Nepal PM visit to India: भारत यात्रा के दौरान आलोचकों की हर इच्छा को पूरी नहीं कर पाए नेपाली पीएम दहल
Nepal PM visit to India: नई दिल्ली गए नेपाली प्रतिनिधिमंडल में बुधवार को उस समय गहरी नाराजगी पैदा हुई, जब मौर्य होटल में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा उससे मिले। दोनों भारतीय अधिकारियों ने वहां प्रस्ताव रखा कि बिजली व्यापार संबंधी समझौते को फिलहाल टाल दिया जाए...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल की नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई बातचीत को लेकर नेपाल में मिली-जुली प्रतिक्रिया हुई है। वैसे कुल मिला कर इस बात पर यहां संतोष जताया गया है कि आपसी संबंध में गुजरे वर्षों में बने रहे तनाव से आगे निकल कर दोनों देशों के नेताओं ने आमने-सामने बैठ कर बातचीत की और उनके बीच कई महत्त्वपूर्ण समझौते हुए।
इसके बावजूद नेपाल के कूटनीति हलकों और मीडिया में ज्यादा चर्चा उन मुद्दों की है, जिन पर दहल को ज्यादा सफलता नहीं मिली। इस सिलसिले में वायु मार्ग और पंचेश्वर बहुद्देश्यीय परियोजना का जिक्र किया गया है। हालांकि दोनों देशों के बीच बिजली के कारोबार को लेकर दीर्घकालिक सहमति बनी, लेकिन इस बारे में कोई ठोस समझौता नहीं हुआ।
अखबार काठमांडू पोस्ट ने एक रिपोर्ट में कहा है कि दहल की इस भारत यात्रा के दौरान नेपाल की तीन प्राथमिकताएं थीं। नेपाल में लोगों को उम्मीद थी कि इस यात्रा के दौरान दोनों देश के बीच महेंद्रनगर से एक अतिरिक्त वायु मार्ग पर विमान सेवा की शुरुआत का समझौता होगा, बिजली कारोबार के लिए 25 वर्ष का समझौता होगा और पंचेश्वर परियोजना पर अंतिम सहमति बन जाएगी।
नई दिल्ली गए नेपाली प्रतिनिधिमंडल में बुधवार को को उस समय गहरी नाराजगी पैदा हुई, जब मौर्य होटल में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा उससे मिले। दोनों भारतीय अधिकारियों ने वहां प्रस्ताव रखा कि बिजली व्यापार संबंधी समझौते को फिलहाल टाल दिया जाए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके विरोध में नेपाली प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक बिजली व्यापार का समझौता नहीं होता, नेपाल लोवर अरुण और फुकोट करनाली पनबिजली परियोजनाओं के लिए करार पर दस्तखत नहीं करेगा।
इस कड़वाहट के बाद गुरुवार को दोनों देशों में एक मोटी सहमति बनी। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मुलाकात के दौरान 25 साल के बिजली व्यापार करार पर सिद्धांत रूप में सहमति बनी। दहल के साथ नई दिल्ली गए नेपाली प्रतिनिधिमंडल में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने काठमांडू पोस्ट को बताया- ‘बुधवार तक भारतीय पक्ष बिजली समझौते पर दस्तखत के खिलाफ था। लेकिन लोवर अरुण और फुकोट करनाली के बारे में नेपाल के दृढ़ रुख के कारण गुरुवार को दोनों पक्षों में सहमति बन गई। चूंकि भारतीय मंत्रिमंडल ने इस समझौते को अभी मंजूरी नहीं दी है, इसलिए दोनों देशों में इससे संबंधित करार के बारे में दस्तावेजों का आदान-प्रदान नहीं हो सका।’
वायु मार्ग के मुद्दे पर भी दोनों देश एक मोटी सहमति पर पहुंच गए हैं। भारत सरकार महेंद्रनगर से उड़ान भर कर भारत में प्रवेश करने वाले विमानों को एक और मार्ग देने पर राजी हो गई है। लेकिन आलोचकों ने कहा है कि भारत सरकार जो रूट देने पर राजी हुई है, वह 15 हजार से 24 फीट की ऊंचाई वाली है। जेट विमानों के लिए इतनी कम ऊंचाई पर उड़ान भरना महंगा पड़ता है। आलोचकों के मुताबिक इस मामले में दहल भारत से रियायत पाने में नाकाम रहे।
पंचेश्वर परियोजना के बारे में भारत ने इसके प्रति अपनी वचनबद्धता दोहराई। लेकिन आलोचकों के मुताबिक इस बारे में भारत ने पुरानी बातों को दोहराया भर है। इस परियोजना के बारे में संधि 26 साल पहले हुई थी, लेकिन इसके निर्माण की दिशा में काम आगे नहीं बढ़ सका है। दहल की मौजूदा यात्रा के बाद भी ऐसा होने की संभावना नहीं है।