कोरोना वायरस संक्रमण: बड़ों की तुलना में लॉन्ग कोविड से सुरक्षित हैं बच्चे
ताजा अध्ययन के तहत बच्चों और किशोर उम्र लोगों में लॉन्ग कोविड के पांच प्रमुख लक्षणों की पहचान की गई है। ये हैं- सिर दर्द, थकान, नींद में बाधा, एकाग्र होने में दिक्कत और पेट में दर्द। मरडॉक चिल्ड्रेन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुए एक दूसरे अनुसंधान से यह सामने आया है कि कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट ने पिछले वैरिएंट्स की तुलना में बच्चों में कोई ज्यादा गंभीर लक्षण नहीं पैदा किया है। लेकिन यह जरूर देखा गया कि इस वैरिएंट से संक्रमण फैलने का अंदेशा अधिक रहता है...
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कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित हुए बच्चों में लॉन्ग कोविड के लक्षण अधिक से अधिक 12 हफ्तों तक कायम रहते हैं। ये बात एक नए शोध से सामन आई है। लॉन्ग कोविड का मतलब कोरोना संक्रमण ठीक होने के बाद भी पीड़ितों में जारी रहने वाले कई तरह के लक्षणों से है। ताजा अध्ययन रिपोर्ट बाल संक्रमण रोग से संबंधित पत्रिका- पेडियाट्रिक इन्फेक्शंस डिजीज जर्नल में छपी है। इस अध्ययन से यह भी सामने आया कि बालिक लोगों की तुलना में बहुत कम बच्चे लॉन्ग कोविड से पीड़ित हो रहे हैं।
ये रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए 14 अध्ययनों के विश्लेषण पर आधारित है। उन अध्ययनों में 19,426 बच्चों और वयस्कों में लॉन्ग कोविड के जारी रहे लक्षणों पर गौर किया गया। ऑस्ट्रेलिया स्थित मरडॉक चिल्ड्रैंस रिसर्च इंस्टीट्यूट में बाल संक्रामक रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर नाइजेल कर्टिस इस अध्ययन रिपोर्ट के लेखकों में एक हैं। उन्होंने अखबार द गार्जियन से कहा कि लॉन्ग कोविड से जुड़े खतरों को तय करने के लिए अभी और अनुसंधान की जरूरत है। उससे ही तय होगा कि 12 साल के कम उम्र के बच्चों को कोरोना का टीका लगाने की आवश्यकता है या नहीँ।
लॉन्ग कोविड के दुनियाभर में अब तक 200 से ज्यादा लक्षणों की पहचान की गई है। लेकिन इस बारे में अभी कोई निष्कर्ष नहीं है कि ये लक्षण कितने समय तक जारी रहते हैं। अलग-अलग व्यक्तियों में ये लक्षण अलग-अलग देखे गए हैं। कर्टिस ने कहा- ‘अभी ऐसा कुछ नहीं है जिसे हम माप सकें। न ही ऐसा कुछ है जिसका टेस्ट हो सके। कई बार यह समझना मुश्किल होता है कि जो लक्षण दिख रहे हैं वे कोविड संक्रमण की वजह से हैं, या लॉकडाउन के मनोवैज्ञानिक प्रभाव के कारण या फिर किसी दूसरी वजह से।’
ताजा अध्ययन के तहत बच्चों और किशोर उम्र लोगों में लॉन्ग कोविड के पांच प्रमुख लक्षणों की पहचान की गई है। ये हैं- सिर दर्द, थकान, नींद में बाधा, एकाग्र होने में दिक्कत और पेट में दर्द। लेकिन मुश्किल यह सामने आई कि जितनी संख्या में कोविड मरीजों ने ऐसे लक्षणों की शिकायत की, उतनी ही संख्या में अध्ययन में शामिल उन लोगों ने भी की, जिन्हें कोविड नहीं हुआ था। लेकिन यह देखने में जरूर आया कि किसी बच्चे या किशोरों में ऐसे लक्षण 12 हफ्तों से ज्यादा नहीं टिके।
मरडॉक चिल्ड्रेन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुए एक दूसरे अनुसंधान से यह सामने आया है कि कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट ने पिछले वैरिएंट्स की तुलना में बच्चों में कोई ज्यादा गंभीर लक्षण नहीं पैदा किया है। लेकिन यह जरूर देखा गया कि इस वैरिएंट से संक्रमण फैलने का अंदेशा अधिक रहता है। कर्टिस ने कहा- ‘कोविड पीड़ित बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत बहुत कम पड़ती है। उन्हें आईसीयू में रखने की जरूरत तो और भी कम पड़ती है। ऑस्ट्रेलिया में ज्यादातर बच्चों को एहतियातन अस्पताल में भर्ती किया गया है।’ अध्ययन से यह भी सामने आया है कि जो बच्चे पहले से मोटापा, किडनी की समस्या या कमजोर इम्युनिटी का शिकार थे, उन्हें कोविड के लक्षणों के गंभीर रूप लेने की आशंका 25 गुना तक ज्यादा रही।