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Nepal: क्या महज चुनावी शिगूफा है माओइस्ट सेंटर का शासन प्रणाली बदलने का वादा?

Wed, 02 Nov 2022 04:52 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 02 Nov 2022 04:52 PM IST
सार

नेपाल में संसद और प्रांतीय असेंबलियों के प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सीटों पर आम चुनाव के लिए मतदान 20 नवंबर को होगा। उस रोज संसद के निचले सदन की प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली 165 सीटों और सात प्रांतीय असेंबलियों की 330 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। 

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Nepal Is the promise of changing the governance system of Maoist Center just an electoral gimmick
nepal communist party

विस्तार

अगले आम चुनाव में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनने की जद्दोजहद में जुटी नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) ने देश की शासन प्रणाली को बदल देने का वादा कर दिया है। चुनाव घोषणापत्र में शामिल पार्टी का यह वादा बाकी दलों के रुख से बिल्कुल अलग है। इसलिए राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठाया गया है कि जब माओइस्ट सेंटर संसद में अपनी कमजोर मौजूदगी के बीच ये वादा कैसे पूरा करेगी?

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माओइस्ट सेंटर ने वादा किया है कि वह देश में राष्ट्रपति ढंग की शासन प्रणाली लागू करेगी और संसद का चुनाव पूरी तरह आनुपातिक मत प्रणाली से कराया जाएगा। अभी नेपाल में संसदीय व्यवस्था है, जिसमें चुनाव प्रत्यक्ष और आनुपातिक दोनों प्रणालियों के मेल से कराया जाता है।
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नेपाल में संसद और प्रांतीय असेंबलियों के प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सीटों पर आम चुनाव के लिए मतदान 20 नवंबर को होगा। उस रोज संसद के निचले सदन की प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली 165 सीटों और सात प्रांतीय असेंबलियों की 330 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इस चुनाव में माओइस्ट सेंटर नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के हिस्से के रूप में मैदान में उतरी है।
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नेपाली कांग्रेस वर्तमान चुनाव प्रणाली को कायम रखने के पक्ष में है। यही रुख पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) का भी है। आम अनुमान है कि इस चुनाव में नेपाली कांग्रेस पहले और यूएमएल दूसरे नंबर पर रहेगी। इसीलिए माओइस्ट सेंटर के चुनाव प्रणाली बदलने के वादे को महज के चुनावी शिगूफा माना जा रहा है।

लेकिन माओइस्ट सेंटर के समर्थकों का कहना है कि इस पार्टी का हमेशा से विचार रहा है कि देश में राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष निर्वाचन के जरिए होना चाहिए। 2015 में लागू हुए नए संविधान को जब बनाया जा रहा था, तब भी पार्टी ने अपनी यह राय रखी थी। जब संसदीय प्रणाली को अपनाने के पक्ष में बहुमत बन गया, तब उसने इस बारे में असहमति का पत्र संविधान सभा को सौंपा था।

माओइस्ट सेंटर का कहना है कि उस समय वह संसदीय प्रणाली पर राजी हो गई थी, लेकिन बीते सात वर्ष के अनुभव ने उसे अपना रुख बदलने के लिए मजबूर किया है। इन वर्षों में यह साबित हुआ है कि राजनीतिक स्थिरता, शांति और समृद्धि के लिए राष्ट्रपति ढंग की शासन प्रणाली को अपनाना जरूरी है।

पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई के नेतृत्व वाली नेपाल समाजवादी पार्टी इस चुनाव में माओइस्ट सेंटर के चुनाव निशान पर ही मैदान में उतरी है। उसने राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष निर्वाचन के माओइस्ट सेंटर की मांग का समर्थन किया है। नेपाल समाजवादी पार्टी ने पिछले हफ्ते अपना चुनाव घोषणापत्र जारी किया था, जिसमें शासन प्रणाली बदलने का वादा किया गया है।


नेपाल की एक और प्रमुख पार्टी- कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) ने इस मुद्दे पर अपना रुख साफ नहीं किया है। यूनिफाइड सोशलिस्ट भी सत्ताधारी गठबंधन में शामिल है। हालांकि उसने अपने घोषणापत्र राष्ट्रपति ढंग की शासन प्रणाली के बारे में कुछ नहीं कहा है, लेकिन चुनाव प्रणाली में ऐसे सुधार का वादा जरूर किया है, जिससे चुनाव पर धन के बढ़ते जा रहे नियंत्रण को रोका जा सके।

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