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Nepal: माओवादियों ने आम चुनाव में फंसाया पेंच, नेपाली कांग्रेस में सीटों के बंटवारे को लेकर उलझन

Fri, 19 Aug 2022 12:35 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Fri, 19 Aug 2022 12:35 PM IST
सार

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के नेता पुष्प कमल दहल के एक ताजा दांव ने इस मामले में नए पेच फंसा दिए हैं। दहल ने दो बड़े कम्युनिस्ट नेताओं को माओइस्ट सेंटर के चुनाव निशान पर चुनाव लड़ने के लिए राजी कर लिया है। 

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Nepal General elections: Confusion on seat-sharing in Nepali Congress over Maoists
नेपाल में स्थानीय चुनाव - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

नेपाल में सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दलों के बीच आम चुनाव लड़ने के लिए सीटों के बंटवारे का सवाल और उलझ गया है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के नेता पुष्प कमल दहल के एक ताजा दांव ने इस मामले में नए पेच फंसा दिए हैं। दहल ने दो बड़े कम्युनिस्ट नेताओं को माओइस्ट सेंटर के चुनाव निशान पर चुनाव लड़ने के लिए राजी कर लिया। इस तरह अब पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई और बामदेव गौतम के समर्थक भी चक्र के भीतर हसुआ- हथौड़ा निशान पर चुनाव मैदान में उतरेंगे। लेकिन इसके साथ ही माओइस्ट सेंटर की तरफ से अधिक सीटों की मांग की जाएगी, यह साफ हो गया है।

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नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन में माओइस्ट सेंटर पहले से भी दूसरा सबसे बड़ा दल है। मंगलवार को पार्टी की स्थायी समिति ने भट्टराई के नेतृत्व वाले नेपाल समाजवादी पार्टी और गौतम बामदेव के नेतृत्व वाले नेपाल कम्युनिस्ट यूनिटी नेशन कैंपेन को अपना चुनाव निशान देने का फैसला किया। अभी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में नेपाल समाजवादी पार्टी के दो सदस्य हैं। गौतम की पार्टी के पास कोई सांसद नहीं है। 2017 के आम चुनाव मे खुद गौतम अपनी सीट से भी चुनाव हार गए थे।
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नेपाल में संघीय और प्रांतीय विधायिकाओं के लिए आम चुनाव आगले 20 नवंबर को होगा। उस प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली 165 सीटों पर वोट पड़ेंगे। माओइस्ट सेंटर इनमें से कम से कम 50 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने की मंशा लेकर चल रही है। जबकि गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाली नेपाली कांग्रेस 99 सीटों पर लड़ना चाहती है। अगर नेपाली कांग्रेस अपने इरादे पर अड़ी रही, तो सत्ताधारी गठबंधन में शामिल बाकी चार दलों के लिए सिर्फ 66 सीटें बचेंगी।
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नेपाल की प्रतिनिधि सभा में कुल 275 सदस्य हैं। प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली 165 सीटों के अलावा 110 सीटों का वितरण पार्टियों को मिले वोट प्रतिशत के आधार पर होता है। सात प्रांतों की विधायिकाओं में कुल मिला कर 330 सीटें हैं। उनमें से 220 सीटों के लिए प्रत्यक्ष निर्वाचन होगा। सत्ताधारी गठबंधन के घटक दलों के बीच चुनाव लड़ने के लिए इनमें से भी ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करने की होड़ लगी हुई है। 

भट्टराई के करीबी एक नेता ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘यह साफ है कि हम चुनाव लड़ने के लिए प्रतिनिधि सभा की छह से सात और प्रांतीय विधायिकाओं की आठ से दस सीटों की मांग करेंगे। चूंकि हम भी गठबंधन का हिस्सा हैं, इसलिए हमें उम्मीद है कि गठबंधन के नेता सीटों की व्यवस्था कर देंगे।’

माओइस्ट सेंटर चाहता है कि उससे जुड़े चार बड़े नेताओं भट्टराई, महिंद्र राज यादव, राजकिशोर यादव और बामदेव को गौतम को गठबंधन की तरफ से अलग से टिकट दिया जाए। पार्टी की स्थायी समिति के सदस्य मात्रिका यादव ने कहा- दहल इन नेताओं को टिकट दिलवाने के लिए पूरा जोर लगाएंगे।


लेकिन ऐसे संकेत हैं कि गठबंधन शामिल नेपाली कांग्रेस, जनता समाजवादी पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) माओइस्ट सेंटर को अतिरिक्त सीटें देने के लिए आसानी से तैयार नहीं होंगी। उनका रुख है कि जिन नेताओं को दहल अपने साथ ले आए हैं, उन्हें वे अपनी पार्टी के कोटे वाली सीटों पर टिकट दें। इस मुद्दे पर गठबंधन के भीतर विवाद होने की आशंका जताई जा रही है।

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