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नेपाल में भय: कहीं राजनीतिक अस्थिरता निगल न ले एक शानदार उपलब्धि को

Mon, 29 Nov 2021 04:26 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 29 Nov 2021 04:26 PM IST
सार

नेपाल के राष्ट्रीय योजना आयोग के पूर्व अध्यक्ष पोश राज पांडेय ने कहा है कि नेपाल में कारोबार करना आसान बनाने के लिए जरूरी है कि राजनीतिक स्थिरता रहे। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों की श्रेणी में शामिल होना एक उपलब्धि है, लेकिन उससे नई चुनौतियां भी खड़ी होंगी...

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Nepal under fear that ongoing political instability can become a major obstacle to become developing nation till 2026
शेर बहादुर देउबा - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

नेपाल के लिए बीते हफ्ते एक खुशी की खबर आई। संयुक्त राष्ट्र ने नेपाल को निम्नतम आय वर्ग वाले देशों की श्रेणी से निकाल कर विकासशील देशों की श्रेणी में डालने का रोडमैप पारित कर दिया। ये रोडमैप पांच साल का है। अगर नेपाल ने उसका पालन किया, तो 2026 में उसे विकासशील देश घोषित कर दिया जाएगा। लेकिन इस खुशखबरी के साथ ही नेपाल में ये अंदेशा फैल गया है कि देश में जारी राजनीतिक अस्थिरता इस रोडमैप के पालन में बड़ी रुकावट बन सकती है।

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धीमी हुई आर्थिक विकासदर

संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के मुताबिक बीते सात वर्षों में नेपाल में गरीबी रेखा के नीचे जीवन गुजारने वाले लोगों की संख्या में 50 फीसदी गिरावट आई है। इसके अलावा देश में आमदनी की गैर-बराबरी में भी गिरावट दर्ज हुई है। लेकिन बीते एक साल से देश में आर्थिक विकास की गति धीमी हुई है। इस बीच देश में राजनीतिक अस्थिरता का एक नया दौर भी शुरू हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये हालत देश के लिए एक बड़ी चुनौती है।

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नेपाल के राष्ट्रीय योजना आयोग के पूर्व अध्यक्ष पोश राज पांडेय ने कहा है कि नेपाल में कारोबार करना आसान बनाने के लिए जरूरी है कि राजनीतिक स्थिरता रहे। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों की श्रेणी में शामिल होना एक उपलब्धि है, लेकिन उससे नई चुनौतियां भी खड़ी होंगी। पांडेय ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘विकासशील देश बनने के बाद नेपाल की यूरोपीय बाजार में कोटा फ्री प्रवेश की सुविधा खत्म हो जाएगी। उस कमी को पूरा करने के लिए देश में उत्पादन की लागत घटानी होगी। इसके लिए घरेलू नीतियों मे सुधार करना होगा और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना होगा। राजनीतिक अस्थिरता इन कार्यों में बाधक बन सकती है।’

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आर्थिक विकास के लिए जरूरी है राजनीतिक अस्थिरता

नेपाल सरकार और अमेरिकी अनुदान एजेंसी- मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन ने 2014 में एक साझा अध्ययन रिपोर्ट जारी की थी। इसमें कहा गया था कि नेपाल के आर्थिक विकास में राजनीतिक अस्थिरता प्रमुख बाधक है। रिपोर्ट के मुताबिक ‘राजनीतिक अस्थिरता इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में निवेश की राह में एक प्रमुख बाधा रही है, जिसका परिणाम धीमे आर्थिक विकास के रूप में सामने आया है।’ पर्यवेक्षकों के मुताबिक 2018 में जब नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) और माओइस्ट सेंटर के गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिला, तो नेपाल के लोगों ने राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद की थी। लेकिन पिछले एक साल की घटनाओं ने इस उम्मीद को तोड़ दिया है। अब अस्थिर सरकारों का दौर देश में लौट आया है। अभी पांच दलों वाली गठबंधन सरकार सत्ता में है, जिसका नेतृत्व नेपाली कांग्रेस कर कर रही है।



सरकारी अधिकारियों का कहना है कि वे ऐसी रणनीति बना रहे हैं, जिससे विकासशील देश बनने के बाद देश को होने वाले नुकसान की भरपाई संभव हो जाएगी। राष्ट्रीय योजना आयोग के उपाध्यक्ष विश्वनाथ पौडल ने कहा कि अब सरकार द्विपक्षीय व्यापार संधियों पर ध्यान केंद्रित करेगी। इसके लिए आर्थिक कूटनीति को मजबूत करना होगा। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि ये तभी संभव होगा, अगर देश में स्थिर सरकार रहे। वरना, अभी जो सफलता नेपाल को हासिल हुई है, वह ठोस रूप लेने के पहले ही उसके हाथ से फिसल भी सकती है।

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