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Myanmar: म्यांमार के अधिकारियों ने रोहिंग्या शरणार्थियों का हाल जाना, लेकिन वापसी पर चुप रहे

Fri, 24 Mar 2023 07:19 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, ढाका
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, ढाका Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 24 Mar 2023 07:19 PM IST
सार

बांग्लादेश में करीब दस लाख रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं। उनके लिए कोक्स बाजार जिले में 34 शिविर बनाए गए गए हैं। हालांकि म्यांमार से इक्का-दुक्का शरणार्थियों का बाग्लादेश आने का सिलसिला चार दशक पहले ही शुरू हो गया था, लेकिन 2017 में लाखों की संख्या ये शरणार्थी यहां आए।

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Myanmar officials know the condition of Rohingya refugees but remain silent on their return Updates
रोहिंग्या (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : SOCIAL MEDIA

विस्तार

म्यांमार से आए एक प्रतिनिधिमंडल ने एक सप्ताह तक बांग्लादेश में स्थित रोहिंग्या शरणार्थियों के शिविरों का दौरा किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सैकड़ों का सत्यापन और पंजीकरण किया। यहां उनकी बांग्लादेश के अधिकारियों के साथ शरणार्थियों की स्वदेश वापसी के सवाल पर बातचीत भी हुई है। लेकिन खबरों के मुताबिक यह बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंची।

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म्यांमार और बांग्लादेश की सरकारों ने प्रतिनिधिमंडल के दौरे को एक सकारात्मक घटना बताया है। रोहिंग्या शरणार्थियों की घर वापसी की प्रक्रिया 2019 में शुरू हुई थी। लेकिन बात ज्यादा आगे नहीं बढ़ी। इसलिए अब म्यांमार की सैनिक सरकार की प्रतिनिधिमंडल भेजन की पहल को यहां महत्त्वपूर्ण माना गया है। हालांकि शरणार्थी शिविरों में रह रहे कई रोहिंग्या मुसलमानों ने इस यात्रा को लेकर निराशा जताई है। उन्होंने यह अंदेशा भी जताया है कि म्यांमार लौटन पर उन्हें फिर ज्यादतियों का शिकार बनना पड़ सकता है।
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बांग्लादेश में करीब दस लाख रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं। उनके लिए कोक्स बाजार जिले में 34 शिविर बनाए गए गए हैं। हालांकि म्यांमार से इक्का-दुक्का शरणार्थियों का बाग्लादेश आने का सिलसिला चार दशक पहले ही शुरू हो गया था, लेकिन 2017 में लाखों की संख्या ये शरणार्थी यहां आए। उस समय बड़े पैमाने पर रोहिंग्या समुदाय को म्यांमार की सेना के अत्याचार का शिकार बनना पड़ा था। संयुक्त राष्ट्र ने उस समय की घटनाओं को ‘नस्लीय सफाया और नरसंहार’ बताया था।
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बाद में म्यांमार और बांग्लादेश के बीच शरणार्थियों को लौटाने के बारे में एक समझौता हुआ। लेकिन आरोप है कि म्यांमार सरकार ने उस समझौते की भावना के मुताबिक काम नहीं किया है। बार-बार वादा करने के बावजूद उसने अपने देश में शरणार्थियों की वापसी के अनुकूल माहौल तैयार नहीं किया है। इस बीच फरवरी 2021 में म्यांमार की सेना ने आंग सान सू ची की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी के नेतृत्व वाली सरकार का तख्ता पलट कर सत्ता पर कब्जा जमा लिया था।

म्यांमार के सैनिक शासन ने पहली अपना प्रतिनिधिमंडल रोहिंग्या शरणार्थियों के शिविरों में भेजा है। इसका नेतृत्व आंग म्यूव ने किया। वे म्यांमार के विदेश मंत्रालय के निदेशक हैं। इस दल ने यहां शरणार्थियों से लंबी बातचीत की। शरणार्थियों का आरोप है कि प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें इस बारे में कोई ठोस सूचना नहीं दी कि उनकी घर वापसी कब होगी और क्या वापसी के बाद उन्हें म्यांमार की नागरिकता दी जाएगी।

वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम के एक संवाददाता ने जब शरणार्थी शिविरों का दौरा किया, तो वहां शरणार्थी मोहम्मद यूसुफ ने बताया कि उनसे उनके गांव में हुई घटनाओं के बारे में पूरी पूछताछ की गई। यूसुफ म्यांमार के रखाइन प्रांत के बाशिंदा हैं। यूसुफ ने कहा कि सभी जानकारी देने के बाद जब मैं पूछा कि वापसी कब शुरू होगी, तो उन्होंन इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया।


हमीदा खातुन नाम की एक शरणार्थी ने कहा कि यहां आकर हमारे बारे में जानकारी हासिल करने की बात हमारे समझ में नहीं आई। रखाइन प्रांत में चार पीढ़ियों से रह रहे थे। अब वे पूछ रहे हैं कि क्या हम सचमुच वहां के निवासी हैं। यह अजीब बात है। संपर्क करने पर प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने इन सवालों के बारे में निक्कई एशिया के संवाददाता से बातचीत करने से इनकार कर दिया।

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