Nepal: माओइस्ट सेंटर में बगावत, चुनाव से पहले सत्ताधारी गठबंधन की बढ़ी मुश्किल
Nepal: माओइस्ट सेंटर नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन में शामिल है। इसमें तीन और पार्टियां- कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट), जनता समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जन मोर्चा भी शामिल हैं। मई में हुए स्थानीय चुनावों में भी ये पार्टियां गठबंधन के रूप में मैदान में उतरी थीं...
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आम चुनाव के लिए टिकट बंटवारे से पहले ही नेपाल के सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दूसरे सबसे बड़े दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) में बगावत हो गई है। धनकुटा में 150 से अधिक जिला स्तरीय नेताओं ने पार्टी से सामूहिक इस्तीफे के एलान किया है। उन्होंने ये कदम दूसरे दलों से गठबंधन बनाने के पार्टी नेतृत्व के फैसले के विरोध में किया है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक ये घटना माओइस्ट सेंटर में सुलग रहे विरोध की सिर्फ एक मिसाल है। संकेत हैं कि ऐसी बगावत दूसरी जगहों पर भी हो सकती है। लेकिन पार्टी नेतृत्व से जुड़े सूत्रों ने इस कदम को टिकट के लिए पार्टी नेतृत्व पर दबाव डालने की एक चाल बताया है।
इस्तीफा देने वाले सदस्यों में पार्टी की पोलित ब्यूरो के सदस्य हेमराज भंडारी शामिल हैं। उन्होंने कहा- ‘अस्वाभाविक चुनावी गठबंधन पर विरोध जताने के लिए मैंने अपना इस्तीफा दो हफ्ते पहले ही पार्टी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल को भेज दिया था। हालांकि दहल ने मुझसे ये बात सार्वजनिक ना करने को कहा था, लेकिन मैंने उन्हें बताया था कि अपने जिले के नेताओं और कार्यकर्ताओं से राय-मशविरे के बाद मैं ऐसा कर दूंगा।’ पार्टी छोड़ने वाले गुट ने भंडारी को संघीय संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के लिए धनकुटा सीट से उम्मीदवार बनाने का एलान किया है।
माओइस्ट सेंटर नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन में शामिल है। इसमें तीन और पार्टियां- कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट), जनता समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जन मोर्चा भी शामिल हैं। मई में हुए स्थानीय चुनावों में भी ये पार्टियां गठबंधन के रूप में मैदान में उतरी थीं। अब उन्होंने 20 नवंबर को होने वाले आम चुनाव के लिए गठबंधन जारी रखने का फैसला किया है।
हेमराज भंडारी को दो टूक बात करने वाला नेता समझा जाता है। पूर्वी नेपाल के वे लोकप्रिय नेता माने जाते हैं। धनकुटा जिले की लगभग पूरी पार्टी इकाई ने उनके साथ जाने का फैसला किया है। आम अनुमान है कि इससे पूर्वी नेपाल में माओइस्ट सेंटर और सत्ताधारी गठबंधन को भारी नुकसान होगा।
माओइस्ट सेंटर के उप महासचिव हरिबोल गजुरेल ने कहा है कि टिकट चाहने वालों की भरमार के कारण गठबंधन के नेता तमाम विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘धनकुटा के मामले पर हम पार्टी और गठबंधन के अंदर विचार करेंगे। टिकट चाहने वालों को संभालने में हमें बड़ी मुश्किल आ रही है। सीटें सीमित हैं, जबकि पार्टी के अंदर चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वालों की भरमार है।’
सत्ताधारी गठबंधन अब तक सीटों के बंटवारे पर फैसला नहीं कर पाया है। इस मकसद के लिए बनाया गया टास्क फोर्स टिकट बंटवारे का फॉर्मूला तय अपनी रिपोर्ट गठबंधन नेताओं को सौंप चुका है। लेकिन पार्टियों के बीच अधिक से अधिक सीटें पाने की खींचतान के कारण गठबंधन के नेता फैसला नहीं कर पा रहे हैं। इसी बीच माओइस्ट सेंटर में बगावत की आई खबर से इन नेताओं पर और दबाव बढ़ने का अंदाजा है।
बताया जाता है कि खास कर नेपाली कांग्रेस और माओइस्ट सेंटर में टिकट चाहने वाले नेताओं की लंबी कतार है। इससे दोनों पार्टियों में टिकट बंटवारे के बाद और भी ज्यादा असंतोष भड़ने की आशंका है।