फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Nasa Hubble Space Telescope finds first evidence of water vapour on Jupiter moon Ganymede

शोध: बृहस्पति के चंद्रमा गेनीमेड पर मिले पानी से बनी भाप के सबूत, नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने की खोज

Wed, 28 Jul 2021 12:55 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 28 Jul 2021 12:55 AM IST
सार

Nasa Hubble Space Telescope finds first evidence of water vapour on Jupiter moon Ganymede नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने अपनी खोज में बृहस्पति के चंद्रमा गेनीमेड पर पानी से बनी भाप के सबूत मिलने की जानकारी दी। 

विज्ञापन
Nasa Hubble Space Telescope finds first evidence of water vapour on Jupiter moon Ganymede
नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप - फोटो : Nasa.gov

विस्तार

अंतरिक्ष के दूसरे ग्रहों पर जीवन तलाशने की संभावनाओं के बीच नासा के हाथ एक अहम कड़ी लगी है। दरअसल, नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने अपनी खोज में बृहस्पति के चंद्रमा गेनीमेड पर पानी से बनी भाप के सबूत मिलने की जानकारी दी। 

विज्ञापन


नेचर एस्ट्रोनॉमी जनरल में सोमवार (26 जुलाई) को प्रकाशित शोध के मुताबिक, पानी की भाप गैस के रूप में थी, लेकिन चंद्रमा की सतह से टकराकर बर्फ में तब्दील हो गई। गौरतलब है कि नासा ने अपने पिछले शोध में गेनीमेड को सोलर सिस्टम का सबसे बड़ा चंद्रमा बताया था, जिस पर पृथ्वी के सभी समुद्र से ज्यादा पानी होने की बात कही गई थी। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक, यहां तापमान काफी कम है, जिसके चलते पानी की ऊपरी सतह पर बर्फ जमी रहती है। 
विज्ञापन


नासा के शोध में बताया गया कि गेनीमेड के समुद्र सतह से करीब 160 किमी नीचे हैं, जिससे समुद्र के पानी के वाष्पीकरण होने का अनुमान काफी कम है। गौरतलब है कि हबल ने करीब दो दशक तक गेनीमेड पर नजर रखी और पानी के भाप बनने की प्रक्रिया के सबूत जुटाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


साल 1998 में हबल की स्पेस टेलीस्कोप इमेजिंग स्पेक्ट्रोग्राफ ने गेनीमेड की पहली अल्टावॉयलेट तस्वीर खींची थी, जिसमें गेनीमेड का चुंबकीय क्षेत्र कमजोर होने की जानकारी मिली थी। इन अल्ट्रावॉयलेट तस्वीरों से आणविक ऑक्सीजन की मौजूदगी की जानकारी मिली थी। हालांकि, कुछ जांच के दौरान वातावरण में शुद्ध ऑक्सीजन मिलने की पुष्टि नहीं हुई। वैज्ञानिकों ने इस अंतर की वजह परमाणु ऑक्सीजन की सांद्रता अधिक होने को माना।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed