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UN: हिन्दू-कुश हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन के लिए ठोस सहयोग पर लक्षित नई पहल
Tue, 20 Dec 2022 08:26 PM IST
शैलजा श्रीवास्तव
यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार
Published by: शैलजा श्रीवास्तव
Updated Tue, 20 Dec 2022 08:26 PM IST
सार
दक्षिण एशिया के पांच देशों- भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल- में स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालयों के शीर्ष अधिकारी, हिन्दू-कुश हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन, आपदा, आपात हालात के लिए तैयारी और आर्थिक-सामाजिक विकास पर क्षेत्रीय सहयोग मजबूत करने के लिए एकजुट होकर कार्रवाई कर रहे हैं।
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हिन्दू-कुश हिमालय क्षेत्र में पर्वतीय समुदाय
- फोटो : UN Nepal
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विस्तार
इस वर्ष, 11 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र विकास प्रणाली में देशीय स्तर पर शीर्ष प्रतिनिधि- बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और पाकिस्तान के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर सीमापार साझेदारी के तहत, संयुक्त गतिविधियों की एक श्रृंखला पर काम करने के लिए एकजुट हुए।
इस पहल का उद्देश्य है- वैश्विक तापमान वृद्धि से संबंधित आम समस्याओं का मिलकर समाधान करना, जिसमें जैव विविधता की हानि, हिमनदों के पिघलने में तेजी और जल की अनुमानित कमी शामिल है।
इस पहल से हिन्दू-कुश हिमालय क्षेत्र और इसकी पर्वत श्रृंखला में स्थित इन पांचों देशों के अलावा, चीन, म्यांमार और अफगानिस्तान में भी लोगों की आजीविका और कल्याण प्रभावित होने की उम्मीद है। इस क्षेत्र की आबादी 21 करोड़ है और इसे तीसरे ध्रुव के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इसमें ध्रुवीय चोटी क्षेत्र से इतर दुनिया में सबसे बड़े हिम आवरण, हिमनद और पर्माफ्रॉस्ट स्थित हैं।
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वर्ष 2030 तक वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री तक सीमित करने के पेरिस समझौते में निर्धारित लक्ष्य को पूरा कर लेने के बावजूद, नेपाल स्थित एक अंतरसरकारी ज्ञान एवं शिक्षण केंद्र, इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) द्वारा किए गए एक आकलन के अनुसार पहले से ही जलवायु परिवर्तन से गंभीर रूप से प्रभावित हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र का तापमान, पूर्व-औद्योगिक स्तर के मुकाबले 2100 तक पांच डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है।
एशिया-प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र विकास समन्वय कार्यालय के क्षेत्रीय निदेशक, डेविड मैकलाकलनकार ने कहा कि यह पहल संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों को समन्वित करेगी क्योंकि यह जलवायु कार्रवाई आपदा प्रतिक्रिया और आपातकालीन तैयारी से संबंधित है। इसका उद्देश्य सतत विकास लक्ष्यों के दूसरे, 11वें और 13वें लक्ष्य की पैरोकारी करते हुए एसडीजी के लिए संयुक्त राष्ट्र की महत्वाकांक्षा को पूरा करने में तेजी लाना है।
उन्होंने कहा कि यह जलवायु परिवर्तन की चुनौती झेल रही दुनिया में, विभिन्न देशों के युवाओं को उन गतिविधियों में शामिल करना जारी रखेगा, जिसके तहत वो उस भविष्य के लिए पैरोकारी कर सकें, जैसा भविष्य वो चाहते हैं। इस तरह की पहल से रैजिडेंट कोऑर्डिनेटर्स, संयुक्त राष्ट्र की देशीय टीमों और अन्य विकास भागीदारों को आपस में जुड़े उन मुद्दों पर लगातार सहयोग मिलता रहेगा, जिनका सीमाओं के दोनों तरफ व्यापक प्रभाव पड़ता है।
‘महत्वपूर्ण साझेदारी’
