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नेपाली जमीन पर चीन के कब्जे को लेकर नेपाल सरकार सतर्क, चीन की मंशा पर सवाल
Tue, 23 Jun 2020 07:25 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Tue, 23 Jun 2020 07:25 PM IST
सार
- भारत-चीन सीमा विवाद पर नेपाल की बारीक नजर, कम्युनिस्ट पार्टी ने भी चीन को माना गलत
- मंत्रालय की रिपोर्ट में नेपाल के कई जिलों के सैंकड़ों हेक्टेयर जमीन पर चीन का कब्ज़ा
- लद्दाख क्षेत्र में सड़कें बनाने और नदियों का रुख मोड़ने के नाम पर चीन ने किया कब्जा
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China Ambassador Hou Yanqi in Nepal
- फोटो : For Refernce Only
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विस्तार
भारत-चीन सीमा विवाद और इससे पैदा हुए तनाव को नेपाल की सियासत में बहुत बारीकी से देखा जा रहा है। नेपाल सरकार की ओर से पास किए गए नए नक्शे के मद्देनजर भारत और चीन के रिश्तों में आ रहे बदलावों को भी नेपाल अपने तरीके से समझने की कोशिश में लगा है।
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नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी ने इस पूरे मसले को गंभीरता से लेते हुए चीन की मंशा को भी शक के नजरिये से देख रही है। खासकर चीन की ओर से नेपाली सीमा में घुसपैठ की कोशिशों को भी पार्टी खतरनाक मानती है।
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नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के एक नेता के मुताबिक चीन ने नेपाल के लिए बहुत कुछ किया है और विकास के कामों में चीनी मदद को भी पार्टी सकारात्मक तरीके से देखती है, लेकिन जब मामला अपनी सीमा और घुसपैठ के साथ-साथ संप्रभुता का आ जाता है तो चाहे भारत हो या चीन, नेपाल को गंभीरता से सोचना ही पड़ेगा।
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नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कृषि मंत्रालय की उस रिपोर्ट को बेहद गंभीरता से लिया है, जिसमें चीन तिब्बत में रोड बनाने के बहाने नेपाल के एक बड़े हिस्से पर कब्जे की कोशिश में लगा है।
रिपोर्ट में नेपाल की 11 ऐसी जगहों को चिन्हित किया गया है, जहां चीन सड़क बनाने का काम कर रहा है और इनमें से 10 जगहों में करीब 33 हेक्टेयर नेपाली जमीन पर कब्जा कर चुका है।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन 10 जगहों में सड़क बनाने के नाम पर नदियों की दिशा मोड़ने और बांध बनाने जैसे काम हो रहे हैं जो कहीं न कहीं नेपाली जमीन पर चीन का कब्जा साबित करते हैं।
तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सड़क बनाने के काम में लगा चीन इस रास्ते में जो भी नदियां आ रही हैं, उनका रुख नेपाल की तरफ मोड़ने की कोशिश कर रहा है और अगर यही स्थिति चलती रही तो बहुत जल्दी नेपाल के एक बहुत बड़े हिस्से पर चीन का कब्जा हो जाएगा।
हुमला जिले में चीन ने 10 हेक्टेयर नेपाली जमीन पर कब्जा कर रखा है। यहां निर्माण कार्यों के तहत करनाली और बगदारे खोला नदियों की दिशा मोड़ने का काम तेजी से हुआ है। रसुवा जिले में भी 6 हेक्टेयर जमीन चीन के कब्जे में है।
वैसे भी सिंधुपला चौक जिले में पहले से ही चीन नेपाल की 11 हेक्टेयर जमीन पर अपना दावा यह कहकर ठोंकता रहा है कि ये तिब्बत की सीमा में हैं। संखुवासभा जिले में भी नदियों को मोड़ने और सड़कें बनाने के नाम पर चीन ने नौ हेक्टेयर जमीन पर कब्जा कर रखा है।
जाहिर है चीन की इस नीति और मंशा ने नेपाल के लिए चिंता पैदा की है और खासकर हाल में हुए पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में भारत-चीन सीमा विवाद और तनाव की स्थिति के बाद से नेपाल और सतर्क हो गया है।
नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के कई नेता भारत से दोस्ताना रिश्ते और लंबे समय से चले आ रहे रोटी बेटी के संबंध को संवेदनशी तरीके से देखते हैं और चीन की हरकतों का गलत ठहराते हैं।