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Nepal: माओवादी विद्रोह के दौर की हत्याओं का मुद्दा गरमाया, नौ दलों ने की मोर्चाबंदी

Tue, 07 Mar 2023 03:58 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 07 Mar 2023 03:58 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने दो याचिकाओं को रजिस्टर करने का आदेश कोर्ट प्रशासन को दिया है। ये याचिकाएं दो वकीलों ने दायर की हैं, जिनमें माओवादी विद्रोह के समय हुई मौतों के लिए दहल को जिम्मेदार ठहराने की गुजारिश की गई है...

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Nepal: killings during Maoist insurgency heats up, nine parties supported Dahal in this matter
नेपाल के पीएम पुष्प कमल दहल। - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल और उनकी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के खिलाफ जन विद्रोह के जमाने की घटनाओं को लेकर मुकदमा दर्ज करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से देश में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नौ दलों ने इस मामले में दहल का समर्थन किया है। उनकी दलील है कि राजतंत्र के खिलाफ हुए आंदोलन के समय की घटनाओं को लेकर अलग तरह की न्याय प्रक्रिया अपनाने पर आम सहमति बनी थी। इसे संक्रमणकालीन न्याय प्रक्रिया के रूप में जाना जाता है। अब उनसे जुड़े मुद्दों को कोर्ट में उठाना गहरी चिंता का विषय है।

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सुप्रीम कोर्ट ने दो याचिकाओं को रजिस्टर करने का आदेश कोर्ट प्रशासन को दिया है। ये याचिकाएं दो वकीलों ने दायर की हैं, जिनमें माओवादी विद्रोह के समय हुई मौतों के लिए दहल को जिम्मेदार ठहराने की गुजारिश की गई है। एक याचिका में पांच हजार मौतों और दूसरी में 17 हजार मौतों के लिए उन्हें दोषी बताया गया है।

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नौ दलों ने इस बारे में सोमवार को एक साझा बयान जारी किया। उसमें कहा गया है- ‘संक्रमणकालीन न्याय प्रक्रिया के बारे में उठाए गए मुद्दों की तरफ हमारा ध्यान गया है। हम संविधान और व्यापक शांति समझौते की भावना के मुताबिक संक्रमणकालीन न्याय प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाने केलिए वचनबद्ध हैं। कानून में संशोधन संबंधी बाकी कार्यों को जल्द ही पूरा किया जाएगा।’ बयान में कहा गया है कि इस मकसद से एक विधेयक संसद के चालू सत्र में ही पेश किया जाएगा, जो सुप्रीम कोर्ट के अतीत के फैसलों की भावना के अनुरूप होगा।

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मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन में शामिल राजनीतिक दलों की बैठक राष्ट्रपति चुनाव के सिलसिले में बुलाई गई थी। लेकिन उसमें सुप्रीम कोर्ट के बीते हफ्ते आए आदेश की चर्चा ही छायी रही। बाद में इन दलों की तरफ से साझा बयान जारी हुआ। जिन दलों ने इस बयान पर दस्तखत किए, उनमें शामिल हैं- नेपाली कांग्रेस, माओइस्ट सेंटर, जनता समाजवादी पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट), नागरिक उन्मुक्ति पार्टी, जनमत पार्टी, राष्ट्रीय जन मोर्चा और नेपाल समाजवादी पार्टी।

सत्ताधारी गठबंधन के सूत्रों ने बताया है कि बैठक में प्रधानमंत्री दहल ने इस मद्दे को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने दावा किया कि यह मुद्दा उनकी पार्टी के खिलाफ रची गई एक साजिश के तहत उठाया गया है। प्रधानमंत्री ने कोर्ट के आदेश को ‘गैर जरूरी’ बताया और कहा कि विद्रोह के जमाने के मामलों को निपटाने के लिए परंपरागत न्याय व्यवस्था मौजूद है।

नेपाल समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई ने कहा है कि इस मौके पर मामले दर्ज होना एक तरह की भड़काऊ और टकराव खड़ा करने वाली कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि ‘जन युद्ध’ को अपराध बताने की कोशिश की जा रही है।

इस बीच राष्ट्रपति चुनाव में नेपाली कांग्रेस के नेता रामचंद्र पौडेल की जीत की संभावना मजबूत हो गई है। उसके बाद अब ध्यान उप राष्ट्रपति के उम्मीदवार के चयन पर टिक गया है। उप राष्ट्रपति का चुनाव 17 मार्च को होगा। सत्ताधारी गठबंधन ने यह पद जनता समाजवादी पार्टी को देने का फैसला किया है। इस पद के लिए वह किसे खड़ा करेगी, यह तय करने का अधिकार उस पर छोड़ दिया गया है।

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