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कोविड-19 में हुई 200 जेनेटिक म्यूटेशन की पहचान, वैक्सीन की खोज में मिल सकती है मदद
Wed, 06 May 2020 07:02 PM IST
Rohit Ojha
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Rohit Ojha
Updated Wed, 06 May 2020 07:02 PM IST
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यूपी में कोरोना वायरस
- फोटो : PTI
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ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के शोधकर्ताओं ने विश्व भर के कोविड-19 के 7500 मरीजों के जीन पर शोध किया है। जिससे उन्होंने एसएआरएस-सीओवी-2 (SARS-CoV-2) में लगभग 200 जेनेटिक म्यूटेशन (आनुवांशिक उत्परिवर्तन) की पहचान की है। ये कोविड-19 की वैक्सीन बनाने में मदद के संकेत प्रदान कर रहे हैं।
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जर्नल इंफेक्शन, जेनेटिक्स एंड इवोल्यूशन नामक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वायरस के जीनोम की विविधता के पैटर्न पर प्रकाश डाला गया,जिसे पता चलता है कि वायरस लोगों में फैलने के साथ ही बदल भी रहा है।
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जाहिर है कि वायरस पिछले साल के अंत से दुनिया भर में फैलने लगा था। पहला मामला आने के बाद इसका तेज फैलाव शुरू हुआ। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के इंस्टीट्यूट ऑफ जेनेटिक्स के शोधकर्ता फ्रेंकोइस बलोक्स ने बताया कि कोरोना वायरस में परिवर्तन हो रहा है, लेकिन ये मतलब नहीं कि वह बिगड़ रहा है।
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वैज्ञानिकों ने 198 म्यूटेशन की पहचान की जो स्वतंत्र रूप से एक से अधिक बार दिखाई देते हैं, जो इस बात का पता लगा सकते हैं कि वायरस कैसे फैल रहा है। शोधकर्ताओं ने कहा कि छोटे आनुवंशिक परिवर्तन या उत्परिवर्तन, वायरस जीनोम में समान रूप से वितरित नहीं किए गए थे।
जैसा कि जीनोम के कुछ हिस्सों में बहुत कम उत्परिवर्तन हुआ था। उन्हें वैक्सीन बनाने के लिए बेहतर लक्ष्य बनाया जा सकता है। बल्लूक्स ने समझाया कि वायरस को पराजित करने के लिए एक बड़ी चुनौती यह है कि वायरस को रोकने के लिए एक टीका या दवा क्या लंबे समय तक प्रभावी हो सकते हैं।
यदि हम वायरस के उन हिस्सों पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं जो कम उत्परिवर्तन की संभावना रखते हैं, इससे हमारे पास दवाओं को विकसित करने का एक बेहतर मौका होगा जो लंबे समय तक प्रभावी होगा। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी दवाई और टीके विकसित करने की आवश्यकता है, जो आसानी से वायरस द्वारा विकसित नहीं किए जा सकते हैं।
बालोक्स की टीम ने दुनिया भर के 7500 से ज्यादा संक्रामक रोगियों के जीन की जांच की। उनके परिणाम इस बात को और पुख्ता करते हैं कि इन SARS-CoV-2 वायरस और 2019 के आखिरी में सामने आए उस वायरस के पुरखे एक ही हैं, जो अपने होस्ट जानवरों से निकलकर लोगों में गया था।