सीमाओं के परे जाने वाली इस साझेदारी में युवाओं की आवाज परिलक्षित करने के इरादे से रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर कार्यालयों ने एक युवा पैनल बहस का आयोजन किया, जिसमें पांच देशों के युवा प्रतिनिधियों ने जलवायु परिवर्तन से क्षेत्र के युवाओं के जीवन पर पड़ने वाले असर पर चर्चा की।
पाकिस्तान की 19 वर्षीय जलवायु कार्यकर्ता रिदा राशिद के अनुसार, क्षेत्रीय युवा पैनल चर्चा ने राष्ट्रीय और सीमा पार के युवाओं के साथ जुड़ने और भविष्य की पहलों के लिए नेटवर्क बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है।
UN Bhutan | सीमापार साक्षेदारी में भूटान के पर्वतीय क्षेत्रों की युवतियों सहित, सभी युवाओं के दृष्टिकोण को शामिल करना, संयुक्त राष्ट्र की कन्ट्री टीमों के लिए एक प्रमुख प्राथमिकता रही है
हाल ही में एक अन्य पैनल चर्चा में पांच रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर ने बताया कि किस तरह 'सीमापार साक्षेदारी' के उद्देश्यों के अनुरूप, उनकी देश की टीमें, अपने संबंधित मेजबान देशों को जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता की हानि के तिहरे संकट की चुनौती से निपटने में मदद कर रही हैं।
पांचों देशों की टीमें जलवायु परिवर्तन से लेकर आपदा के जोखिमों में कमी और उनका मुकाबला करने के लिए क्षमता विकसित करने से लेकर, अपनी जलवायु महत्वाकांक्षाओं को ठोस कार्रवाई में बदलने के लिए प्रयासरत हैं।
भूटान में यूएन की रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर कार्ला रॉबिन हर्षी ने कहा कि यह समझना होगा कि कार्बन उत्सर्जन में कटौती और अनुकूलन के उपाय, समावेशी एवं सीमाओं से परे हैं। भूटान और उसके पड़ोसी देश जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति संवेदनशील हैं। जलवायु परिवर्तन से जुड़ा जोखिम और क्षति, सीमाओं से परे हैं, इसलिए हमें भविष्य की जरूरतों और चुनौतियों का समाधान करने के लिए सीमाओं से परे जाकर, समाधान और तंत्र खोजने की आवश्यकता है।
'Students' Educational and Cultural Movement of Ladakh' के संस्थापक-निदेशक सोनम वांगचुक ने जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध लड़ाई और हिंद-कुश हिमालय क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं को कम करने के प्रयासों में महिलाओं को शामिल करने पर जोर दिया।
जलवायु परिवर्तन का असर
पर्वतीय समुदायों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव पहले से ही महसूस किया जा रहा है। इन संवेदनशील पर्वतीय समुदायों के समक्ष मौजूद चुनौतियां सामने लाने और सीमापार साझेदारी उजागर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस पर पांच देशों की पांच कहानियों का एक वीडियो संकलन संयुक्त राष्ट्र के पांचों देशों के कार्यालयों के सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म से जारी किया गया था। वीडियो में ब्लॉगर्स और पर्वतारोही बता रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन से पहाड़ों में रहने वाले लोगों के जीवन पर क्या असर पड़ा है।
सभी पांच रैजिडेंट कोऑर्डिनेटर का उद्देश्य है- पूरे क्षेत्र में जलवायु संबंधित खतरों के प्रति समर्थन और जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ, इन देशों में मौजूद संयुक्त राष्ट्र की टीमों के बीच अधिक से अधिक ज्ञान साझा करना और विकास भागीदारों के साथ समन्वय मजबूत करने के लिए बेहतक नेतृत्व प्रदान करना।
UN Bhutan | भूटान की रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर कार्ला रॉबिन हर्शी, रॉयल यूनिवर्सिटी ऑफ भूटान में पारो और थिम्पू के छात्रों के साथ अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस समारोह में शामिल हुईं
इस विस्तृत क्षेत्रीय सहयोग के जरिए संयुक्त राष्ट्र की देशीय टीमें, क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अपनी साक्ष्य-आधारित प्रतिक्रियाओं का विस्तार करेंगी। इस पहल के हिस्से के रूप में, संयुक्त राष्ट्र कार्यालयों ने सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने के प्रयासों को विकसित और मबूत करने का संकल्प लिया है।
