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म्यांमार के यांगून में सुरक्षा बलों ने तख्तापलट विरोधी प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा, चलाईं गोलियां

Fri, 26 Feb 2021 05:49 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर अजाला, यांगून
न्यूज डेस्क, अमर अजाला, यांगून Published by: प्रियंका तिवारी Updated Fri, 26 Feb 2021 05:49 PM IST
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Myanmar security forces disperse anti-coup protesters in yangon
म्यांमार के यांगून में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर चलाईं गोलियां - फोटो : सोशल मीडिया

म्यांमार के सबसे बड़े शहर यांगून में शुक्रवार को सुरक्षाबलों ने 1000 से अधिक तख्तापलट विरोधियों को तितर-बितर करने के लिए चेतावनी स्वरूप गोलियां चलाईं। दरअसल, प्रदर्शनकारी यांगून में एक लोकप्रिय शॉपिंग मॉल के सामने जुट गए थे।

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उनके हाथों में तख्तियां थीं और वह तख्तापलट के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। इस दौरान उन्हें नियंत्रित करने के लिए सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई और पानी की बौछार करने वाली गाड़ियां लाई गईं।
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इस बीच सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई और अचानक ही चेतावनी स्वरूप गोलियां दागे जाने की आवाज सुनाई देने लगी। सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को मुख्य सड़क से खदेड़ दिया। ऐसे में प्रदर्शनकारी आसपास की गलियों और घरों में छिपने लगे।
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यह टकराव बढ़ते लोकप्रिय विद्रोह और म्यांमार के जनरलों के बीच बढ़ते तनाव का परिचायक है। सेना के जनरलों ने आंग सान सू की भारी मतों के साथ निर्वाचित सरकार गिरा दी। इससे अंतरराष्ट्रीय बिरादरी स्तब्ध है।

उल्लेखनीय है कि म्यामांर साल 1962 से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग था। यहां पांच दशक तक सैन्य शासन रहा। हाल के वर्षों में लोकतंत्र कायम करने की दिशा में आंशिक लेकिन अहम प्रगति हुई थी, लेकिन एक फरवरी को हुए तख्तापलट से इस प्रक्रिया को खासा झटका लगा है।

सू की के लिए तो यह और भी बड़ा झटका है, जिन्होंने लोकतंत्र की मांग को लेकर वर्षों तक संघर्ष किया, वर्षों तक वह नजरबंद रहीं और अपने प्रयासों के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार भी मिला। उन्होंने कई बार चेताया था कि अगर शक्तिशाली सेना बदलावों को स्वीकार करती है तो ही देश के लोकतांत्रिक सुधार सफल होंगे।

हालांकि, इस बीच एक फरवरी को म्यांमार में सेना ने सोमवार को तख्तापलट कर दिया और शीर्ष नेता आंग सान सू की समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। इसके बाद यह घोषणा की गई कि सेना प्रमुख जनरल मिन आंग लाइंग ने एक साल के लिए देश का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है।



इस घोषणा के दौरान सेना के तैयार किए संविधान के उस हिस्से का हवाला दिया गया, जो राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में देश का नियंत्रण सेना को अपने हाथों लेने की इजाजत देता है।

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