सुलगती चिंगारी के बीच सहमी-सी शांति: काठमांडो की सड़कों पर आगजनी के निशां... सरकार की जिद ने बड़ा बवाल कराया
दो दिन तक हिंसक आंदोलन के बाद नेपाल की राजधानी में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। मगर, लोगों के मन में सरकार को लेकर कई सवाल भी हैं। जेन-जी आंदोलन के बीच ऐसे ही सवालों को परख रहे हैं काठमांडो से नितिन यादव
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शाम के साढ़े छह बजे अंधेरा थोड़ा- थोड़ा होने लगा है और युवाओं की एक भीड़ नेपाल के संसद भवन के सामने जमा है। वही संसद भवन, जिसे आंदोलन के दौरान जला दिया गया था। संसद भवन की बिल्डिंग से जुड़ा हुआ ही यातायात पुलिस का भवन है। उसके सामने भी जली हुई बाइकों का ढेर लगा है। यह भीड़ अब फोटो ले रही है और कुछ सेल्फी भी ले रहे हैं। उनके चेहरे पर एक अजीब सी चमक है।
ऐसे ही एक युवा का कहना है कि लोगों की जान जाना अच्छा नहीं हुआ, पर इसके बाद ही उनकी बात सुनी गई। शुक्रवार दोपहर बाद नेपाल की राजधानी काठमांडो में थोड़ी शांति तो दिखाई दी, पर सरकार के गठन का सवाल हर किसी की जुबान पर है। लोगों का कहना है कि उन्हें अंतरिम सरकार नहीं, पूरी सरकार चाहिए।
काठमांडो के त्रिभुवन एयरपोर्ट पर चहल-पहल के बीच सिम कार्ड की दुकान पर बैठे युवा पदम धोज से पूछा गया कि यह कैसे हुआ? क्यों हुआ? इसका जिम्मेदार कौन है...तो थोड़ा सोचने के बाद कहा कि एक आदमी की जिद ने इस देश में आग लगवा दी। उनका इशारा प्रधानमंत्री रहे केपी ओली की ओर था। उन्होंने साफ कहा कि इस देश को उत्तर कोरिया थोड़े बनने देंगे। वह कहते हैं कि जेन-जी ने वहीं किया, जो युवाओं को करना चाहिए था। वह कहते हैं कि जेन जी के ग्रुप को हिंसा के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है। जेन-जी के कई ग्रुप शहर की बेहतरी के लिए भी काम कर रहे हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सा:
एयरपोर्ट के आसपास होटलों के साथ बाजार की कुछ दुकानें भी शुक्रवार को खुलीं। कर्फ्यू की जगह धारा-144 लगाई गई। शंभू मार्केट में दुकान से सामान खरीद रहे वृद्ध हेम बहादुर ने पहले तो बात करने से मना किया। थोड़ा कुरेदा गया, तो बोले गलत भी क्या किया है इस जेन-जी ने। लोग भ्रष्टाचार से तंग थे। कोई भी काम बिना पैसे या जुगाड़ के नहीं हो रहा था। एक न एक दिन तो ऐसा होना ही था। पास में ही बैठे विपुल ने कहा कि सरकार की आंख खोलने के लिए यह जरूरी था। लोगों का यह भी कहना है कि बिजली विभाग के अधिकारी कुलमान घीसिंग ने यहां काफी काम किया। बिजली की समस्या खत्म कर दी। वह बिजली मैन के नाम से उभरे तो ऐसे अच्छे अधिकारी के साथ भी सरकार ने अच्छा बर्ताव नहीं किया।
रात होते ही काठमांडो पर सेना का कब्जा
सामान्य दिख रहा काठमांडो रात होते ही सन्नाटे के आगोश में आ गया। सात बजे के बाद से सेना चौराहों पर दिखने लगी। नौ बजे तक सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। हिल्टन होटल सहित जहां-जहां पर आगजनी की ज्यादा घटनाएं हुईं, वहां के इलाके बंद कर दिए गए। प्रमुख रिहायशी इलाकों में सड़कों के बीचोबीच बैरीकेड लगा दिए गए।
- रात में सुशीला कार्की के अंतरिम पीएम बनने की बात बाहर आई, तो राष्ट्रपति भवन के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई। रास्तों पर भारी नाकाबंदी कर दी गई। सभी रास्ते वन-वे कर दिए गए।
लोगों का कहना है कि इस मामले में विदेशी ताकतों के बजाए स्थानीय गुस्से के कारण ही मामला ज्यादा बढ़ा है। हालांकि सियासी गलियारों में चर्चा जरूर है कि कुछ पार्टियों ने इससे किसी न किसी तौर पर सहारा जरूर दिया है। यह बात और है कि अब चर्चा अंतरिम सरकार के साथ ही इस बात की भी है कि नेपाल का भविष्य क्या होगा। काठमांडो के मेयर बालेंद्र शाह अभी सत्ता से दूरी क्यों बनाएं हैं? जानकारों का मानना है कि संभव है कि वह चुनाव होने की स्थिति में ही जीतकर सरकार बनाने की सोच रहे हैं। राजशाही के वापस आने से लोग इन्कार तो करते हैं, पर कुछ का मानना है कि कुछ भी हो सकता है।
काठमांडो। पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा का बुधनीलकांठा स्थित आवास। कभी सत्ता का केंद्र मानी जाने वाली यह भव्य इमारत अब काले धुएं और जले हुए नोटों की राख से ढकी हुई है। यह इमारत महल से खंडहर में तब्दील हो चुकी है। प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को इस घर में तोड़फोड़ की और आग लगा दी थी।
नेपाल में जेन-जी हिंसक आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार के दौरान मातम का माहौल है। अपनों को खोने का दर्द आंखों से आंसू बनकर बह रहा है। आंदोलन के दौरान सहायक उप निरीक्षक मिलान राया की भी जान चली गई। शुक्रवार को काठमांडो में पशुपतिनाथ मंदिर में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। हालांकि बाद में खुद को संभाला और पुलिस की अंतिम सलामी के वक्त उन्होंने पति को सैल्यूट भी कया। आंदोलन में मारे गए कई लोगों का शुक्रवार को अंतिम संस्कार किया गया।
नई दिल्ली। नेपाल में हिंसा के बीच फंसे भारतीय जैसे-जैसे स्वदेश लौट रहे हैं, दहशत की कहानी गहरी होती जा रही है। दिल्ली की ख्याति ने हवाई अड्डे पर उतरने के बाद बताया िक काठमांडो में आगजनी, गाड़ियों पर हमले और होटलो में आग को देखकर ऐसा लगा कि हम मौत के साए में हैं। दिल्ली के एक पर्यटक ने बताया कि हमारे लिए जिंदगी का सबसे खौफनाक अनुभव रहा। काठमांडो एयरपोर्ट से होटल जाते वक्त उनकी टैक्सी पर भीड़ टूट पड़ी।