एसडीजी, 2015 में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों द्वारा अपनाए गए 17 लक्ष्यों का एक समूह है, जिसका उद्देश्य दुनियाभर में शांति और समृद्धि बनाने और पर्यावरण संबंधी मुद्दों को हल करने में मदद करना है।
प्रत्येक एसडीजी, एक विशिष्ट विषय को संबोधित करता है- ‘सीमापार पहल’ के तहत समन्वय की प्राथमिकताओं में भुखमरी का मुकाबला करना, शहरों और समुदायों का निर्माण, जलवायु परिवर्तन से निपटना तथा उत्पादन एवं खपत सुनिश्चित करना शामिल है।
(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)
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इस पहल का उद्देश्य है- वैश्विक तापमान वृद्धि से संबंधित आम समस्याओं का मिलकर समाधान करना, जिसमें जैव विविधता की हानि, हिमनदों के पिघलने में तेजी और जल की अनुमानित कमी शामिल है।
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इस पहल से हिन्दू-कुश हिमालय क्षेत्र और इसकी पर्वत श्रृंखला में स्थित इन पांचों देशों के अलावा, चीन, म्यांमार और अफगानिस्तान में भी लोगों की आजीविका और कल्याण प्रभावित होने की उम्मीद है। इस क्षेत्र की आबादी 21 करोड़ है और इसे तीसरे ध्रुव के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इसमें ध्रुवीय चोटी क्षेत्र से इतर दुनिया में सबसे बड़े हिम आवरण, हिमनद और पर्माफ्रॉस्ट स्थित हैं।
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वर्ष 2030 तक वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री तक सीमित करने के पेरिस समझौते में निर्धारित लक्ष्य को पूरा कर लेने के बावजूद, नेपाल स्थित एक अंतरसरकारी ज्ञान एवं शिक्षण केंद्र, इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) द्वारा किए गए एक आकलन के अनुसार पहले से ही जलवायु परिवर्तन से गंभीर रूप से प्रभावित हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र का तापमान, पूर्व-औद्योगिक स्तर के मुकाबले 2100 तक पांच डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है।
#UNRCs from Bangladesh, Bhutan, India, Nepal & Pakistan have built a transboundary partnership to address environmental crises - climate change, biodiversity loss, glacial melting - & resulting loss of livelihood & well-being in Hindu Kush Himalayas. 👇🏽https://t.co/E1bxfhxXQM pic.twitter.com/YgP6mTayXr
— United Nations in India (@UNinIndia) December 14, 2022
एशिया-प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र विकास समन्वय कार्यालय के क्षेत्रीय निदेशक, डेविड मैकलाकलनकार ने कहा कि यह पहल संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों को समन्वित करेगी क्योंकि यह जलवायु कार्रवाई आपदा प्रतिक्रिया और आपातकालीन तैयारी से संबंधित है। इसका उद्देश्य सतत विकास लक्ष्यों के दूसरे, 11वें और 13वें लक्ष्य की पैरोकारी करते हुए एसडीजी के लिए संयुक्त राष्ट्र की महत्वाकांक्षा को पूरा करने में तेजी लाना है।
उन्होंने कहा कि यह जलवायु परिवर्तन की चुनौती झेल रही दुनिया में, विभिन्न देशों के युवाओं को उन गतिविधियों में शामिल करना जारी रखेगा, जिसके तहत वो उस भविष्य के लिए पैरोकारी कर सकें, जैसा भविष्य वो चाहते हैं। इस तरह की पहल से रैजिडेंट कोऑर्डिनेटर्स, संयुक्त राष्ट्र की देशीय टीमों और अन्य विकास भागीदारों को आपस में जुड़े उन मुद्दों पर लगातार सहयोग मिलता रहेगा, जिनका सीमाओं के दोनों तरफ व्यापक प्रभाव पड़ता है।
‘महत्वपूर्ण साझेदारी’
सीमाओं के परे जाने वाली इस साझेदारी में युवाओं की आवाज परिलक्षित करने के इरादे से रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर कार्यालयों ने एक युवा पैनल बहस का आयोजन किया, जिसमें पांच देशों के युवा प्रतिनिधियों ने जलवायु परिवर्तन से क्षेत्र के युवाओं के जीवन पर पड़ने वाले असर पर चर्चा की।
