{"_id":"6691030c30d0cb1a250eb9a1","slug":"nc-and-uml-united-by-fear-not-by-shared-values-nepal-prime-minister-prachanda-2024-07-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Nepal: 'साझा मूल्यों से नहीं, बल्कि इस वजह से एक हुए है NC-UML', विश्वास मत से पहले विपक्ष पर बरसे पीएम प्रचंड","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Nepal: 'साझा मूल्यों से नहीं, बल्कि इस वजह से एक हुए है NC-UML', विश्वास मत से पहले विपक्ष पर बरसे पीएम प्रचंड
Fri, 12 Jul 2024 03:48 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 12 Jul 2024 03:48 PM IST
सार
नेपाल के संकटग्रस्त प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने शुक्रवार को नेपाली कांग्रेस (एनसी) और सीपीएन-यूएमएल पर निशाना साधते हुए कहा कि- ये साझा सिद्धांतों के बजाय डर के कारण एक हुए हैं।
विज्ञापन
विश्वास मत से पहले विपक्ष पर बरसे पीएम प्रचंड
- फोटो : freepik
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नेपाल में विश्वास मत से पहले सदन को संबोधित करते हुए पीएम प्रचंड ने संभावित पतन और निरंकुशता के बारे में चिंता व्यक्त की। उन्होंने जोर देकर कहा कि नेपाली कांग्रेस और नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी-एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी (यूएमएल) ने देश में सुशासन की जड़ें जमाते ही हाथ मिला लिया है। इस दौरान उन्होंने दोनों पार्टियों को गठबंधन करने के लिए उनकी तीखी आलोचना की और उन पर देश को पतन की ओर धकेलने का आरोप लगाया।
क्या जनता ने इस गठबंधन को दी हैं मंजूरी?- प्रचंड
नेपाल में आखिरकार प्रधानमंत्री प्रचंड को पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा के नेतृत्व वाली सीपीएन-यूएमएल की तरफ से उनकी सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद विश्वास मत लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस दौरान पीएम प्रचंड ने कहा, अगर एनसी और यूएमएल समान विश्वासों या लक्ष्यों से एकजुट होते, तो मुझे चिंता नहीं होती। इसके बजाय, आप सुशासन के डर से बंधे हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या जनता ने इस गठबंधन को मंजूरी दी है।
'देश को पतन को ओर धकेल रहे एनसी-यूएमएल'
प्रधानमंत्री प्रचंड ने इस दौरान तर्क दिया कि स्वस्थ लोकतंत्र में मुख्य विपक्षी दल को सरकार नहीं बनानी चाहिए, उन्होंने एनसी और यूएमएल पर देश को पतन की ओर धकेलने का आरोप लगाया। उन्होंने उनसे कहा कि वे संविधान में संशोधन के नाम पर समझौते का उल्लंघन करके और छल करके देश को अनावश्यक संघर्ष की ओर न ले जाएं। पीएम प्रचंड ने याद दिलाया कि संविधान सभा में संविधान बनाने की प्रक्रिया व्यापक विचार-विमर्श और अधिकतम राष्ट्रीय सहमति के माध्यम से की गई थी।
विज्ञापन
'आप चर्चा में नहीं बल्कि साजिश में हैं'
पीएम प्रचंड ने कहा कि, अगर इरादा सही होता तो इस माननीय संसद में राष्ट्रीय सहमति की चर्चा की जा सकती थी। आप चर्चा में नहीं, बल्कि साजिश में हैं, यह इस बात से साबित होता है कि आपने किस स्थान और समय पर सहमति जताई है। स्वाभाविक और कर्तव्यनिष्ठा से काम करने पर उस स्तर का डर नहीं होता। बता दें कि 25 दिसंबर, 2022 को प्रधानमंत्री पद संभालने के डेढ़ साल के अंदर प्रधानमंत्री प्रचंड को पांचवी बार विश्वास मत का सामना करना पड़ा है।
नेपाल में क्या है वोटों का समीकरण
बता दें कि नेपाल की संसद में विश्वास मत जीतने के लिए उन्हें 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में कम से कम 138 वोटों की जरूरत है। हालांकि उनके विश्वास मत हारने की संभावना अधिक है। क्योंकि वर्तमान में नेपाली कांग्रेस के पास 89 सीटें हैं, जबकि सीपीएन-यूएमएल के पास 78 सीटें हैं। उनकी संयुक्त ताकत 167 है जो निचले सदन में बहुमत के लिए जरूरी 138 सीटों से कहीं अधिक है। वहीं प्रधानमंत्री प्रचंड की नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी सेंटर) के पास मात्र 32 सीटें हैं।
