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सख्त कदम: नेपाल में ‘छौपदी’ कुप्रथा के लिए हो सकती है तीन माह की जेल
Sat, 28 Dec 2019 02:52 AM IST
योगेश साहू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: योगेश साहू
Updated Sat, 28 Dec 2019 02:52 AM IST
सार
- दिसंबर की शुरुआत में महिला की मौत के बाद सरकार ने उठाया कदम
- अछाम जिले में एक महिला परबाती बुडा रावत (21) की हुई थी मौत
- मामले में पुलिस ने महिला के बहनोई को गिरफ्तार किया था
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प्रतीकात्मक तस्वीर
विस्तार
नेपाल सरकार ने वर्षों से चली आ रही ‘छौपदी’ कुप्रथा पर लगाम लगाने के लिए अहम कदम उठाया है। मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को घर के बाहर झोपड़ी में रहने के लिए मजबूर करने वालों को सरकारी योजनाओं से हाथ धोना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, महिलाओं के खिलाफ इस तरह की मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना में शामिल लोगों को तीन महीने की जेल और जुर्माना भी देना होगा।
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सरकार ने यह कदम इस महीने की शुरुआत में अछाम जिले में एक महिला परबाती बुडा रावत (21) की मौत के बाद उठाया है। मासिक धर्म के दौरान रावत को घर से बाहर एक झोपड़ी में रहने के लिए मजबूर किया था। ठंड से बचने के लिए उसने झोपड़ी के भीतर आग (अंगीठी) जलाई थी और धुएं की वजह से उसकी दम घुटने से मौत हो गई थी।
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इस सिलसिले में पुलिस ने महिला के बहनोई को गिरफ्तार किया था। इस गैरकानूनी परंपरा के तहत इसे पहली गिरफ्तारी माना जा रहा है। हिमालयी देश की सरकार ने ‘छौपदी’ कुप्रथा पर 2005 में ही रोक लगा दी थी, लेकिन कई इलाकों में यह परंपरा अब भी बदस्तूर जारी है।
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गृह मंत्रालय के प्रवक्ता केदार नाथ शर्मा ने बताया कि हाल में हुई कुछ महिलाओं की मौत के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाया है। सरकार ने सभी जिलों के मुख्य अधिकारियों को इस कुप्रथा के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
सदियों पुरानी है ‘छौपदी’ कुप्रथा
नेपाल में विभिन्न समुदाय मासिक धर्म से गुजरने वाली महिलाओं को अपवित्र मानते हैं। सदियों पुरानी ‘छौपदी’ कुप्रथा के तहत नेपाल के दूरदराज के कुछ इलाकों में महिलाओं को घर से बाहर झोपड़ियों में रहने के लिए मजबूर किया जाता है। इस दौरान कई महिलाओं की ठंड, गर्मी और बारिश की वजहों से मौत हो जाती है।