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न्यूजीलैंड हमला: हिंसक अपराधों को बढ़ावा दे रहे लाइव वीडियो
Sat, 16 Mar 2019 10:40 AM IST
Shilpa Thakur
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shilpa Thakur
Updated Sat, 16 Mar 2019 10:40 AM IST
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हमलावर ने बनाया लाइव वीडियो
- फोटो : PTI
न्यूजीलैंड में शुक्रवार को दो मस्जिदों पर हुए हमले की दुनियाभर में लाइव स्ट्रीमिंग (लाइव वीडियो) की गई। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी हिंसा को ऐसे इंटरनेट पर वायरल किया गया हो। ऐसी हिंसक वीडियो को ऑनलाइन शेयर होने से रोकना वर्षों के निवेश के बाद भी टेक कंपनियों के लिए मुसीबत बना हुआ है।
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राइटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक हमलावर ने मस्जिद पर हमला करते समय 17 मिनट का लाइव वीडियो बनाया। वहीं फेसबुक का कहना है कि न्यूजीलैंड पुलिस से पता चलने के बाद उन्होंने लाइव वीडियो हटा दिया। लेकिन कुछ घंटों बाद भी वीडियो फुटेज फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब और फेसबुक के इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर मौजूद थी।
साथ ही वीडियो फाइल-शेयरिंग वेबसाइट पर भी मौजूद थी। जो लोग इस वीडियो को शेयर करना चाहते थे उन्होंने मिनटों में इसे कई एप्स और वेबसाइट पर डाल दिया। फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब और मेगा का कहना है कि वह हमले से जुड़ी सामग्री को हटाएंगे।
ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी अपराध को करते वक्त अपराधी ने उसका लाइव वीडियो बनाया है। इससे पहले थाईलैंड में एक पिता ने 2017 में अपनी बेटी की हत्या करते वक्त फेसबुक पर लाइव वीडियो बनाया था। घटना के एक दिन बाद वीडियो पर तीन लाख सत्तर हजार व्यूज थे। बाद में फेसबुक ने वीडियो हटा दिया।
अमेरिका के शिकागो में 18 वर्षीय लड़के को भी कुछ एंटी वाइट लोगों ने 2017 में प्रताड़ित किया था और उसका लाइव वीडियो बनाया था। उसी साल कई अन्य घटनाओं को करते हुए भी हमलावरों ने ऐसे ही वीडियो बनाए थे।
फेसबुक के दुनियाभर में करीब 230 करोड़ यूजर्स हैं। उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फेसबुक ने अपनी सेफ्टी एंड सिक्योरिटी टीम का आकार भी काफी बड़ा कर लिया है। अपराध से जुड़ी सामग्री का पता लगाने के लिए फेसबुक नई तकनीकों पर ध्यान दे रहा है। लेकिन इस सबके पीछे टेक कंपनियों को ही जिम्मेदार बताया जाता है।
न्यूजीलैंड हमले के बाद वहां की पूर्व प्रधानमंत्री हेलेन क्लार्क का कहना है कि नफसर फैलाने वाली सामग्री को हटाने में टेक कंपनी की गति धीमी है। वहीं अगर देखा जाए तो इसके लिए वो लोग भी जिम्मेदार हैं जो ऐसी वीडियो को शेयर कर हिंसा बढ़ाने का काम करते हैं।