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नेपाल ने जारी किया नया राजनीतिक नक्शा, लिपुलेख और कालापानी को भी जोड़ा

Tue, 19 May 2020 08:54 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 19 May 2020 08:54 PM IST
सार

  • लंबे समय से चल रहा है विवादास्पद इलाकों को लेकर दोनों देशों में तनाव
  • लिपुलेख के रास्ते भारत-चीन सड़क मार्ग के उद्घाटन के बाद से बौखलाया नेपाल
  • नक्शा बदलने को लेकर नेपाल सरकार पर लंबे समय से था राजनीतिक दबाव

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Nepal released new political map, also added Lipulekh and Kalapani
Nepal Parliament - फोटो : For Refernce Only

विस्तार

लिपुलेख पर अपना आधिकारिक हक बताते हुए नेपाल ने अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी किया है। इस नक्शे में लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को भी शामिल किया गया है। भूमि प्रबंधन मंत्री पद्मा आर्याल ने सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह नया नक्शा पेश किया जिस पर कैबिनेट में सहमति भी बनी।

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माना जा रहा है कि यह नक्शा अब आधिकारिक तौर पर नेपाल के स्कूली पाठ्यक्रमों के अलावा सभी जगह इस्तेमाल होगा।

नेपाल सरकार के प्रवक्ता और वित्त मंत्री युबराज खाटीवाड़ा ने बताया कि कैबिनेट ने इस नए नक्शे पर मुहर लगा दी है और अब यह सरकारी दस्तावेजों और तमाम प्रशासनिक कामकाज में इस्तेमाल किया जाएगा।
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लिपुलेख को नक्शे में शामिल करने को लेकर नेपाल सरकार उसी दिन से गंभीर हो गई थी जब 8 मई को भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिपुलेख के रास्ते सड़क मार्ग का उद्घाटन किया था। नेपाल लिपुलेख पर लंबे समय से अपना हक जताता रहा है।  
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नेपाल के एक मंत्री ने द पोस्ट को बताया कि सड़क मार्ग के उद्घाटन से ज्यादा चिंता हमें तब हुई जब भारत के सेने प्रमुख ने इससे संबंधित बयान दिया। हम ये समझते रहे कि भारत हमारी चिंता को समझेगा लेकिन अब हमें लग रहा है कि इस इलाके को नेपाली नक्शे में शामिल करना जरूरी है।

कुछ दिन पहले राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने भी सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों का ऐलान करते हुए कहा था कि नेपाल का संशोधित राजनीतिक नक्शा जल्दी ही जारी किया जाएगा। प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने भी भारतीय सेना प्रमुख के बयान पर नाराजगी जताई थी। सड़क मार्ग खोले जाने के बाद से नेपाल के ज्यादातर लोग ये मानते हैं कि भारत चीन को खुश करने में लगा है।

नेपाल की ओली सरकार पर लंबे समय से ये दबाव रहा है कि वह अपने नक्शे में बदलाव करे और इसे जल्द से जल्द जारी करे। करीब 6 महीने पहले भी ये मांग उठी थी जब भारत ने अपने क्षेत्र में कालापानी को शामिल कर लिया था, जिसपर नेपाल लंबे समय से अपना दावा करता रहा है।

भारत-नेपाल के रिश्तों के बीच कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा हमेशा से विवाद का विषय रहा है। लेकिन ये विवाद तब और बढ़ गया जब भारत ने इन इलाकों में अपनी गतिविधियां तेज कीं, खासकर भारत-चीन के बीच लिपुलेख होकर गुजरने वाला सड़क मार्ग बनाया।

विवाद की वजह

जानकारों का मानना है कि विवाद की मुख्य वजह महाकाली नदी के उदगम से शुरू होती है। नेपाल का कहना है कि नदी का उद्गम लिपुलेख के पास लिम्पियाधुरा से है और यह दक्षिण पश्चिम की तरफ बहती है।

जबकि भारत का दावा है कि महाकाली नदी कालापानी नदी से निकलती है और दक्षिण और पूर्व की तरफ बहती है। 1816 में नेपाल और ब्रिटिश इंडिया के बीच की गई सुगौली संधि के मुताबिक महाकाली नदी भारत और नेपाल दोनों की ही सीमाओं को छूती है – पूर्व की तरफ नेपाल को और पश्चिम की तरफ भारत को।



इसके बाद से यह विवाद लगातार चला आ रहा है और दोनों ही सरकारों ने इससे जुड़े तमाम क्षेत्रों को लेकर कोई सर्वसम्मत रास्ता नहीं निकाला। अब इसे लेकर यह हलचल बीती 8 मई के बाद से काफी बढ़ गई है।

 

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