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नेपाल: मंत्री गजेंद्र बहादुर ने दिया इस्तीफा, दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री देउबा की कैबिनेट में हुए थे शामिल

Sun, 10 Oct 2021 08:05 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 10 Oct 2021 08:05 PM IST
सार

नेपाल सरकार में मंत्री बनाए जाने के दो दिन बाद ही गजेंद्र बहादुर हमल ने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम उन्होंने अपनी नियुक्ति पर सवाल उठने के बाद उठाया। इस रिपोर्ट में पढ़िए पूरा मामला। 

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Nepal Minister Gajendra Bahadur Hamal resigns two days after joining cabinet of PM Deuba news in Hindi
नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

नेपाल के उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्री गजेंद्र बहादुर हमल ने अपनी नियुक्ति को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद रविवार को इस्तीफा दे दिया। गजेंद्र बहादुर 48 घंटे पहले ही कैबिनेट में शामिल हुए थे। समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार कैबिनेट सूत्रों ने बताया कि हमाल ने प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा को अपना इस्तीफा सौंपा, जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया। 

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गजेंद्र बहादुर नेता नेपाली कांग्रेस के जिला स्तर के नेता थे। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि उन्हें मंत्री पद मुख्य न्यायाधीश चोलेंद्र शमसेर राणा की सिफारिश पर दिया गया था, जो रिश्ते में उनके बहनोई लगते हैं। ऐसी रिपोर्ट सामने आने के बाद गजेंद्र बहादुर को खासी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा रहा था। वहीं, नेपाली कांग्रेस के अंदर भी अशांति की स्थिति बन गई थी।
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इसके अलावा गजेंद्र बहादुर न तो संसद के उच्च सदन के सदस्य हैं न निचले सदन के। फिर भी, नेपाल के संविधान में एक प्रावधान है जो यह कहता है कि कोई व्यक्ति अगर विधायक नहीं है तो भी वह छह महीने के लिए कैबिनेट मंत्री बन सकता है। सूत्रों के अनुसार गजेंद्र बहादुर ने इस्तीफा देने का फैसला अपनी नियुक्ति को लेकर पड़ रहे लगातार दबाव का सामना करने के बाद लिया है।
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खुद गजेंद्र ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे अपने लिए अपमानजनक बताया। उन्होंने कहा, 'मेरी नियुक्ति को लेकर विभिन्न मीडिया संस्थानों में जो खबरें चल रही हैं और जिस तरह अधिवक्ता इसे गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। इसने देश के लोकतंत्र के लिए, कानून व्यवस्था के लिए व सरकारी संगठनों के बीच सत्ता के विभान के सिद्धांतों के लिए मेरे वर्षों के संघर्ष की गरिमा को घटाया है।'


सूत्रों के अनुसार उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा, अब जब मेरी नियुक्ति का मुद्दा उठाया गया है, मैंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और मेरे लिए यह उचित नहीं है कि इस तरह के आरोपों के बाद भी मैं मंत्री पद पर बना रहूं। गजेंद्र उन 18 नेताओं में से एक थे जिन्हें प्रधानमंत्री देउबा ने शुक्रवार को अपनी कैबिनेट में शामिल किया था। देउबा ने 13 जुलाई को प्रधानमंत्री का पद संभाला था।

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