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Myanmar: चुनाव के ढोंग से जनता अधिकारों का दमन ढक नहीं पाएंगे म्यांमार के सैनिक शासक

Sat, 18 Feb 2023 03:14 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 18 Feb 2023 03:14 PM IST
सार

Myanmar: म्यांमार की सेना ने एक फरवरी 2021 को निर्वाचित प्रतिनिधियों को जेल में डालकर सत्ता पर कब्जा जमा लिया था। तब से सैनिक शासन विरोधी समूहों के साथ उसका हिंसक टकराव जारी है, जिसमें 2,900 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है...

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Myanmar military rulers not ready for talks with their opposition parties
Myanmar junta chief Min Aung Hlaing - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

म्यांमार के सैनिक शासक अपने विरोधी संगठनों के साथ किसी तरह की बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं। इसके बदले वे देश में इस वर्ष चुनाव करवाने की अपनी योजना पर आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन उनकी चुनाव योजना देश और विदेश में लोगों का भरोसा पाने में अब तक नाकाम है।

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म्यांमार की सेना ने एक फरवरी 2021 को निर्वाचित प्रतिनिधियों को जेल में डालकर सत्ता पर कब्जा जमा लिया था। तब से सैनिक शासन विरोधी समूहों के साथ उसका हिंसक टकराव जारी है, जिसमें 2,900 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।

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विश्लेषकों के मुताबिक चुनाव कराने की योजना के पीछे सैनिक शासकों का मकसद सत्ता पर अपने नियंत्रण को स्थायी बनाना है। म्यांमार के पड़ोसी देशों में ज्यादातर पर्यवेक्षकों की यही राय है, लेकिन वहां की सरकारें इस बारे में कोई साफ रुख तय करने से बच रही हैं। दस दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन के एक अधिकारी से जब इस बारे में वेबसाइट एशिया टाइम्स के संवाददाता ने संपर्क किया, तो उसने कहा- ‘जहां तक मेरी जानकारी है, म्यांमार के चुनाव के बारे में आसियान की कोई नीति नहीं है। लेकिन बहुत लोग इसको लेकर संदेह का भाव रख रहे हैं।’

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पश्चिमी देशों का रुख इस मामले ज्यादा साफ है। ब्रिटेन की गैर-सरकारी संस्था बर्मा कैंपेन यूके के निदेशक मार्क फार्मैनर ने कहा है- ‘ब्रिटिश सरकार सैन्य शासन की तरफ से कराए गए चुनाव को स्वीकार करेगी, इसका कोई सवाल ही नहीं है। ऐसा मानने की कोई वजह नहीं है कि उस चुनाव से जनता की इच्छा सामने आएगी।’

ब्रिटेन ने हाल में खुद को म्यांमार की वास्तविक सरकार बताने वाली नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट (एनयूजी) से संपर्क बनाया है। एनयूजी का गठन पूर्व सत्ताधारी पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी के सदस्यों ने किया है। इस पार्टी की नेता आंग सान सू ची हैं, जिन्हें 33 वर्ष से अधिक कैद की सजा सुना कर जेल में डाल दिया गया है।

एनयूजी के ‘विदेश मंत्री’ जिन मार आंग ने हाल में कई पश्चिमी देशों का दौरा किया। लंदन में उनकी मुलाकात ब्रिटिश अधिकारियों से हुई। इस बीच खबर है कि जब जल्द ही यूरोपियन यूनियन (ईयू) प्रस्तावित चुनाव के बारे में अपने रुख की घोषणा करेगा। ईयू के प्रवक्ता ने वेबसाइट एशिया टाइम्स से कहा- ‘सैन्य शासन ने 2023 में पारदर्शी, समावेशी और विश्वसनीय चुनाव कराने की घोषणा की है। लेकिन मौजूदा हालात में ऐसा हो पाने की संभावना नहीं है।’

अमेरिका प्रस्तावित चुनाव को मान्यता देगा, इसकी संभावना भी नहीं है। म्यांमार में अमेरिका के राजदूत रह चुके स्कॉट मार्सियल ने कहा है- उम्मीद यही है कि अमेरिका चुनाव का विरोध करेगा। भले आसियान कोई अलग रुख ले, लेकिन अमेरिका उस चुनाव को विश्वसनीय और वैध नहीं मानेगा।

संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ता टॉम एंड्र्यूज पहले ही सभी देशों से प्रस्तावित ‘फर्जी’ चुनाव को अस्वीकार करने की अपील कर चुके हैं। एंड्र्यूज की रिपोर्ट बीते 31 जनवरी को संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद में पेश की गई थी। इसमें म्यांमार में हुए मानव अधिकारों के हनन की कड़ी निंदा की गई है।

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