इस्राइली चुनाव में नेतन्याहू के साथ छाए पीएम मोदी, जानिए यहां कैसे होते हैं चुनाव
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17 सितंबर को इस्राइल अपना नया प्रधानमंत्री चुनेगा। अरब देशों से तल्ख रिश्ते और रक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए हमेशा चर्चा में रहने वाले इस देश की चुनाव प्रक्रिया पर विश्व की निगाहें टिकी हुई हैं। भारत के लिए भी यह चुनाव अहम होने वाला है क्योंकि रक्षा, कृषि और सिचाईं के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच करीबी संबंध हैं। अगर नतीजा नेतन्याहू के पक्ष में आता है तो वह रिकॉर्ड पांचवी बार इस्राइल की सत्ता संभालेंगे।
नेतन्याहू के विपक्ष में इस्राइली सेना के पूर्व प्रमुख बेनी गांट्ज खड़े हैं। जिनकी पार्टी इस्राइल रेसिलिएंस, नेतन्याहू की पार्टी लिकुड को कड़ी टक्कर दे रही है। बेनी गांट्ज की छवि बेहद ईमानदार और साफ राजनेता की है। उन्होंने नेतन्याहू का मुकाबला करने के लिए दो अन्य प्रमुख पार्टियां तेलेम और येश अतिद के साथ मिलकर ‘ब्लू एंड वाइट’ गठबंधन भी बनाया है।
इस चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को भुनाने की भी कोशिश की है। पार्टी ने चुनावी विज्ञापन में नेतन्याहू के साथ मोदी की तस्वीर साझा की है। हालांकि चुनावी पोस्टरों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूसी प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन के साथ भी नेतन्याहू की तस्वीर दिखाई जा रही है।
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी इस्राइल में भी खूब लोकप्रिय हैं। तेल अवीव स्थित किंग जॉर्ज स्ट्रीट में लिकुड पार्टी का मुख्यालय है, जहां इन तीन अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ नेतन्याहू की नजदीकी बताने वाले चुनावी विज्ञापन वाले बैनर लगे हैं। नेतन्याहू का चुनाव इस बार विश्व नेताओं के साथ घनिष्ठ संबंधों पर ही केंद्रित है।
इस्राइल में चुनावी प्रणाली
इस्राइल की संसद नेसेट का चुनाव अनुपातिक मतदान प्रणाली के अंतर्गत होता है। जिसमें मतदाता को बैलेट पेपर पर प्रत्याशियों की जगह पार्टी को मतदान करना होता है। किसी भी पार्टी को नेसेट (संसद) में पहुंचने के लिए कुल मतदान में से न्यूनतम 3.25 फीसदी वोट पाना जरूरी है। यदि किसी पार्टी का वोट प्रतिशत 3.25 से कम होता है तो उसे संसद की कोई भी सीट नहीं मिलती है। पार्टियों को मिले मत प्रतिशत के अनुपात में उन्हें संसद की सीटें आवंटित कर दी जाती हैं। यह प्रक्रिया 28 दिनों के अंदर पूरी कर ली जाती है। इस्राइल के इतिहास में कोई भी पार्टी आज तक पूर्ण बहुमत से सरकार नहीं बना पाई है।
जानिए 'नेसेट' के बारे में
इस्राइल की संसद को नेसेट कहा जाता है। नेसेट प्राचीन हिब्रू शब्द है जो यहूदी परंपरा के अनुसार 120 ऋषियों और पैगंबरों की एक विधानसभा थी। नेसेट के सदस्य का कार्यकाल चार साल का होता है। इसी के द्वारा इस्राइल के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का चुनाव होता है। नेसेट में ही इस्राइल का कानून बनता है। इसमें कुल 120 सदस्य होते हैं। यहां मतदान करने की न्यूनतम उम्र 18 साल है।