Artemis 1 Launch: नासा का मून मिशन लॉन्च, तीसरे प्रयास में चांद पर भेजा रॉकेट, धरती की पहली तस्वीर आई
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने चांद पर इंसानी मिशन की बुधवार को शुरुआत कर दी। तीसरे प्रयास में नासा ने चांद पर अपना अर्टेमिस-1 मिशन लॉन्च कर दिया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
करीब 50 साल बाद नासा ने चंद्रमा पर अपने मिशन को फिर से लॉन्च कर दिया है। बुधवार को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने चांद पर इंसानी मिशन की शुरुआत की। अपने तीसरे प्रयास में नासा ने आर्टेमिस-1 मिशन लॉन्च किया। इससे पहले चंद्रमा पर 50 साल पहले नासा ने अपोलो मिशन भेजा गया था। जानकारी के मुताबिक, 32 मंजिल के बराबर ऊंचाई वाले अंतरिक्ष लांच सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट को फ्लोरिडा के फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया।
अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट
अंतरिक्ष रॉकेट आर्टेमिस-1 और ऑरियन स्पेसक्रॉफ्ट की पहली परीक्षण उड़ान है। 322 फुट (98 मीटर) लंबा यह रॉकेट नासा द्वारा बनाया गया अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। इससे बिना चालक दल वाले ऑरियन स्पेसक्राफ्ट को चांद पर छोड़ा गया। ऑरियन करीब 42 दिनों तक चांद पर परीक्षण करेगा।
2025 में नासा का तीसरा चंद्र मिशन
यह नासा के आर्टेमिस चंद्र कार्यक्रम का पहला मिशन होगा। नासा 2025 में अपने तीसरे मिशन द्वारा अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने की योजना पर काम कर रहा है। नासा ने चांद के समीप जाने से पहले उसकी सतह से 60 मील ऊपर ओरियन उपग्रह से परीक्षण की योजना बनाई है।
10 छोटे उपग्रह भी होंगे स्थापित
अगर आर्टेमिस-1 सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुंच जाता है तो ये परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। मिशन के दौरान ओरियन 10 छोटे उपग्रहों को भी अंतरिक्ष में स्थापित करेगा जिन्हें क्यूबसैट के नाम से जाना जाता है। इनमें से ही एक में खमीर होगा जो ये देखने के लिए होगा कि चांद पर माइक्रोग्रेविटी और विकिरण वातावरण सूक्ष्मजीवों के विकास को किस तरह से प्रभावित करते हैं। इस दौरान आइसक्यूब चांद की परिक्रमा करेगा और चांद पर बर्फ के भंडार की खोज करेगा और जिसका उपयोग भविष्य में चांद पर जाने वाले यात्री कर पाएंगे।
करीब 23 दिन अंतरिक्ष में बिताएगा
अंतरिक्ष यान को धीरे करने के लिए ओरियन अपने ऑनबोर्ड थ्रस्टर्स को फायर करेगा और चांद के गुरुत्वाकर्षण को इसे कक्षा में पकड़ने में मदद करेगा। इस चरण के दौरान ओरियन चांद से करीब 70 हजार किलोमीटर की यात्रा करेगा और पृथ्वी से अब तक की सबसे ज्यादा दूरी पर पहुंचेगा। इस दौरान अगर इसमें अंतरिक्ष यात्री होते तो उन्हें दूर से पृथ्वी और चांद का भव्य दृश्य दिखाई देता। ओरियन चांद की कक्षा में छह से 23 दिन बिताकर चांद की कक्षा से बाहर निकलने के लिए एक बार फिर अपने थ्रस्टर्स को फायर करेगा और खुद को पृथ्वी प्रक्षेपवक्र पर वापस लाएगा।
धरती की पहली तस्वीर भेजी
इस बीच Orion Capsule ने धरती की पहली तस्वीर भेजी है। तस्तीर धरती से करीब 57 हजार मील यानी 92 हजार किमी की दूरी से ली गई है। यान 8,800 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चांद के आर्बिट की तरफ आगे बढ़ रहा है।
New views of planet Earth from @NASA_Orion as #Artemis I journeys to the Moon. Orion is 9.5 hours into a 25.5-day test flight. pic.twitter.com/CBaA4ZOK4X
— NASA (@NASA) November 16, 2022