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Nepal: माओइस्ट सेंटर बागी उम्मीदवारों से परेशान, टूटेगी किंग-मेकर बनने की उम्मीद?

Wed, 02 Nov 2022 04:18 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 02 Nov 2022 04:18 PM IST
सार

माओइस्ट सेंटर में बगावत की पहली खबर 19 अक्तूबर को आई थी, जब डोलाखा जिले की पार्टी प्रमुख देवी खड़का ने टिकट बंटवारे पर असंतोष जताते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उसके बाद से पार्टी में असंतोष की खबरें लगातार मिल रही हैं।

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Nepal Maoist center upset with rebel candidates hope of becoming king maker
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) का काठमांडू स्थित केंद्रीय कार्यालय - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

नेपाल में सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दूसरी सबसे बड़ी पार्टी माओइस्ट सेंटर में टिकट बंटवारे के सवाल पर बगावत तेज हो गई है। 20 नवंबर के आम चुनाव के लिए कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) ने अपने जिन नेताओं को टिकट दिया है, उन्हें संगठन के अंदर बगावत से बड़ी मुश्किल पेश आ रही है। कुछ उम्मीदवारों ने तो पार्टी नेतृत्व को यहां तक बताया है कि चुनाव मैदान में उन्हें जितनी चुनौती विपक्ष से मिल रही है, उससे कहीं ज्यादा समस्या पार्टी के अपने नेता और कार्यकर्ता पैदा कर रहे हैं।

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माओइस्ट सेंटर में बगावत की पहली खबर 19 अक्तूबर को आई थी, जब डोलाखा जिले की पार्टी प्रमुख देवी खड़का ने टिकट बंटवारे पर असंतोष जताते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उसके बाद से पार्टी में असंतोष की खबरें लगातार मिल रही हैं। माओइस्ट सेंटर नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है। नेपाल में संसद और प्रांतीय असेंबलियों की प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सीटों के लिए मतदान मतदान अगले 20 नवंबर को होगा।
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माओइस्ट सेंटर के नेताओं ने मंजूर किया है कि अंदरूनी असंतोष के कारण पार्टी को चुनाव में नुकसान हो सकता है। पार्टी सचिव लीलामणि पोखरेल ने कहा है कि संसदीय दलों में उम्मीदवार चयन को लेकर असंतोष आम बात है। उन्होंने कहा कि मैं इस बात की संभावना से इनकार नहीं करता कि असंतोष का हमारी चुनावी संभावनाओं पर असर पड़ सकता है।
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पर्यवेक्षकों के मुताबिक अगर ऐसा हुआ, तो चुनाव के बाद किंग मेकर बन कर उभरने की माओइस्ट सेंटर की महत्त्वाकांक्षा अधूरी रह जा सकती है। सत्ताधारी गठबंधन में नेपाली कांग्रेस और माओइस्ट सेंटर के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) और राष्ट्रीय जनमोर्चा भी शामिल हैँ। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक माओइस्ट सेंटर के लगभग पांच दर्जन बागी उम्मीदवार संसदीय और प्रांतीय असेंबली की सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। गठबंधन में शामिल दूसरे दलों के बागी उम्मीदवार भी मैदान में हैं। 20 नवंबर को संसद के निचले सदन की प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली 165 और सात प्रांतीय असेंबलियों की ऐसी 330 सीटों के लिए मतदान होगा।

सत्ताधारी गठबंधन के अंदर अब यह अंदेशा भी गहरा गया है कि क्या इसमें शामिल सभी दलों के समर्थक एक दूसरे के उम्मीदवारों को वोट देंगे। खबरों के मुताबिक ये अंदेशा सबसे ज्यादा माइओइस्ट सेंटर को सता रहा है। पार्टी नेताओं को आशंका है कि नेपाली कांग्रेस के बहुत से समर्थक माओइस्ट उम्मीदवारों को वोट नहीं देंगे। ऊपर से अपने बागी नेताओं ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। माओइस्ट सेंटर ने 47 संसदीय सीटों और 111 प्रांतीय सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं।


अंदरूनी असंतोष का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पार्टी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल के करीबी माने जाने वाले नेता और पार्टी के उप महासचिव हरिबोल गुजारेल टिकट ना मिलने के कारण विरोध जताने पर उतर आए। उन्होंने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा कि मैंने पार्टी पदाधिकारियों की तुरंत बैठक बुलाने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो कि मुझे क्यों टिकट नहीं दिया गया। उधर पार्टी पोलित ब्यूरो के पूर्व सदस्य ध्रुव पराजुली ने टिकट ना मिलने पर पार्टी छोड़ दी और अब वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं।

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