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कोरोना वायरस : 'एपसिलॉन' में म्यूटेशन, टीके को दे सकते हैं धोखा
Thu, 08 Jul 2021 08:27 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन
Published by: Kuldeep Singh
Updated Thu, 08 Jul 2021 08:27 AM IST
सार
यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया है कि सीएएल.20सी वैरिएंट भी लैब में तैयार एंटीबॉडीज के साथ मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज को भी धोखा दे सकता है।
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कोरोना वैक्सीन
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
कोरोना वायरस के एपसिलॉन वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन से नई मुश्किल खड़ी हो गई है। वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया है कि वैरिएंट में म्यूटेशन के कारण वह मौजूदा टीकों के साथ पहले से संक्रमित हो चुके लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी धोखा देने में सक्षम हैं।
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मोनोक्लोनल और लैब में तैयार एंटीबॉडीज को भी कर सकता है गुमराह
यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया है कि सीएएल.20सी वैरिएंट भी लैब में तैयार एंटीबॉडीज के साथ मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज को भी धोखा दे सकता है। यही नहीं टीका लगवाने वाले लोगों के प्लाज्मा में बनी एंटीबॉडीज को भी बेअसर कर सकता है।
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वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे मामलों में न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज की भूमिका अहम होती है जिससे वायरस के खिलाफ सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाया जा सकता है। एपसिलॉन वैरिएंट की पहचान पिछले साल अमेरिका के कैलिफोर्निया में मई में हुई थी। इसके बाद 34 देशों में इसके मामले मिले थे।
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अब अमेरिका में डैल्टा वैरिएंट का कहर
कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित रहा अमेरिका अब डेल्टा वैरिएंट की चपेट में है। इंडोनेशिया में डेल्टा के कहर के बीच अमेरिकी स्वास्थ्य संस्था सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने कहा है कि डेल्टा अमेरिका से अभी मिलने वाले 51.7% संक्रमण का कारक है। सीडीसी ने बताया है कि अमेरिका के कुछ हिस्सों में संक्रमण के 80 प्रतिशत नए मामले डेल्टा से जुड़े हैं।
पश्चिमी राज्य उटाह, कोलोराडो में 74.3 प्रतिशत मामलों में डेल्टा मिल रहा है। टेक्सास, लूसियाना अरंकसास, ओकलाहोमा में संक्रमण के नए मामलों के लिए डेल्टा 58.8 प्रतिशत जिम्मेदार है। कोरोना के नए मामलों में डेल्टा 51.7 फ़ीसदी जबकि अल्फा वैरिएंट संक्रमण का 28.7 फीसदी कारक है।
प्रकोप बढ़ा, टीका ही अब एक मात्र विकल्प
अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनर्जी एंड इनफेक्शियस डिजीज के निदेशक डॉक्टर एंथनी फॉसी का कहना है कि डेल्टा वैरिएंट के बढ़ते प्रकोप के बीच टीका लगवाना बेहद जरूरी है। वायरस का यह रूप उन लोगों के लिए खतरा हो सकता है या उनके लिए गंभीर तकलीफ का कारण बन सकता है जिन्होंने टीका नहीं लगवाया है।