्राइस्टचर्च पर हुए हमले में 51 लोगों की मौत हो गई थी।
न्यूजीलैंड उन कुछ देशों में से एक है जहां पुलिस कर्मी सामान्य ड्यूटी पर रहते हुए बंदूक नहीं रख सकते हैं। क्राइस्टचर्च हमले के बाद से इसे लेकर देश में बहस छिड़ी हुई है कि पुलिस कर्मियों को अपने पास हथियार रखने चाहिए या नहीं।
समाचार एजेंसी एएनआई ने अल जजीरा के हवाले से खबर दी है कि पुलिस कमिश्नर माइक बुश ने एक बयान में कहा है कि क्राइस्टचर्च में 15 मार्च की घटनाओं के बाद से माहौल में बदलाव आया है।
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उन्होंने कहा कि पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे कर्मचारी भूमिका को निभाने में हर प्रकार से सक्षम हैं और यह भी कि जनता खुद को सुरक्षित महसूस करे।
उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि सही लोगों के हाथों में सही उपकरण-हथियार हों, जो कुशलता और ज्ञान के साथ हर समय जवाब देने के लिए तैयार रहें। इसके लिए 28 अक्तूबर से छह महीने का एक ट्रायल प्रोजेक्ट तीन क्षेत्रों में शुरू किया जाएगा।
बुश ने कहा कि ऐसी किसी घटना के समाने आने पर नियमित रूप से सशस्त्र, सुसज्जित, मोबाइल टीमें प्रथम पंक्ति के अधिकारियों की मदद के लिए तैयार रहेंगी, जिन्हें सामरिक क्षमताओं की आवश्यकता होती है।
बता दें कि इसी साल 15 मार्च को शुक्रवार की नमाज के दौरान दो मस्जिदों को निशाना बनाकर हुई गोलीबारी में 51 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग इतने ही लोग घायल हो गए थे। इस आतंकवादी कृत्य ने पूरे मुस्लिम समुदाय को हिला कर रख दिया था। जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय और स्थानीय लोगों ने हताहतों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई थी।
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न्यूजीलैंड उन कुछ देशों में से एक है जहां पुलिस कर्मी सामान्य ड्यूटी पर रहते हुए बंदूक नहीं रख सकते हैं। क्राइस्टचर्च हमले के बाद से इसे लेकर देश में बहस छिड़ी हुई है कि पुलिस कर्मियों को अपने पास हथियार रखने चाहिए या नहीं।
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समाचार एजेंसी एएनआई ने अल जजीरा के हवाले से खबर दी है कि पुलिस कमिश्नर माइक बुश ने एक बयान में कहा है कि क्राइस्टचर्च में 15 मार्च की घटनाओं के बाद से माहौल में बदलाव आया है।
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उन्होंने कहा कि पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे कर्मचारी भूमिका को निभाने में हर प्रकार से सक्षम हैं और यह भी कि जनता खुद को सुरक्षित महसूस करे।
उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि सही लोगों के हाथों में सही उपकरण-हथियार हों, जो कुशलता और ज्ञान के साथ हर समय जवाब देने के लिए तैयार रहें। इसके लिए 28 अक्तूबर से छह महीने का एक ट्रायल प्रोजेक्ट तीन क्षेत्रों में शुरू किया जाएगा।
बुश ने कहा कि ऐसी किसी घटना के समाने आने पर नियमित रूप से सशस्त्र, सुसज्जित, मोबाइल टीमें प्रथम पंक्ति के अधिकारियों की मदद के लिए तैयार रहेंगी, जिन्हें सामरिक क्षमताओं की आवश्यकता होती है।
बता दें कि इसी साल 15 मार्च को शुक्रवार की नमाज के दौरान दो मस्जिदों को निशाना बनाकर हुई गोलीबारी में 51 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग इतने ही लोग घायल हो गए थे। इस आतंकवादी कृत्य ने पूरे मुस्लिम समुदाय को हिला कर रख दिया था। जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय और स्थानीय लोगों ने हताहतों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई थी।