Nepal Politics: देउबा के नेता बनने से एक अनिश्चय टला, लेकिन दहल के रुख पर कयास जारी
Nepal Politics: पर्यवेक्षकों की निगाह प्रमुख विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के नेता केपी शर्मा ओली के रुख पर भी टिकी हुई है। बताया जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री ओली की प्राथमिकता सत्ताधारी गठबंधन को तोड़ना है। इसके लिए यह संभव है कि वे दहल को प्रधानमंत्री बनाने की पेशकश कर दें...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Nepal Politics- प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के नेपाली कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुन लिए जाने से सत्ताधारी गठबंधन में एक अनिश्चिय खत्म हुआ है। लेकिन गठबंधन में शामिल दूसरे सबसे बड़े दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के नेता पुष्प कमल दहल के रुख को लेकर कयासों का दौर अभी जारी है।
नेपाली कांग्रेस में अऩिश्चिय मंगलवार को उस समय बढ़ गया था, जब पार्टी महासचिव गगन थापा ने संसदीय नेता पद के चुनाव के लिए अपनी उम्मीदवारी का पर्चा भर दिया। हालांकि थापा उन नेताओं में हैं, जो पहले से इस पद पर दावा जता रहे थे, लेकिन वे सचमुच प्रधानमंत्री देउबा को चुनौती देंगे या नहीं, इसको कर पहले कयास लगाए जा रहे थे। थापा के पर्चा भर देने के कारण बुधवार को संसदीय दल में मतदान करना पड़ा।
मतदान से यह जाहिर हुआ है कि नेपाली कांग्रेस में देउबा की जड़ें फिलहाल मजबूत हैं। 89 सदस्यीय संसदीय दल में देउबा को 64 वोट मिले। गगन थापा सिर्फ 25 वोट हासिल कर पाए। इस चुनाव परिणाम के साथ यह साफ हो गया है कि अब देउबा ही नेपाली कांग्रेस की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं।
अब सारी निगाहें दहल पर टिक गई हैं। खबरों के मुताबिक दहल इस बात पर अड़े हुए हैं कि पांच दलों के गठबंधन की तरफ से सरकार का नेतृत्व करने का मौका पहले उन्हें दिया जाए। नेपाली कांग्रेस और माओइस्ट सेंटर में इस बात पर सहमति बनी है कि दोनों पार्टियां पांच साल के कार्यकाल में ढाई-ढाई साल तक सरकार का नेतृत्व करेंगी। लेकिन पहले यह मौका किसको मिलेगा, इस पर अभी तक मतभेद बना हुआ है। जबकि राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने राजनीतिक दलों या गठबंधनों से कहा है कि वे अधिकतम 25 दिसंबर तक सरकार बनाने का अपना दावा पेश कर दें।
पर्यवेक्षकों की निगाह प्रमुख विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के नेता केपी शर्मा ओली के रुख पर भी टिकी हुई है। बताया जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री ओली की प्राथमिकता सत्ताधारी गठबंधन को तोड़ना है। इसके लिए यह संभव है कि वे दहल को प्रधानमंत्री बनाने की पेशकश कर दें।
यूएमएल के संसदीय दल के नेता पद का चुनाव भी बुधवार सुबह हुआ। ओली सर्व सम्मति से नेता चुन लिए गए। बीते 20 नवंबर को हुए संसदीय आम चुनाव में यूएमएल को 78 सीटें मिली हैं। इस तरह अगली संसद में वह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होगी। माओइस्ट सेंटर को 32 सीटें मिली हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक सिर्फ यूएमएल और माओइस्ट सेंटर के पास उतनी सीटें नहीं हैं, जिससे वे सरकार बना सकें। उनकी सरकार तभी बन पाएगी, जब वे कुछ और दलों को अपने पाले में लाने में सफल रहें। माओइस्ट सेंटर के अंदरूनी सूत्र मीडिया से बातचीत में यह दावा कर चुके हैं कि कुछ छोटे दलों ने दहल को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का वादा किया है। इस बीच एक कयास यह है कि ओली और दहल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के नेता माधव कुमार नेपाल को राष्ट्रपति बनाने की पेशकश कर उनकी पार्टी का समर्थन हासिल कर सकते हैँ। उस स्थिति में वे ‘कम्युनिस्ट एकता’ कायम करने का दावा भी अपने समर्थकों के सामने पेश कर पाएंगे।