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मिशन मार्स: मंगल ग्रह पर धूम रहा नासा का छोटा हेलीकॉप्टर इंजेन्यूइटी, रोवर के साथ जुटा रहा सैंपल

Sat, 01 May 2021 09:14 AM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: प्रियंका तिवारी Updated Sat, 01 May 2021 09:14 AM IST
सार

मंगल ग्रह पर जीवन की खोज (मार्स मिशन) में पहले दो रोवर उतार चुकी नासा ने फरवरी में एक और पर्सिवरेंस नामक रोवर को लाल ग्रह पर भेजा था। नासा ने इसके साथ ही छोटे से हेलीकॉप्टर इंजेन्यूइटी को भी भेजा था।

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NASAs Mars Ingenuity Helicopter got an extra month of flying as rover Perseverances scout
मंगल ग्रह - फोटो : Pixabay

विस्तार

भारत दुनिया का इकलौता देश है, जो अपने मंगल मिशन में पहली ही कोशिश में पूरी तरह से कामयाब रहने के साथ ही सबसे सस्ता अभियान पूरा करने वाला देश बन गया। वहीं अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने एक भारतवंशी द्वारा बनाए गए हेलीकॉप्टर को न केवल मंगल ग्रह पर पहुंचाया, बल्कि 23 करोड़ किमी दूर धरती पर बैठे-बैठे इसे उड़ा दिखाने का सपना भी सच कर दिखाया। इस साल 18 फरवरी को पर्सिवरेंस रोवर को मंगल ग्रह के जेजेरो क्रेटर इलाके में सफलतापूर्वक लैंड कराया गया। बता दें कि नासा पहले इस उड़ान परीक्षण को मई 2021 की शुरुआत में बंद करने की योजना बना रहा था। हालांकि, अब उसने एक महीने का वक्त बढ़ा दिया है, जिससे इंजेन्यूइटी हेलीकॉप्टर मंगल ग्रह के नए इलाकों में कठिन परिस्थितियों से निपट सके।

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दूसरे ग्रह पर उड़ान भरने वाला पहला हेलीकॉप्टर 
गौरतलब है कि मंगल ग्रह पर जीवन की खोज (मार्स मिशन) में फरवरी में पहले ही दो रोवर उतार चुकी नासा ने एक और पर्सिवरेंस नाम के रोवर को लाल ग्रह पर भेजा है। नासा ने इसके साथ ही छोटे से हेलीकॉप्टर इंजेन्यूइटी को भी भेजा है। पर्सिवरेंस के साथ भेजा गया छोटा हेलिकॉप्टर इंजेन्यूइटी पृथ्वी के वायुमंडल को छोड़कर कहीं और उड़ाया जाने वाला पहला रोटरक्राफ्ट है। इसकी मदद से ऐसी जगहों पर स्टडी आसान की जाएगी जहां रोवर या इंसान नहीं जा सकेंगे।
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मंगल की सतह पर रोवर के साथ हेलीकॉप्टर इंजेन्यूइटी ने पहली बार इसी 5 अप्रैल को मंगल ग्रह की सतह पर काम करान शुरू किया। इसके बाद 19 अप्रैल को इंजेन्यूइटी हेलीकॉप्टर ने 10 फीट की ऊंचाई तक पहले से तय 30 सेकेंड की सफल उड़ान भरी। वहीं, 22 अप्रैल को दूसरी सफल उड़ान भरी जो 51.9 सेकेंड में 16 फीट की ऊंचाई की थी। अब आगे भी यह हेलीकॉप्टर मंगल के सबसे दुर्गम जेजेरो क्रेटर इलाके की कई उड़ानें भरेगा। मंगल ग्रह के दिनों के मुताबिक 31 दिनों में कई उड़ानें होंगी, लेकिन कोई भी उड़ान 16.5 फीट से ज्यादा ऊंची और एक बार में 300 फीट से ज्यादा की परिधि वाली नहीं होगी।
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क्यों अहम है यह मिशन 
नासा का पर्सिवरेंस रोवर मंगल पर एस्ट्रोबायोलॉजी से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब खोजेगा। इनमें से सबसे बड़ा सवाल है कि क्या मंगल पर जीवन संभव है? यह मिशन न सिर्फ मंगल पर ऐसी जगहों की तलाश करेगा जहां पहले कभी जीवन रहा हो बल्कि अभी वहां मौजूद माइक्रोबियल लाइव के संकेत भी खोजेगा। पर्सीवरेंस रोवर मंगल ग्रह पर चट्टानों और मिट्टी से सैंपल लेगा और भविष्य में वहां जाने वाले मिशन इन सैंपल्स को धरती पर वापस लेकर आएंगे। दरअसल, इन सैंपल्स को स्टडी करने के लिए वैज्ञानिकों को बड़े लैब की जरूरत होगी जिसे मंगल पर ले जाना संभव नहीं है।  


कहां मिलेंगे जवाब?
लैंडिंग के बाद दो साल तक पर्सिवरेंस जजेरो क्रेटर में जीवन के निशान तलाशेगा। नासा के मुताबिक पर्सिवरेंस के लिए जजेरो क्रेटर ही सबसे सही जगह है और वहां एक्सपेरिमेंट किए जा सकते हैं। जेजेरो एक सूखी हुई प्राचीन झील का तल है। मंगल पर यह सबसे पुराना और सबसे रोचक स्थान है। भले ही आज यह झील सूख चुकी हो, उम्मीद की जा रही है कि झील के तले में या किनारे सेडिमेंट में कार्बोनेटेड मिनरल्स मिल सकते हैं। धरती पर जीवाश्म इन्हीं में मिलते हैं, इसलिए हो सकता है कि ये मंगल के इतिहास की परतें भी खोल सकेंगे।

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