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Myanmar: इमरजेंसी बढ़ा कर चुनाव टालने का बहाना बना लिया म्यांमार के सैनिक शासन ने?

Sat, 04 Feb 2023 01:33 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 04 Feb 2023 01:33 PM IST
सार

Myanmar: अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा- ‘अमेरिका बर्मा के सैनिक शासन के इमरजेंसी बढ़ाने के फैसले का विरोध करता है। इससे सेना के अवैध शासन की अवधि और लंबी हो जाएगी। साथ ही लोगों की मुसीबत का दौर भी लंबा हो जाएगा।’

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Myanmar military dictators announced to extend the period of emergency for six more months
Myanmar junta chief Min Aung Hlaing - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

तख्ता पलट के दो साल पूरा होने पर म्यांमार के सैनिक तानाशाहों ने लोगों को कोई राहत देने के बजाय देश में इमरजेंसी की अवधि छह और महीनों के लिए बढ़ाने का एलान किया। इससे देश के अंदर नए सिरे से गुस्सा फैला है। इससे यह आशंका फैली है कि सैनिक सरकार प्रस्तावित चुनावों को और टाल सकती है। म्यांमार सरकार ने अगले अगस्त में चुनाव कराने का कार्यक्रम घोषित कर रखा है। चुनाव नए नियमों के तहत होंगे, जिससे चुनाव बाद की व्यवस्था में भी सेना की प्रमुख भूमिका बनी रहेगी। फिर भी उम्मीद है कि उससे एक सीमा तक असैनिक शासन बहाल करने में मदद मिलेगी।   

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आपातकाल की अवधि बढ़ाए जाने की घोषणा से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी म्यांमार के सैनिक शासन की आलोचना का नया दौर आया हुआ है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा- ‘अमेरिका बर्मा के सैनिक शासन के इमरजेंसी बढ़ाने के फैसले का विरोध करता है। इससे सेना के अवैध शासन की अवधि और लंबी हो जाएगी। साथ ही लोगों की मुसीबत का दौर भी लंबा हो जाएगा।’ पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि यह बयान देते हुए अमेरिकी प्रवक्ता ने म्यांमार के पुराने नाम का इस्तेमाल किया। यह आरोप रहा है कि बर्मा की जगह म्यांमार नाम देश के बहुसंख्यक समुदाय के वर्चस्व को जताने के लिए अपनाया गया था।

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अमेरिका ने अब कहा है कि वह अपने सहयोगी देशों के साथ मिल कर लोकतंत्र समर्थक आंदोलन को समर्थन देना जारी रखेगा, ताकि बर्मा में समावेशी लोकतंत्र को वापस लाया जा सके। अमेरिका के अलावा जापान, और दस दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान ने म्यांमार सरकार के इस कदम की निंदा की है। जापान के विदेश मंत्री योशिमसा हयाशी ने ध्यान दिलाया है कि म्यांमार में हिंसा के कारण बड़ी संख्या में लोग हताहत हो रहे हैं।

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उधर आसियान ने म्यांमार की ताजा स्थिति पर चर्चा के लिए शनिवार को अपनी विशेष बैठक बुलाई है। आसियान सूत्रों ने कहा है कि सैनिक शासन के इस ताजा फैसले ने म्यांमार जल्द असैनिक शासन बहाल होने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। आसियान के एक म्यांमार स्थित राजनयिक ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में आशंका जताई कि ताजा निर्णय से देश में अस्थिरता और लंबी खिंच सकती है।

आपातकाल बढ़ाने का फैसला मंगलवार को म्यांमार की नेशनल डिफेंस एंड सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक में लिया गया। इस परिषद में सेना और सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इसमें सैनिक तानाशाह मिन आंग हलायंग ने कहा कि बागी गुट चुनाव की योजना को नाकाम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए चुनावों के लिए और अधिक तैयारी की जरूरत है। इस बयान को चुनाव टालने की मंशा का संकेत समझा गया है।

विपक्षी समूहों की तरफ से बनाई गई वैकल्पिक सरकार नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट में कैबिनेट मंत्री डेविड गुम अवंग ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है- ‘सैनिक शासन को भरोसा नहीं है कि फर्जी चुनाव में भी वह जीत पाएगा। इसकी वजह यह है कि देश में हालात काबू में नहीं है। यह फैसला इस बात को मंजूर करना है कि सैनिक शासन चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सक्षम नहीं है।’

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