Nepal Politics: उपचुनाव में हार से नेपाली कांग्रेस में खड़ा हुआ संकट, दो महासचिव बगावत के मूड में
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विस्तार
हाल के उप चुनाव नतीजों से बुरी तरह हिली नेपाली कांग्रेस पार्टी में अब बगावत की हालत बनती नजर आ रही है। उप चुनाव वाली तीनों संसदीय सीटों पर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) विजयी रही। इससे हालांकि धक्का कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) और प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) को भी लगा, नेपाली कांग्रेस के नेता अपनी हार को पचा नहीं पा रहे हैं।
नेपाली कांग्रेस के नेता खास कर इससे ज्यादा आहत हैं कि उपचुनाव से ठीक पहले अर्थशास्त्री स्वर्णिम वागले पार्टी से इस्तीफा देकर आरएसपी के उम्मीदवार बन गए। उन्होंने सत्ताधारी गठबंधन के साझा उम्मीदवार को उस सीट पर हरा दिया, जो रामचंद्र पौडेल के राष्ट्रपति बन जाने के कारण खाली हुई थी। तानाहम नाम की यह सीट नेपाली कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी, लेकिन यहां आरएसपी उम्मीदवार को भारी अंतर से जीत मिली।
अब पार्टी के दो महासचिवों गगन थापा और विश्व प्रकाश शर्मा पार्टी प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के खिलाफ बगावत का झंडा उठाने की तैयारी में बताए जाते हैं। दोनों ने पार्टी में आमूल सुधार की मांग उठा दी है। पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के अलावा थापा और शर्मा भी चुनाव प्रचार करने तानाहम गए थे, इसके बावजूद वे मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर पाए।
अखबार काठमांडू पोस्ट में छपी एक खबर के मुताबिक दोनों महासचिवों ने अब पार्टी में फिर से जान फूंकने के लिए एक नई रणनीति तैयार की है। बीते सात मई को थापा ने एक बयान जारी किया, जिसमें उसमें उन्होंने साफ संकेत दिया कि पार्टी के मौजूदा हाल को लेकर उनका सब्र अब चूक रहा है। खास कर उन्होंने पार्टी के अंदर निर्णय प्रक्रिया की आलोचना की।
क्या दोनों नेता विद्रोह की तैयारी में है, इस बारे में पूछे जाने पर नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शेखर कोइराला ने पत्रकारों से कहा- ‘दोनों नेताओं के शेर बहादुर देउबा से कुछ मतभेद हैं। थापा से मेरी बात हुई है। हमने आगे के रास्ते पर बातचीत की है।’ शेखर कोइराला और थापा को करीबी माना जाता है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक थापा और शर्मा ने अपने करीबी नेताओं को बताया है कि ‘पार्टी के शुद्धिकरण’ के लिए अब वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने कहा है कि अगर देउबा ने उन्हें नजरअंदाज करना जारी रखा, तो वे महासचिव पद से इस्तीफा भी दे सकते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल में पार्टी पदाधिकारियों की एक बैठक के दौरान देउबा और थापा एवं शर्मा के बीच अप्रिय बातें हुईं। एक पदाधिकारी के मुताबिक थापा और शर्मा दोनों देउबा से पूरी तरह निराश हो चुके हैं।
नेपाली कांग्रेस की इन अंदरूनी घटनाओं के बारे में राजनीतिक विश्लेषक विष्णु सपकोटा ने काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘पार्टी में सुधार आसान नहीं है, लेकिन यह असंभव भी नहीं है। सब कुछ इस पर निर्भर करेगा कि इसके लिए कितनी मजबूती और ईमानदारी से प्रयास किया जाता है।’
बताया जाता है कि थापा, शर्मा और कुछ अन्य नेता पार्टी का विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग करने जा रहे हैं, ताकि पार्टी विचारधारा, सिद्धांतों और संगठन की स्थिति पर चर्चा की जा सके। सियासी हलकों में इसको लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी में सुधार की इन कोशिशों के प्रति देउबा की कैसी प्रतिक्रिया रहेगी।