इन मुद्दों पर सहमत हुए हैं दोनों दल
इससे पहले बुधवार को नेपाली कांग्रेस के साथ गठबंधन बनाने के फैसले का केपी शर्मा ओली ने बचाव किया। जबकि नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा ने पहले ही केपी शर्मा ओली को देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में समर्थन दिया है। दोनों दलों ने कहा कि वे राष्ट्रीय हितों की रक्षा और नेपाल को समृद्ध और नेपाली लोगों को खुश करने के लिए संविधान में संशोधन की आवश्यकता पर सहमत हुए हैं।
विज्ञापन
क्या जनता ने इस गठबंधन को दी हैं मंजूरी?- प्रचंड
नेपाल में आखिरकार प्रधानमंत्री प्रचंड को पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा के नेतृत्व वाली सीपीएन-यूएमएल की तरफ से उनकी सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद विश्वास मत लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस दौरान पीएम प्रचंड ने कहा, अगर एनसी और यूएमएल समान विश्वासों या लक्ष्यों से एकजुट होते, तो मुझे चिंता नहीं होती। इसके बजाय, आप सुशासन के डर से बंधे हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या जनता ने इस गठबंधन को मंजूरी दी है।
विज्ञापन
'देश को पतन को ओर धकेल रहे एनसी-यूएमएल'
प्रधानमंत्री प्रचंड ने इस दौरान तर्क दिया कि स्वस्थ लोकतंत्र में मुख्य विपक्षी दल को सरकार नहीं बनानी चाहिए, उन्होंने एनसी और यूएमएल पर देश को पतन की ओर धकेलने का आरोप लगाया। उन्होंने उनसे कहा कि वे संविधान में संशोधन के नाम पर समझौते का उल्लंघन करके और छल करके देश को अनावश्यक संघर्ष की ओर न ले जाएं। पीएम प्रचंड ने याद दिलाया कि संविधान सभा में संविधान बनाने की प्रक्रिया व्यापक विचार-विमर्श और अधिकतम राष्ट्रीय सहमति के माध्यम से की गई थी।
विज्ञापन
'आप चर्चा में नहीं बल्कि साजिश में हैं'
पीएम प्रचंड ने कहा कि, अगर इरादा सही होता तो इस माननीय संसद में राष्ट्रीय सहमति की चर्चा की जा सकती थी। आप चर्चा में नहीं, बल्कि साजिश में हैं, यह इस बात से साबित होता है कि आपने किस स्थान और समय पर सहमति जताई है। स्वाभाविक और कर्तव्यनिष्ठा से काम करने पर उस स्तर का डर नहीं होता। बता दें कि 25 दिसंबर, 2022 को प्रधानमंत्री पद संभालने के डेढ़ साल के अंदर प्रधानमंत्री प्रचंड को पांचवी बार विश्वास मत का सामना करना पड़ा है।
नेपाल में क्या है वोटों का समीकरण
बता दें कि नेपाल की संसद में विश्वास मत जीतने के लिए उन्हें 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में कम से कम 138 वोटों की जरूरत है। हालांकि उनके विश्वास मत हारने की संभावना अधिक है। क्योंकि वर्तमान में नेपाली कांग्रेस के पास 89 सीटें हैं, जबकि सीपीएन-यूएमएल के पास 78 सीटें हैं। उनकी संयुक्त ताकत 167 है जो निचले सदन में बहुमत के लिए जरूरी 138 सीटों से कहीं अधिक है। वहीं प्रधानमंत्री प्रचंड की नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी सेंटर) के पास मात्र 32 सीटें हैं।
इन मुद्दों पर सहमत हुए हैं दोनों दल
इससे पहले बुधवार को नेपाली कांग्रेस के साथ गठबंधन बनाने के फैसले का केपी शर्मा ओली ने बचाव किया। जबकि नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा ने पहले ही केपी शर्मा ओली को देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में समर्थन दिया है। दोनों दलों ने कहा कि वे राष्ट्रीय हितों की रक्षा और नेपाल को समृद्ध और नेपाली लोगों को खुश करने के लिए संविधान में संशोधन की आवश्यकता पर सहमत हुए हैं।