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नीदरलैंड्स में सियासी भूचाल: सरकार गिरी, लेकिन चेहरा शायद नहीं बदलेगा
Fri, 15 Jan 2021 09:49 PM IST
गौरव पाण्डेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, द हेग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, द हेग
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 15 Jan 2021 09:49 PM IST
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नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रुटो और उनकी पूरी कैबिनेट ने दिया इस्तीफा
- फोटो : twitter.com/MinPres
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नीदरलैंड्स में बाल कल्याण योजना घोटाले को लेकर चल रहे विवाद के बीच शुक्रवार को सरकार गिर गई। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अधिक संभावना प्रधानमंत्री मार्क रूटे के फिर से सत्ता में लौट आने की है। अब देश में अगले दो महीने के अंदर आम चुनाव होगा। रूटे लगातार चौथे कार्यकाल के लिए उसमें मतदाताओं का समर्थन मांगेंगे। उनकी मौजूदा लोकप्रियता को देखते हुए अनुमान लगाया गया है कि चुनाव में उनकी पार्टी को ज्यादा नुकसान नहीं होगा। बल्कि उसे कुछ लाभ हो सकता है।
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बाल कल्याण योजना घोटाले में हजारों परिवारों ने आरोप लगाया था कि गलत तरीके से उन्हें मिले लाभ को सरकार ने वापस ले लिया। लेकिन इस घोटाले से रूटे की व्यक्तिगत छवि पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है। 2017 के आम चुनाव में रूटे की दक्षिणपंथी पीपुल्स पार्टी फॉर फ्रीडम एंड डेमोक्रेसी को 33 सीटें मिली थीँ। जनमत सर्वेक्षणों में इस बार उसे 39 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। रूटे ने शुक्रवार को कहा- मेरी राय है कि मैं पार्टी का नेता बना रह सकता हूं, लेकिन आखिरकार यह मतदाताओं को तय करना है। रूटे ने दावा किया कि बाल कल्याण योजना घोटाले में उनका कोई हाथ नहीं है। ये घोटाला 2013 से 2019 तक चलता रहा था।
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रूटे फिलहाल एक गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। इस गठबंधन में शामिल सिर्फ एक नेता ने उससे अलग होने की बात कही है। वे आर्थिक मामलों और जलवायु मंत्री एरिक वीबेस हैं। प्रधानमंत्री रूटे ने आखिरी वक्त तक अपनी मौजूदा सरकार को बचाने की कोशिश की। उनकी दलील थी कि कोरोना वायरस महामारी के बीच देश को स्थिरता की जरूरत है। लेकिन घोटाले के बारे में एक संसदीय समिति की रिपोर्ट आने के बाद गठबंधन में मतभेद खड़े हो गए। इसमें शामिल कुछ पार्टियों ने कहा कि इससे सरकार की छवि खराब हुई है, जिसकी भारी कीमत उसे चुकानी पड़ सकती है। उसके बाद नया चुनाव कराने का फैसला किया गया।
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सत्ता पक्ष के लिए अच्छी बात यह भी है कि संसदीय समिति ने घोटाले में मुख्य विपक्षी लेबर पार्टी के नेता लोडविक ऐसचर की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। ऐसचर पिछली सरकार में समाज कल्याण मंत्री थे। ये रिपोर्ट आने के बाद ऐसचर ने लेबर पार्टी का नेता पद छोड़ दिया है। वामपंथी ग्रीनलेफ्ट पार्टी और धुर-दक्षिणपंथी ग्रीट विल्डर्स पार्टी ने सरकार के इस्तीफे और नया चुनाव कराने की घोषणा का स्वागत किया है।
लेकिन नीदरलैंड के मीडिया में चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद जारी किए गए जनमत सर्वेक्षणों से नहीं लगता कि चुनाव में विपक्षी दलों को कोई खास लाभ होगा। इस सर्वेक्षणों के मुताबिक 150 सदस्यों वाले सदन में प्रधानमंत्री रूटे की पार्टी को अगले चुनाव में 39 सीटें मिल सकती हैँ। इसके बाद विल्डर्स पार्टी रह सकती है, जिसे 22 सीटें मिलने का अनुमान है।
एक करोड़ 70 लाख आबादी वाले इस देश में 2017 के आम चुनाव में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। इस कारण सरकार का गठन महीनों तक टलता रहा। रूटे की पीपुल्स पार्टी फॉर फ्रीडम एंड डेमोक्रेसी बाद में एक गठबंधन तैयार करने में कामयाब रही। इसके लिए उसने कंजरवेटिव क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक अपील, सोशल लिबरल डी-66 और कंजरवेटिव ग्रीन क्रिश्चियन यूनियन पार्टी के साथ हाथ मिलाया। सर्वेक्षणों के मुताबिक अगली सरकार बनने की सूरत भी कुछ वैसी ही हो सकती है।