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एक और संकट के भंवर में फंस रहा नेपाल: बाढ़ के बाद अब कौन सी चुनौतियां आएंगी सामने, सरकार की क्या तैयारी?
Fri, 28 Aug 2026 11:02 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Fri, 28 Aug 2026 11:02 PM IST
सार
नेपाल अभी भीषण बाढ़ की तबाही से उबर नहीं पाया है और अब राजधानी काठमांडू के सामने जरूरी सामान की सप्लाई का नया संकट खड़ा हो गया है। पृथ्वी हाईवे बंद होने से सब्जी, फल और दूसरी जरूरी चीजों की आवक घट गई है। ईंधन की सप्लाई को लेकर भी चिंता है। सरकार बाजार में कृत्रिम कमी और कालाबाजारी रोकने की तैयारी कर रही है। ऐसे में क्या नेपाल आने वाले दिनों में एक और बड़े संकट का सामना करेगा? आइए, विस्तार से जानते हैं...
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क्या नेपाल की सरकार आने वाले संकट के लिए तैयार है?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
नेपाल में बुधवार को भोटेकोशी नदी तंत्र से आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। अब इस आपदा का असर राजधानी काठमांडो की रोजमर्रा की जरूरतों पर दिखने लगा है। देश के प्रमुख आपूर्ति मार्ग पृथ्वी हाईवे के बंद होने से काठमांडो घाटी में भोजन, ईंधन और दूसरे जरूरी सामान की पहुंच प्रभावित हुई है। हाईवे कब पूरी तरह खुलेगा, इसकी अभी कोई पक्की जानकारी नहीं है। ऐसे में बाढ़ के बाद नेपाल के सामने आपूर्ति व्यवस्था को संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
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पृथ्वी हाईवे बंद होने से काठमांडो पर कितना असर पड़ा?
पृथ्वी हाईवे का नागढुंगा से भरतपुर तक करीब 180 किलोमीटर लंबा हिस्सा काठमांडो के लिए बेहद अहम है। इसी रास्ते से राजधानी में बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थ, ईंधन और जरूरी सामान पहुंचता है। बुधवार की बाढ़ में कम से कम 19 पुल क्षतिग्रस्त हुए और त्रिशूली गलियारे तथा आसपास के राजमार्गों की करीब 40 किलोमीटर सड़क बह गई। काठमांडो घाटी ट्रैफिक पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता पुलिस अधीक्षक नरेश राज सुबेदी ने कहा कि अधिकारी पूरी ताकत से काम कर रहे हैं, लेकिन शुक्रवार तक हाईवे खुलने की गारंटी नहीं दी जा सकती।
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क्या दूसरे रास्तों से काठमांडो की सप्लाई संभाली जा रही है?
सड़क विभाग के इंजीनियर राजीव मानंधर के अनुसार, शुक्रवार शाम तक गल्छी वाले हिस्से को एक-तरफा बारी-बारी से यातायात के लिए खोल दिया गया था। गलौंडी-घाटबेसी-जारेखेत हिस्से में दोनों तरफ से यातायात शुरू कर दिया गया। हालांकि बारिश होने पर इन रास्तों को फिर बंद करना पड़ सकता है। भूस्खलन से आई मिट्टी हटाने के लिए पूरे दिन काम चल रहा है और अर्थमूवर शाम पांच बजे तक लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा दूसरे रास्तों से भी सामान काठमांडो पहुंच रहा है।
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