{"_id":"65f067a8a1fe1a7fbd0bbee8","slug":"myanmar-use-of-heavy-weapons-in-residential-areas-is-cause-for-concern-threat-to-common-people-increases-2024-03-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"म्यांमार: UN ने कहा- रिहायशी इलाकों में भारी हथियारों का प्रयोग चिंता का सबब, आम लोगों की जान को खतरा बढ़ा","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
म्यांमार: UN ने कहा- रिहायशी इलाकों में भारी हथियारों का प्रयोग चिंता का सबब, आम लोगों की जान को खतरा बढ़ा
Tue, 12 Mar 2024 08:03 PM IST
अभिषेक दीक्षित
यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Tue, 12 Mar 2024 08:03 PM IST
सार
म्यांमार में लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार का तख्तापलट करके सेना द्वारा सत्ता पर कब्जा किए जाने को तीन साल हो चुके हैं। उसके बाद से विपक्षी विचारों और प्रदर्शनों पर सेना के बल प्रयोग में 4 हजार 600 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें सैकड़ों महिलाएं और बच्चे हैं। हताहतों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका है।
विज्ञापन
Myanmar
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
म्यांमार में जारी जंग को लेकर संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्तेफान दुजैरिक ने सोमवार को मुख्यालय में पत्रकारों को अहम बातें बताईं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सत्तारूढ़ सैन्य शासन जुंटा की वफादार सेनाओं और विद्रोही अराकान आर्मी के बीच चल रही है। पूरे देश में विद्रोही गुटों और राष्ट्रीय सेना के बीच लड़ाई तेज होती जा रही है। इसमें भारी हथियारों का प्रयोग भी हो रहा है, जिससे आम लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है। लोगों की जानें भी जा रही हैं।
विज्ञापन
दुजैरिक ने बताया कि शनिवार को राखीन प्रांत की राजधानी सित्तवे में एक तोप का भारी गोला एक आवासी इलाके में गिरा। इससे कम से कम 8 रोहिंग्या लोगों की जान चली गई और 12 अन्य को घायल हो गए। घायलों में पांच बच्चे भी हैं।
विज्ञापन
गौरतलब है कि म्यांमार में लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार का तख्तापलट करके सेना द्वारा सत्ता पर कब्जा किए जाने को तीन साल हो चुके हैं। उसके बाद से विपक्षी विचारों और प्रदर्शनों पर सेना के बल प्रयोग में 4 हजार 600 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें सैकड़ों महिलाएं और बच्चे हैं। हताहतों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका है।
विज्ञापन
प्रवक्ता ने बताया कि पिछले लगभग एक पखवाड़े में ये दूसरी बार ह जब सित्तवे में तोप गोला गिरने से लोगों की जान गई है। राखीन अधिकतर मुस्लिम अल्पसंख्यकों का घर है, जहां से लाखों रोहिंग्या लोग 2017 में सेना के हिंसक दमन से बचकर, सुरक्षा की खातिर पड़ोसी बांग्लादेश में पनाह लेने के लिए जा चुके हैं।
प्रवक्ता दुजैरिक ने कहा कि इस स्थिति के कारण पूरे राज्य में, लोगों के विस्थापन में तेजी आ गई है। तीन लाख से अधिक लोग इस समय विस्थापित हैं। उन्होंने कहा कि युद्धरत पक्षों द्वारा अपनाए जा रहे तरीके, आम लोगों को नुक़सान पहुंचा रहे हैं और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने में सहायता एजेंसियों की क्षमता पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं।
प्रवक्ता ने कहा कि हम सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी की याद दिलाते हैं, जिसके दायरे में सहायता कर्मी भी शामिल हैं।
(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)