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Corona Vaccine: टूटने के कगार पर है कोरोना वैक्सीनों को पेटेंट मुक्त करने की वार्ता

Mon, 30 May 2022 05:24 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 30 May 2022 05:24 PM IST
सार

दुनिया भर में इन टीकों को पेटेंट मुक्त करने की मांग उठी थी। सबसे पहले ये मांग भारत और दक्षिण अफ्रीका की तरफ से उठाई गई थी। बाद में अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन ने भी इस मांग का समर्थन कर दिया। तब से विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में इस मुद्दे पर बातचीत चल रही है...

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Negotiations for patenting a vaccine made to protect against corona virus infection are on the verge of failure
कोरोना वैक्सीन - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए बने वैक्सीन को पेटेंट मुक्त करने की वार्ता नाकाम होने के कगार पर है। अगर इन वैक्सीन को पेटेंट मुक्त कर दिया जाए, तो उनका विकासशील देशों में सस्ती दर पर उत्पादन करने का रास्ता खुल जाएगा। हालांकि फिलहाल दुनिया में कोरोना महामारी काबू में है, लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दे रखी है कि अभी आश्वस्त होने का समय नहीं आया है।

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कोरोना वैक्सीन तैयार होने के साथ ही दुनिया भर में इन टीकों को पेटेंट मुक्त करने की मांग उठी थी। सबसे पहले ये मांग भारत और दक्षिण अफ्रीका की तरफ से उठाई गई थी। बाद में अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन ने भी इस मांग का समर्थन कर दिया। तब से विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में इस मुद्दे पर बातचीत चल रही है। बताया जाता है कि डब्ल्यूटीओ की महानिदेशक न्गोजी ओकोंजो-इवीला ने इस बातचीत को सफल बनाने के लिए अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा रखी है। इसीलिए मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि इस वार्ता का नाकाम होना डब्ल्यूटीओ प्रमुख के लिए एक निजी झटका भी होगा।

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वार्ता में शामिल पक्षों ने बनाई दूरी

कई राजनयियों और अधिकारियों ने वेबसाइट पोलिटिको.ईयू से बातचीत में कहा कि पेटेंट मुक्त करने की वार्ता में कई हलकों से अड़ेंगे डाले गए हैं। अब संभव है कि ये वार्ता टूट जाए। वार्ता से जुड़े एक राजनयिक ने कहा- ‘दुर्भाग्य की बात है कि ये वार्ता बहुत जटिल बनी हुई है।’ इस बारे में करार के लिए पेश दस्तावेज को ट्रिप्स वेवर (व्यापार संबंधी बौद्धिक संपदा अधिकार मुक्ति) नाम से जाना गया है।

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विश्लेषकों ने कहा है कि इस वार्ता को आयोजित करने का डब्ल्यूटीओ का फैसला साहसी, लेकिन शुरुआत से ही जोखिम भरा था। बातचीत मुख्य रूप से चार पक्षों- यूरोपियन यूनियन (ईयू), अमेरिका, भारत, और दक्षिण अफ्रीका के बीच हो रही है। वार्ता लंबे समय तक बंद दरवाजों के अंदर हुई। लेकिन अब हाल यह है कि वार्ता में शामिल पक्ष ही इससे दूरी बना रहे हैं। एक राजनयिक ने वेबसाइट पोलिटिको से कहा- ‘दक्षिण अफ्रीका, भारत, अमेरिका या ईयू में कोई भी इस प्रक्रिया का स्वामित्व स्वीकार करने को तैयार नहीं है। इससे चीजें और पेचीदा हो गई हैं।’

ओकोंजो-इवीला ने कुछ दिन पहले अमेरिका में एक समारोह के दौरान वैक्सीन से जुड़े एक अन्य मुद्दे पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा- ‘अब जरूरत से अधिक उत्पादन हो रहा है। इसलिए हमारे सामने समस्या वितरण की दिक्कतों और वैक्सीन लगवाने को लेकर जारी अनिच्छा की है। इन सबको दूर करने की जरूरत है।’

वैक्सीन उत्पादन में घटेगा निवेश

लेकिन पेटेंट मुक्ति के लिए अभियान चलाने वाले गैर-सरकारी संगठनों का कहना है कि अधिक उत्पादन से समस्या हल नहीं हुई है। बल्कि अब दवा उद्योग कह रहा है कि वह वैक्सीन उत्पादन में निवेश घटा देगा। इससे फिर वैक्सीन की कमी हो जाएगी।



कुछ मीडिया रिपोर्टों में बातचीत में ठहराव के लिए अमेरिका और चीन को दोषी बताया गया है। अमेरिका अड़ा हुआ है कि चीन भी पेटेंट मुक्ति का लिखित समझौता करे। जबकि चीन इसके लिए तैयार नहीं है। उसने जुबानी तौर पर यह जरूर कहा है कि इन वैक्सीन पर वह पेटेंट लागू नहीं करेगा। लेकिन एक राजनयिक ने कहा- ‘चीन के इस वादे से हम आश्वस्त नहीं हैँ। हम लिखित वादा चाहते हैँ।’

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