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Tihar Festival: पांच दिवसीय तिहार उत्सव मना रहा नेपाली समुदाय, काक से लेकर कुकुर तक की होती है पूजा
Sun, 23 Oct 2022 10:15 PM IST
निर्मल कांत
एन. अर्जुन, अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
एन. अर्जुन, अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 23 Oct 2022 10:15 PM IST
सार
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के दिन काक तिहार मनाया जाता है। इस दिन कौवे की पूजा की जाती है। इसे मृत्यु के देवता यमराज का सूचक माना जाता है। कौवा दुःख, मृत्यु इत्यादि अनिष्ट चीजों का प्रतीक होता है।
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तिहार त्योहार (सांकेतिक तस्वीरें)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
नेपाली समुदाय के लोग इन दिनों पांच दिवसीय तिहार उत्सव मना रहे हैं। पूर्वोत्तर असम, मेघालय, अरुणाचल प्ररदेश, पश्चिम बंगाल के दार्जीलिंग, सिक्किम और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों तिहार मनाया जाता है। इस उत्सव की खासियत यह है कि इस दौरान काक से लेकर कुकुर और गाय तक की पूजा की जाती है। विक्रम संवत कैलेंडर के अनुसार यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से शुरू होता है। इसकी शुरुआत काक पूजा से होती है और भाई-टीका या भाई दूज के साथ समापन होता है।
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कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के दिन काक तिहार मनाया जाता है। इस दिन कौवे की पूजा की जाती है। इसे मृत्यु के देवता यमराज का सूचक माना जाता है। कौवा दुःख, मृत्यु इत्यादि अनिष्ट चीजों का प्रतीक होता है। इसलिए इस दिन नेपाली समुदाय के लोग अपने घरों की छत पर कौवों के लिए दाना-पानी रखते हैं और उनकी पूजा करते हैं। कहते हैं ऐसा करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और घर-परिवार से दुःखो का नाश होता है व अकाल मृत्यु टल जाती है।
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इसके अगले दिन कुकुर तिहार होता है। हिंदू धर्म की मान्यता के मुताबिक कुकुर भगवान शिव के एक रूप भैरव बाबा का वाहन होता है। इसलिए इस दिन कुत्तों की पूजा की जाती हैं। उन्हें खाना दिया जाता हैं, माथे पर तिलक लगाकर गले में फूल माला पहनाया जाता है। मान्यता के मुताबिक कुत्ता यमराज के नरक द्वार के प्रहरी भी होते हैं जो नरक की रखवाली करते हैं। इसलिए इस त्यौहार को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है।
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तिहार के पंचमी के दिन गाय माता की पूजा की जाती है। इस दिन भारत में दीपावली मनाया जाता हैं माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है। नेपाल नेपाली समुदाय के लोग भी धन व वैभव की देवी माँ लक्ष्मी की पूजा करते हैं। सुबह उठकर स्नान आदि करके गौ माता की पूजा करते हैं। गाय को हिंदू धर्म में सर्वोच्च स्थान है। गाय को माँ कहा जाता है। गांय को तिलक किया जाता है, फूल का माला पहनाया जाता है, हरा चारा खिलाजा जाता है और फिर उसकी पूजा की जाती है। रात को मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में रात घर और पूरे मोहल्ले को दीपक की रोशनी से प्रकाशित किया जाता है। इस दिन रात को लड़कियां समूह में घर-घर जाकर गीत गाती हैं, जिसे भैली कहा जाता है। और परिवार को आशीर्वाद देती हैं।
तिहारी के चौथे दिन गोरू पूजा की जाती है। इस दिन नेपाली समुदाय के लोग बैलों की पूजा करते हैं। घरों में विभिन्न तरह के पकवान बनाए जाते हैं। गोवर्धन की पूजा होती है। पूरी रात युवा लड़के घर-घर जाते हैं और जाकर दैउसी खेलते हैं। इस दौरान वे जो गीत गाते हैं उसमें वे बताते हैं कि वे वैसे ही नहीं आए हैं बल्कि बलि महाराज के दूत के रूप में वे आए हैं। परिजनों को आशर्वाद देते हैं।
तिहार के अंतिम दिन होता है भाई टीका यानि भाई दूज। यह पर्व भाई और बहन के प्रेम को दर्शाता है। मान्यता हैं कि इस दिन मृत्यु के देवता यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे। तब यमुना माता ने उनके माथे पर तिलक लगाया था तथा उनका स्वागत किया था। उस समय यमराज ने कहा था कि इस दिन जो भी बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाएगी उसके भाई की उस दिन या अकाल मृत्यु नही होगी। इस दिन बहनें भाइयों के घर नहीं बल्कि बहनें भाई के घर जाती हैं। बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाकर लंबी उम्र की कामना करती हैं तो भाई भी बहन के माथे पर तिलक करते हैं। भाई टीके के लिए बहनें अपनी हाथों से मीठे पकवान बनाती हैं।इस तरह पांच दिवसीय महान पर्व तिहार का समापन होता है।