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भारत के विरोध के बावजूद नेपाल ने बीआरआई के तहत परियोजनाओं में तेजी लाने के दिए निर्देश
Mon, 16 Sep 2019 01:28 AM IST
देव कश्यप
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: देव कश्यप
Updated Mon, 16 Sep 2019 01:28 AM IST
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चीन का बीआरआई प्रोजेक्ट
- फोटो : File Photo
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काठमांडू में रविवार को 'बीआरआई संवाद' पर परिचर्चा की गई। इस परिचर्चा में नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री तथा देश में सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के सह अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड' ने कहा कि बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) प्रोजेक्ट के तहत नेपाल की परियोजनाओं में देरी नहीं होनी चाहिए क्योंकि इससे देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान होगा।
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उन्होंने कहा कि नेपाल को चीन की महत्वाकांक्षी बीआरआई के तहत सभी परियोजनाओं को अंतिम रूप देना चाहिए क्योंकि कई अरब डॉलर की ये परियोजनाएं विशुद्ध रूप से आर्थिक सहयोग परियोजना है न कि सैन्य गठबंधन की।
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प्रचंड ने कहा कि, बीआरआई कोई सैन्य गठबंधन नहीं है, बल्कि यह इसका हिस्सा रहे विभिन्न देशों के बीच पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा देता है। बीआरआई के तहत परियोजनाओं को पूरा करने में हमें देरी नहीं करनी चाहिए। मैं समझता हूं कि समय आ गया है कि अब अपनी प्राथमिकताओं और जरूरतों के अनुरूप हम परियोजनाओं में तेजी लाएं।
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बीआरआई चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग द्वारा 2013 में शुरू की गयी कई अरब डॉलर की पहल है। भारत बीआरआई का सख्त विरोध करता है, क्योंकि इसके तहत 50 अरब डॉलर का चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से गुजरता है।