पाकिस्तान की 19 वर्षीय जलवायु कार्यकर्ता रिदा राशिद के अनुसार, क्षेत्रीय युवा पैनल चर्चा ने राष्ट्रीय और सीमा पार के युवाओं के साथ जुड़ने और भविष्य की पहलों के लिए नेटवर्क बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है।
हाल ही में एक अन्य पैनल चर्चा में पांच रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर ने बताया कि किस तरह 'सीमापार साक्षेदारी' के उद्देश्यों के अनुरूप, उनकी देश की टीमें, अपने संबंधित मेजबान देशों को जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता की हानि के तिहरे संकट की चुनौती से निपटने में मदद कर रही हैं।
पांचों देशों की टीमें जलवायु परिवर्तन से लेकर आपदा के जोखिमों में कमी और उनका मुकाबला करने के लिए क्षमता विकसित करने से लेकर, अपनी जलवायु महत्वाकांक्षाओं को ठोस कार्रवाई में बदलने के लिए प्रयासरत हैं।
भूटान में यूएन की रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर कार्ला रॉबिन हर्षी ने कहा कि यह समझना होगा कि कार्बन उत्सर्जन में कटौती और अनुकूलन के उपाय, समावेशी एवं सीमाओं से परे हैं। भूटान और उसके पड़ोसी देश जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति संवेदनशील हैं। जलवायु परिवर्तन से जुड़ा जोखिम और क्षति, सीमाओं से परे हैं, इसलिए हमें भविष्य की जरूरतों और चुनौतियों का समाधान करने के लिए सीमाओं से परे जाकर, समाधान और तंत्र खोजने की आवश्यकता है।
'Students' Educational and Cultural Movement of Ladakh' के संस्थापक-निदेशक सोनम वांगचुक ने जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध लड़ाई और हिंद-कुश हिमालय क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं को कम करने के प्रयासों में महिलाओं को शामिल करने पर जोर दिया।
जलवायु परिवर्तन का असर
पर्वतीय समुदायों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव पहले से ही महसूस किया जा रहा है। इन संवेदनशील पर्वतीय समुदायों के समक्ष मौजूद चुनौतियां सामने लाने और सीमापार साझेदारी उजागर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस पर पांच देशों की पांच कहानियों का एक वीडियो संकलन संयुक्त राष्ट्र के पांचों देशों के कार्यालयों के सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म से जारी किया गया था। वीडियो में ब्लॉगर्स और पर्वतारोही बता रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन से पहाड़ों में रहने वाले लोगों के जीवन पर क्या असर पड़ा है।
सभी पांच रैजिडेंट कोऑर्डिनेटर का उद्देश्य है- पूरे क्षेत्र में जलवायु संबंधित खतरों के प्रति समर्थन और जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ, इन देशों में मौजूद संयुक्त राष्ट्र की टीमों के बीच अधिक से अधिक ज्ञान साझा करना और विकास भागीदारों के साथ समन्वय मजबूत करने के लिए बेहतक नेतृत्व प्रदान करना।
इस विस्तृत क्षेत्रीय सहयोग के जरिए संयुक्त राष्ट्र की देशीय टीमें, क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अपनी साक्ष्य-आधारित प्रतिक्रियाओं का विस्तार करेंगी। इस पहल के हिस्से के रूप में, संयुक्त राष्ट्र कार्यालयों ने सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने के प्रयासों को विकसित और मबूत करने का संकल्प लिया है।
एसडीजी, 2015 में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों द्वारा अपनाए गए 17 लक्ष्यों का एक समूह है, जिसका उद्देश्य दुनियाभर में शांति और समृद्धि बनाने और पर्यावरण संबंधी मुद्दों को हल करने में मदद करना है।
प्रत्येक एसडीजी, एक विशिष्ट विषय को संबोधित करता है- ‘सीमापार पहल’ के तहत समन्वय की प्राथमिकताओं में भुखमरी का मुकाबला करना, शहरों और समुदायों का निर्माण, जलवायु परिवर्तन से निपटना तथा उत्पादन एवं खपत सुनिश्चित करना शामिल है।
(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)