Nepal Politics: रवि लमिछाने पर गिरी बिजली से थर्राई पुष्प कमल दहल सरकार
Nepal Politics: बीते आम चुनाव में लछिमाने ने अपने चुनाव क्षेत्र में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के उम्मीदवार को भारी बहुमत से हराया। उसके पहले उनके विरोधी उम्मीदवार की तरफ से निर्वाचन आयोग के सामने उनके नागरिक ना होने का तर्क दिया गया था...
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नेपाल की राजनीति में उल्का की तरह उभरे रवि लछिमाने की नागरिकता रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पिछले महीने सत्ता में आई पुष्प कमल दहल सरकार को जोरदार झटका लगा है। लछिमाने को दहल ने उप प्रधानमंत्री बनाया था। लछिमाने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी मौजूदा सत्ताधारी गठबंधन में एक प्रमुख घटक दल है।
विश्लेषकों के मुताबिक विडंबना यह है कि लछिमाने की नागरिकता का सवाल चुनाव के बाद सबसे पहले दहल की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) ने ही उठाया था। पिछले आम चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को मिली अप्रत्याशित सफलता के बाद माओइस्ट सेंटर के नेताओं ने लछिमाने की पीठ पर विदेशी हाथ होने का इल्जाम लगाया। तभी लछिमाने की नागरिकता को रद्द करने संबंधी याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई। बाद में लछिमाने नए बने गठबंधन में शामिल हो गए।
बीते आम चुनाव में लछिमाने ने अपने चुनाव क्षेत्र में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के उम्मीदवार को भारी बहुमत से हराया। उसके पहले उनके विरोधी उम्मीदवार की तरफ से निर्वाचन आयोग के सामने उनके नागरिक ना होने का तर्क दिया गया था। इस आधार पर उन्हें चुनाव लड़ने से रोकने की गुजारिश की गई थी, जिसे आयोग ने ठुकरा दिया।
लछिमाने देश के लोकप्रिय टीवी एंकर थे। 2014 में उन्होंने अमेरिका की नागरिकता ले ली थी। पिछले साल उन्होंने अमेरिकी नागरिकता छोड़ दी थी। लेकिन उसके बाद उन्होंने फिर से नेपाल की नागरिकता ग्रहण करने की प्रक्रिया पूरी नहीं की। इसी आधार पर संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की उनकी सदस्यता को न्यायालय में चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए लछिमाने की प्रतिनिधि सभा की सदस्यता को रद्द करने का फैसला शुक्रवार को सुनाया।
नेपाल के संविधान के मुताबिक कोई गैर-नागरिक किसी निर्वाचित पद पर नहीं रह सकता। ना ही किसी राजनीतिक दल का पदाधिकारी बन सकता है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट फैसले के तुरंत बाद लछिमाने ने उप प्रधानमंत्री पद के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया।
इस तरह राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी नेता-विहीन हो गई है। इससे पार्टी के भविष्य का सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ हलकों में आशंका जताई गई है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर इस पार्टी का रजिस्ट्रेशन रद्द हो सकता है। यह सवाल निर्वाचन आयोग के प्रवक्ता के सामने भी रखा गया। इस पर प्रवक्ता शालीग्राम शर्मा पौडेल ने कहा- ‘मुझे नहीं लगता है कि लछिमाने के नागरिक ना होने से राष्ट्रीय स्वंतत्र पार्टी की वैधता प्रभावित होगी। लेकिन आयोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बारीकी से अध्ययन करने के बाद ही इस बारे में अपनी राय बताएगा।’
वैसे राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अब राष्ट्रीय स्वंतत्र पार्टी के सामने अपना नया नेता चुनने की चुनौती आ खड़ी हुई है। ऐसा करना आसान नहीं है। लछिमाने ने खुद को एक करिश्माई शख्सियत साबित किया। उस तरह का कोई और नेता पार्टी में मौजूद नहीं है। विश्लेषकों के मुताबिक इस घटनाक्रम से सत्ताधारी गठबंधन के अंदर समीकरण गड़बड़ा सकते हैं। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दहल सरकार और सत्ताधारी गठबंधन के लिए भी एक तगड़ा झटका समझा गया है।