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Hindi News ›   World ›   Myanmar: Suu Kyi punishment provoked further resistance

म्यामांर: सू ची को सजा से और भड़का प्रतिरोध, लोकतंत्र समर्थकों का मनोबल कायम

Thu, 09 Dec 2021 05:12 PM IST
Amit Mandal वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून Published by: Amit Mandal Updated Thu, 09 Dec 2021 05:12 PM IST
सार

छह दिसंबर को जब सू ची को सजा सुनाई गई तो उसके कुछ घंटों के बाद ही सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए।

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Myanmar: Suu Kyi punishment provoked further resistance
म्यांमार में प्रदर्शनकारियों पर सेना की कार्रवाई - फोटो : पीटीआई

विस्तार

म्यांमार की एक सैनिक अदालत ने नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) की नेता आंग सान सू ची को सोमवार को चार साल कैद की सजा सुनाई। (बाद में सैनिक शासकों ने सजा को घटा कर दो साल कैद कर दिया।) लेकिन इससे म्यांमार में सैनिक शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे जन समूहों का मनोबल नहीं टूटा है। बल्कि उससे लोगों का विरोध और भड़क उठा है।

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सैनिक शासन के विरोध की प्रतीक बनी रहीं सू ची
सू ची तीन दशक से म्यांमार में सैनिक शासन के विरोध की प्रतीक बनी रही हैं। 1990 से इस सदी के पहले दशक तक उन्हें 15 साल नजरबंद रखा गया था। अपनी इस भूमिका के कारण देश में उनकी लोकप्रियता बनी हुई है। छह दिसंबर को जब उन्हें सजा सुनाई गई, उसके कुछ घंटों के बाद ही सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। सैनिक शासन के खिलाफ बैनर लिए और नारेबाजी करते उस तरह के प्रदर्शन कई जगहों पर मंगलवार को भी जारी रहे।
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मानव अधिकार संगठन- बर्मा ह्यूमन राइट्स नेटवर्क के कार्यकारी निदेशक क्याव विन ने टीवी चैनल फ्रांस-24 से कहा- ‘ये प्रतिरोध सिर्फ आंग सान सू ची की गिरफ्तारी या उन्हें जेल में डालने के खिलाफ नहीं है। यह लोगों के लिए है। इस देश में रोज लोग परिवर्तन के लिए अपनी जान दे रहे हैँ।’ पर्यवेक्षकों का कहना है कि म्यांमार में इस सदी में डेढ़ दशक तक लोगों को अपेक्षाकृत ज्यादा आजादी मिलती रही। इस दौरान एक पूरी पीढ़ी पली-बढ़ी, जो अब सैनिक शासन के तहत लागू प्रतिबंधों का विरोध कर रही है।
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ब्रिटेन में म्यांमार के सैनिक शासन के खिलाफ अभियान से जुड़े संगठन- बर्मा कैंपेन यूके के निदेशक मार्क फार्मेनर इसी टीवी चैनल से कहा- ‘पुरानी पीढ़ी के लोग जानते हैं कि सैनिक शासन के तहत भय का कैसा माहौल रहता है। लेकिन नौजवान पीढ़ी सोशल मीडिया पर आजादी से अपने विचार जताती थी। वह अच्छे भविष्य की उम्मीद कर रही थी। इस बीच सेना उनके सारी आजादी छीन ली।’

विरोध प्रदर्शनों में ज्यादा भागीदारी नौजवान पीढ़ी की
म्यांमार में अभी जारी विरोध प्रदर्शनों में ज्यादा भागीदारी नौजवान पीढ़ी की ही है। ये लोग सोशल मीडिया के जरिए प्रदर्शनों का आयोजन करते हैं और अचानक किसी जगह पर एक भीड़ इकट्ठी कर देते हैँ। सू ची को सजा सुनाए जाने के बाद इसी तरह कई जगह विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए हैँ। फार्मेनर ने बताया कि म्यांमार में लोग सैकड़ों तरीकों से रोज छोटे-छोटे विरोध प्रदर्शन आयोजित करते हैँ।


सेना ने इस साल एक फरवरी को निर्वाचित सरकार के सत्ता संभालने से ठीक पहले तख्ता पलट दिया था। पर्यवेक्षकों का कहना है कि उसके बाद से कोई दिन ऐसा नहीं गुजरा, जब कहीं ना कहीं लोगों ने विरोध नहीं जताया हो। इस दौरान सेना के दमन में 1,300 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। मानव अधिकार कार्यकर्ताओं कि सेना और पुलिस ने इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को यातना भी दी है। हजारों लोग गिरफ्तार किए गए हैं और महिला बंदियों के साथ बलात्कार की घटनाएं भी हुई हैँ। इसके बावजूद सू ची की गिरफ्तारी के बाद जिस तरह का प्रतिरोध देखने को मिला, उससे यही जाहिर हुआ कि सेना विरोधी समूहों का मनोबल नहीं टूटा है।

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