म्यांमार: प्रदर्शनकारियों को लेकर विदेशी नेता चिंतित, चेतावनी देते हुए बोला अमेरिका- हिंसा बढ़ने पर करेंगे कार्रवाई  

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Priyanka Tiwari न्यूज डेस्क, अमर उजाला, यांगून Published by: प्रियंका तिवारी
Updated Tue, 23 Feb 2021 11:56 PM IST
म्यांमार में प्रदर्शन लगातार जारी है
म्यांमार में प्रदर्शन लगातार जारी है - फोटो : PTI

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म्यांमार में सेना द्वारा सत्ता को कब्जे में लेने के खिलाफ लोगों का प्रदर्शन लगातार जारी है। ऐसे में मंगलवार को भी देश के सबसे बड़े शहर यांगून की सड़कों लोग विरोध करते दिखे। इस बीच सोमवार को हड़ताल और उससे पहले हुई हिंसा को लेकर विदेशी नेताओं ने चिंता जताई है। देश में लगातार हो रहे प्रदर्शन को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चिंता बनी हुई है।

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अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने एक बयान में कहा कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों पर हमले की निंदा करता है और अधिक हिंसा होने पर वह कार्रवाई करेगा। अमेरिका और कई पश्चिमी देशों की सरकारों ने म्यांमार की जुंटा सरकार से हिंसा से बचने, हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने और सू की सरकार को बहाल करने को कहा है। 


अमेरिका ने सोमवार को यह भी कहा कि सुरक्षा बलों द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या को लेकर वह जुंटा के और सदस्यों के खिलाफ प्रतिबंध लगा रहा है। अमेरिका ने लेफ्टिनेंट जनरल मोए मिंट तुन और जनरल मौंग मौंग क्याव का नाम भी प्रतिबंधित लोगों और संस्थाओं की सूची में शामिल कर दिया है। ब्रिटेन और कनाडा ने भी तख्तापलट के बाद ऐसे ही कदम उठाए हैं।

गौरतलब है कि सोमवार को देश में आम हड़ताल रखी गई थी। इस दौरान तमाम दुकानें बंद रहीं और बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। कल के मुकाबले मंगलवार को प्रदर्शनकारियों की संख्या सड़कों पर कम रही, लेकिन यांगून में करीब एक हजार लोग शहर के लेदान सेंटर पर एकत्र हुए। 

इसके अलावा विरोध-प्रदर्शन के लिए लोग अन्य जगहों पर भी जुट रहे हैं। देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले में शनिवार को सुरक्षा बलों की गोली लगने से मरे 37 साल के थेट नियांग विन की अंतिम यात्रा में लोग शामिल हुए। 

शनिवार को काफी लोग बंदरगाहों और गोदी में काम करने वाले कामगारों के समर्थन में एकत्र हुए थे, जिन पर पुलिस और सुरक्षा बलों ने गोलियां चलाईं। इस दौरान विन और एक किशोर की गोली लगने से मौत हो गई। गौरतलब है कि प्रशासन हड़ताल के बावजूद गोदी में लोगों पर काम जारी रखने का दबाव बना रहा था।

म्यांमार में पिछले साल नवंबर में आम चुनाव हुए थे जिसमें आंग सान सू की को जीत मिली थी, लेकिन सेना ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए एक फरवरी को सत्ता पर कब्जा कर लिया।

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