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भारत-नेपाल सीमा विवाद: विदेश मंत्री खनाल ने बताया कैसे निकलेगा समाधान? बोले- करीबी संबंधों का करते हैं सम्मान
Wed, 01 Jul 2026 10:13 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, काठमांडो
पीटीआई, काठमांडो
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 01 Jul 2026 10:13 PM IST
सार
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि उनका देश भारत के साथ सीमा संबंधी मतभेदों का समाधान ऐतिहासिक दस्तावेजों और नक्शों के आधार पर द्विपक्षीय कूटनीतिक वार्ता से करने के पक्ष में है। उन्होंने दोनों देशों के बीच स्थापित सीमा तंत्र और अधिकारियों के बीच जारी समन्वय का भी जिक्र किया। खनाल ने स्पष्ट किया कि सीमा क्षेत्रों में चल रहे कार्य आपसी सहमति से आगे बढ़ाए जा रहे हैं।
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नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बुधवार को कहा कि नेपाल भारत के साथ सीमा विवाद को ऐतिहासिक समझौतों और नक्शों के आधार पर कूटनीतिक वार्ता के जरिए सुलझाने के लिए हमेशा तैयार है। संसद के उच्च सदन (राष्ट्रीय सभा) में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए खनाल ने यह भी कहा कि मई में संसद में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के बयान के संबंध में विदेश मंत्रालय पहले ही अपना विस्तृत पक्ष सार्वजनिक कर चुका है।
शिशिर खनाल ने कहा, "नेपाल सरकार, नेपाल और भारत के बीच मौजूद करीबी संबंधों की भावना और संवेदनाओं का सम्मान करते हुए, ऐतिहासिक समझौतों और नक्शों के आधार पर भारत के साथ सीमा विवाद को कूटनीतिक वार्ता के जरिए सुलझाने के लिए हमेशा तैयार है।"
बालेंद्र शाह के किस बयान पर हुआ था विवाद?
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने 31 मई को कहा था कि नेपाल ने भी कई स्थानों पर भारत के क्षेत्रों पर अतिक्रमण किया है। इस मुद्दे के समाधान के लिए उसने चीन और ब्रिटेन को भी शामिल किया है। उनके इस बयान पर विवाद खड़ा हो गया था। नई दिल्ली ने इस विवाद के समाधान में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को साफ तौर पर खारिज कर दिया था। वहीं, नेपाल के विपक्षी दलों ने भी प्रधानमंत्री के बयान की आलोचना की थी।
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इसके बाद में नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया था कि प्रधानमंत्री का आशय सीमा के दोनों ओर के लोगों की ओर से होने वाले सीमा पार अतिक्रमण से था। बुधवार को सुस्ता सीमा क्षेत्र के मुद्दे पर खनाल ने कहा, "नेपाल और भारत के विभिन्न सीमा क्षेत्रों में पहले से ही तंत्र स्थापित किए जा चुके हैं और वे सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।"
भारत-नेपाल सीमा पर हो रहे कामों पर क्या बोले खनाल?
उन्होंने स्पष्ट किया, "अंतरराष्ट्रीय सीमा पर और उसके आसपास जो भी काम किया जा रहा है, वह दोनों पक्षों के बीच समन्वय के साथ किया जा रहा है।" खनाल ने कहा, "जहां तक दक्षिणी नेपाल के सुस्ता क्षेत्र में 132 मीटर लंबे तटबंध के निर्माण का सवाल है, यह काम दोनों देशों के अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित होने के बाद ही आगे बढ़ाया गया है।"
खनाल ने कहा, "दोनों देशों की संबंधित एजेंसियां एक-दूसरे के लगातार संपर्क में हैं और आवश्यक कार्य कर रही हैं।" नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी क्षेत्रों को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद है। दोनों देश इन क्षेत्रों पर अपना-अपना दावा करते हैं। भारत का कहना है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं और इस मुद्दे का समाधान द्विपक्षीय वार्ता के जरिए किया जाना चाहिए।
इससे पहले 10 जून को खनाल ने संसद में कहा था कि नेपाल और भारत के बीच सीमा पार अतिक्रमण से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) काम करेगा। उस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री शाह के बयान पर भी स्पष्टीकरण दिया था। उन्होंने तब कहा था कि नेपाल-भारत सीमा प्रबंधन पर संयुक्त कार्य समूह (जेड़ब्ल्यूजी) की अगली बैठक अगस्त में भारत में आयोजित होगी।
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शिशिर खनाल ने कहा, "नेपाल सरकार, नेपाल और भारत के बीच मौजूद करीबी संबंधों की भावना और संवेदनाओं का सम्मान करते हुए, ऐतिहासिक समझौतों और नक्शों के आधार पर भारत के साथ सीमा विवाद को कूटनीतिक वार्ता के जरिए सुलझाने के लिए हमेशा तैयार है।"
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बालेंद्र शाह के किस बयान पर हुआ था विवाद?
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने 31 मई को कहा था कि नेपाल ने भी कई स्थानों पर भारत के क्षेत्रों पर अतिक्रमण किया है। इस मुद्दे के समाधान के लिए उसने चीन और ब्रिटेन को भी शामिल किया है। उनके इस बयान पर विवाद खड़ा हो गया था। नई दिल्ली ने इस विवाद के समाधान में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को साफ तौर पर खारिज कर दिया था। वहीं, नेपाल के विपक्षी दलों ने भी प्रधानमंत्री के बयान की आलोचना की थी।
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इसके बाद में नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया था कि प्रधानमंत्री का आशय सीमा के दोनों ओर के लोगों की ओर से होने वाले सीमा पार अतिक्रमण से था। बुधवार को सुस्ता सीमा क्षेत्र के मुद्दे पर खनाल ने कहा, "नेपाल और भारत के विभिन्न सीमा क्षेत्रों में पहले से ही तंत्र स्थापित किए जा चुके हैं और वे सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।"
भारत-नेपाल सीमा पर हो रहे कामों पर क्या बोले खनाल?
उन्होंने स्पष्ट किया, "अंतरराष्ट्रीय सीमा पर और उसके आसपास जो भी काम किया जा रहा है, वह दोनों पक्षों के बीच समन्वय के साथ किया जा रहा है।" खनाल ने कहा, "जहां तक दक्षिणी नेपाल के सुस्ता क्षेत्र में 132 मीटर लंबे तटबंध के निर्माण का सवाल है, यह काम दोनों देशों के अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित होने के बाद ही आगे बढ़ाया गया है।"
खनाल ने कहा, "दोनों देशों की संबंधित एजेंसियां एक-दूसरे के लगातार संपर्क में हैं और आवश्यक कार्य कर रही हैं।" नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी क्षेत्रों को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद है। दोनों देश इन क्षेत्रों पर अपना-अपना दावा करते हैं। भारत का कहना है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं और इस मुद्दे का समाधान द्विपक्षीय वार्ता के जरिए किया जाना चाहिए।
इससे पहले 10 जून को खनाल ने संसद में कहा था कि नेपाल और भारत के बीच सीमा पार अतिक्रमण से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) काम करेगा। उस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री शाह के बयान पर भी स्पष्टीकरण दिया था। उन्होंने तब कहा था कि नेपाल-भारत सीमा प्रबंधन पर संयुक्त कार्य समूह (जेड़ब्ल्यूजी) की अगली बैठक अगस्त में भारत में आयोजित होगी।