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Nancy Pelosi Taiwan Trip!: पेलोसी की प्रस्तावित यात्रा पर छिड़े विवाद के बीच चुप क्यों है ताइवान?

Sat, 30 Jul 2022 06:05 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ताइपे
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ताइपे Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 30 Jul 2022 06:05 PM IST
सार

Nancy Pelosi Taiwan Trip: चीन ने दो टूक चेतावनी दी है कि पेलोसी वहां गईं, तो वह किसी भी हद तक जा सकता है। स्थिति को संभालने की कोशिश में गुरुवार रात अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ फोन पर सवा दो घंटे बातचीत की...

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Nancy Pelosi Taiwan Trip: why the taiwan is silent on pelosi's visit
Nancy Pelosi Taiwan Trip: नैंसी पेलोसी - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की स्पीकर नैंसी पेलोसी के एशिया यात्रा पर रवाना होने के साथ ही ताइवान मुद्दे पर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बेहद बढ़ गया है। पेलोसी ने इस हफ्ते कहा था कि इस यात्रा के दौरान वे ताइवान भी जाएंगी। लेकिन उनके रवाना होने के बाद भी इसको लेकर रहस्य बना हुआ है कि वे सचमुच वहां जाएंगी या नहीं।

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चीन ने दो टूक चेतावनी दी है कि पेलोसी वहां गईं, तो वह किसी भी हद तक जा सकता है। स्थिति को संभालने की कोशिश में गुरुवार रात अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ फोन पर सवा दो घंटे बातचीत की। इस दौरान भी शी ने चेतावनी दी कि ‘जो आग से खेलते हैं, वे झुलस जाते हैं।’

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शनिवार सुबह चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स ने इस सिलसिले में एक बेहद तल्ख संपादकीय लिखा। इसमें कहा गया है- ‘संवेदनशील अवधि में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (चीन की सेना) पेलोसी के विमान की लगातार निगरानी करेगी। अगर उनका विमान हमारी वायु सेना में उड़ता पाया गया, तो पीएलए के लड़ाकू विमान चेतावनी दे सकते हैं, पेलोसी के विमान का पीछा कर सकते हैं, उसे रोक सकते हैं, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हस्तक्षेप कर सकते हैं, विमान को जबरन उतार सकते हैं, या फिर उसे पीछे खदेड़ सकते हैं। इस प्रक्रिया में होने वाले हर परिणाम की जिम्मेदारी पूरी तरह अमेरिका की होगी।’

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इस बीच इस पूरे प्रकरण में ताइवान की राष्ट्रपति की चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है। पेलोसी की प्रस्तावित यात्रा का एलान होने के बाद से ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की गई है। हालांकि ताइवान के प्रधानमंत्री सु त्सेंग-चांग ने यह जरूर कहा है- ‘स्पीकर पेलोसी ने ताइवान के लिए जो सशक्त समर्थन और उदारता दिखाई है, हम उसके लिए आभारी हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि ताइवान हर दोस्ताना अतिथि का स्वागत करता है।

 

 

ताइवान दो करोड़ 40 लाख आबादी वाला एक द्वीप है। 1949 में चीन में हुई कम्युनिस्ट क्रांति के दौरान चीन के तत्कालीन शासक भाग कर इस द्वीप पर चले गए थे। चीन सरकार इसे अपना हिस्सा मानती है। 1971 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने अपनी चीन यात्रा के दौरान चीन सरकार के इस रुख को स्वीकार कर लिया था। तब से अमेरिका वन चाइना पॉलिसी (यानी ताइवान को चीन का हिस्सा मानने की नीति) पर चलता रहा है।
 

 

अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन के एक विश्लेषण में कहा गया है कि पेलोसी की प्रस्तावित यात्रा से ताइवान की राष्ट्रपति त्साई के लिए कठिन स्थिति पैदा हो गई है। त्साई अमेरिका को नाराज करना नहीं चाहतीं, क्योंकि ताइवान अमेरिका से मिलने वाले हथियारों पर निर्भर है। लेकिन पेलोसी की यात्रा से चीन का गुस्सा जिस तरह भड़का है, त्साई उसे ताइवान के हित में नहीं मानतीं। ये आशंका गहरा गई है कि विवाद भड़कने पर चीन ताइवान पर हमला कर अपने ‘एकीकरण’ का लक्ष्य अभी पूरा कर सकता है।
 

 

ताइवान की चुप्पी के बारे में ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में ताइवान स्टडीज प्रोग्राम से जुड़े राजनीति-शास्त्री वेन-ति सुंग ने सीएनएन से कहा- ‘पेलोसी की यात्रा के लेकर उत्साह ना दिखाना ताइवान सरकार के हित में है। वह ऐसा संकेत देने से बचना चाहती है कि ताइवान पेलोसी की यात्रा को प्रोत्साहित कर रही है। उसके चुप रहने पर संदेश जाएगा कि यात्रा का फैसला अमेरिका ने किया। जबकि अगर वह यात्रा का स्वागत करता है, तो चीन इसे ताइवान की साजिश मानेगा।’


ये एलान हो चुका है कि पेलोसी एशिया यात्रा के दौरान जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया और सिंगापुर जाएंगी। ताइवान के बारे में अभी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है।

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