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Nepal: काठमांडू से नेपालगंज तक फैला युवाओं का आक्रोश, प्रदर्शनकारियों ने बताया क्यों और कैसे शुरू हुई हिंसा?
Mon, 08 Sep 2025 06:31 PM IST
हिमांशु चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Mon, 08 Sep 2025 06:31 PM IST
सार
नेपाल में सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ युवाओं का आंदोलन काठमांडू से नेपालगंज तक फैल गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने गोलियां चलानी शुरू कर दीं, जिससे हिंसा भड़क गई।
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नेपाल में प्रदर्शन करते युवा।
- फोटो : PTI
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विस्तार
काठमांडू में सोमवार को संसद के बाहर उस समय हालात बिगड़ गए जब सरकार द्वारा फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण विरोध दर्ज करा रहे थे, लेकिन पुलिस ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह कदम न केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है बल्कि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को दबाने की कोशिश भी है।
प्रदर्शनकारियों ने शुरुआत में शांतिपूर्ण मार्च का आयोजन किया था। वे सोशल मीडिया बहाली और भ्रष्टाचार विरोधी नारे लगा रहे थे। लेकिन जैसे ही भीड़ संसद भवन के करीब पहुंची, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि पुलिस ने नजदीक से गोलियां चलाईं, जिसमें उनके साथी को हाथ और सिर में गोली लगी।
पुलिस कार्रवाई और बढ़ता तनाव
नेपाल पुलिस ने पुष्टि की कि अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हुए हैं। पुलिस ने संसद गेट पर भीड़ को रोकने के लिए गोलीबारी और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। भीड़ ने गेट को नुकसान पहुंचाया और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का पुतला दहन किया।
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ये भी पढ़ें- यरुशलम में फलस्तीनी हमलावरों ने बस पर चलाईं अंधाधुंध गोलियां, छह की मौत, कई अन्य घायल
सोशल मीडिया बैन से नाराजगी
नेपाल सरकार ने चार सितंबर से उन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगाया है जो सरकार के साथ पंजीकृत नहीं हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन माध्यमों से फर्जी आईडी, नफरत फैलाने वाली पोस्ट, धोखाधड़ी और फर्जी खबरों का प्रसार हो रहा था। जनता इसे सेंसरशिप और सरकार की तानाशाही मान रही है।
प्रदर्शन का दायरा बढ़ा
यह विरोध केवल काठमांडू तक सीमित नहीं रहा। झापा, पोखरा, बुटवल, चितवन, नेपालगंज और बिराटनगर में भी युवाओं ने प्रदर्शन किए। जगह-जगह मोटरसाइकिलें जलाई गईं, नगर निगम कार्यालयों के गेट तोड़े गए और सड़कों पर सरकार विरोधी नारे लगे।
ये भी पढ़ें- सोशल मीडिया एप्स पर बैन के बाद नेपाल में भड़की हिंसा, सड़कों पर युवा; 14 की मौत, जानें अपडेट्स
मीडिया और आम जनता की प्रतिक्रिया
स्थानीय मीडिया ने हालात को बेहद गंभीर बताया है। *काठमांडू पोस्ट* और *हिमालयन टाइम्स* ने रिपोर्ट किया कि संसद के भीतर और बाहर गोलियों की आवाजें सुनी गईं। आम लोगों का कहना है कि यह प्रदर्शन भ्रष्टाचार और बढ़ते दमन के खिलाफ उनकी आवाज है, जिसे सरकार दबाना चाहती है।
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प्रदर्शनकारियों ने शुरुआत में शांतिपूर्ण मार्च का आयोजन किया था। वे सोशल मीडिया बहाली और भ्रष्टाचार विरोधी नारे लगा रहे थे। लेकिन जैसे ही भीड़ संसद भवन के करीब पहुंची, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि पुलिस ने नजदीक से गोलियां चलाईं, जिसमें उनके साथी को हाथ और सिर में गोली लगी।
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पुलिस कार्रवाई और बढ़ता तनाव
नेपाल पुलिस ने पुष्टि की कि अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हुए हैं। पुलिस ने संसद गेट पर भीड़ को रोकने के लिए गोलीबारी और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। भीड़ ने गेट को नुकसान पहुंचाया और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का पुतला दहन किया।
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सोशल मीडिया बैन से नाराजगी
नेपाल सरकार ने चार सितंबर से उन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगाया है जो सरकार के साथ पंजीकृत नहीं हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन माध्यमों से फर्जी आईडी, नफरत फैलाने वाली पोस्ट, धोखाधड़ी और फर्जी खबरों का प्रसार हो रहा था। जनता इसे सेंसरशिप और सरकार की तानाशाही मान रही है।
प्रदर्शन का दायरा बढ़ा
यह विरोध केवल काठमांडू तक सीमित नहीं रहा। झापा, पोखरा, बुटवल, चितवन, नेपालगंज और बिराटनगर में भी युवाओं ने प्रदर्शन किए। जगह-जगह मोटरसाइकिलें जलाई गईं, नगर निगम कार्यालयों के गेट तोड़े गए और सड़कों पर सरकार विरोधी नारे लगे।
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मीडिया और आम जनता की प्रतिक्रिया
स्थानीय मीडिया ने हालात को बेहद गंभीर बताया है। *काठमांडू पोस्ट* और *हिमालयन टाइम्स* ने रिपोर्ट किया कि संसद के भीतर और बाहर गोलियों की आवाजें सुनी गईं। आम लोगों का कहना है कि यह प्रदर्शन भ्रष्टाचार और बढ़ते दमन के खिलाफ उनकी आवाज है, जिसे सरकार दबाना चाहती है।
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