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Mossad: क्या था ऑपरेशन थंडरबोल्ट, जिसने मोसाद को आतंकियों के लिए बनाया 'बिजली का असली झटका'

Wed, 31 Jul 2024 01:31 PM IST
शिवेंद्र तिवारी स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Wed, 31 Jul 2024 01:31 PM IST
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सार
Mossad Operation Thunderbolt: इस्राइली खुफिया एजेंसी मोसाद ने 1976 में ऑपरेशन थंडरबोल्ट चलाया था। इस ऑपरेशन के जरिए मोसाद ने हाइजैक किए गए फ्रांसीसी विमान से अपने नागरिकों को मुक्त कराया था। हमास प्रमुख की हत्या के बाद मोसाद की चर्चा होने लगी है।
 
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mossad killed hamas chief ismail haniyeh what was operation thunderbolt news in hindi
मोसाद का ऑपरेशन थंडरबोल्ट - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

पिछले साल 7 अक्तूबर के घातक हमले का इस्राइल ने बदला ले लिया है। इसने हमले को अंजाम देने वाले संगठन हमास के प्रमुख इस्माइल हानिया को इस्राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने मार गिराया है। हानिया की ईरान में हत्या कर दी गई है। ईरान की सेना ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी मौत की पुष्टि की है। हमास ने भी इस्माइल हानिया की हत्या की बात स्वीकार की है और इसका आरोप इस्राइल पर लगाया है।


इस्राइल द्वारा ईरान के अंदर गुप्त ऑपरेशनों का लंबा इतिहास रहा है। इन गुप्त ऑपरेशनों को इस्राइली खुफिया एजेंसी मोसाद अंजाम देती रही है। खुफिया एजेंसी के प्रमुख ने 7 अक्तूबर के हमले के बाद हानिया को मारने का एलान किया था। हमास प्रमुख की हत्या के बाद एक बार फिर दुनियाभर में अपने अभियानों के लिए जाने जानी वाली खुफिया एजेंसी मोसाद की चर्चा होने लगी है। समय-समय इसने कई असंभव माने जाने वाले ऑपरेशन को अंजाम दिया है, जिसमें से ऑपरेशन थंडरबोल्ट काफी चर्चित रहा है। इस ऑपरेशन में इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू के भाई योनातन नेतन्याहू की जान चली गई थी। आइये जानते हैं आखिर क्या था ऑपरेशन थंडरबोल्ट?

मोसाद का ऑपरेशन थंडरबोल्ट
मोसाद का ऑपरेशन थंडरबोल्ट - फोटो : AMAR UJALA
मोसाद द्वारा चलाया गया ऑपरेशन थंडरबोल्ट
1976 में इस्राइली खुफिया एजेंसी मोसाद द्वारा चलाया गया ऑपरेशन थंडरबोल्ट काफी चर्चित रहा है। रविवार 27 जून के दिन एयर फ्रांस फ्लाइट 139 तेल अवीव से उड़न भरी और पेरिस पहुंचने से पहले निर्धारित ठहराव एथेंस में हुआ। जर्मन बाडर-मेनहोफ आतंकवादी समूह से जुड़े विल्फ्रेड बोस और ब्रिगिट कुहमन पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ फलेस्ताइन के दो आतंकी ग्रीस में नए यात्रियों के साथ सवार हुए और प्लेन को हाईजैक कर लिया। इन आतंकियों ने प्लेन को लीबिया के बेनगाजी में उतारा और इसमें ईंधन भरा। इसी दौरान हाईजैकेर्स ने ब्रिटेन में जन्मीं पैट्रिसिआ मार्टेल को छोड़ दिया। मार्टेल को इसलिए रिहा किया गया था क्योंकि उन्होंने खुद को चोट पहुंचाई और खून बहाकर हुए गर्भपात का नाटक किया।



मार्टेल यहां से लंदन पहुंचीं और घटना की जानकारी MI6 और मोसाद के गुप्तचरों को दी। महिला ने आतंकियों की फोटो देख उन्हें और उनके हथियारों को पहचान लिया। उधर प्लेन ने बेनगाजी से यूगांडा के लिए उड़ान भरी और 28 जून को दोपहर 3:15 बजे एंटेबे हवाई अड्डे पर पहुंचा। हवाई अड्डे की सुरक्षा के लिए युगांडा के तानाशाह राष्ट्रपति इदी अमीन दादा ने सैनिक तैनात कर दिए। विमान 248 यात्रियों को लेकर उतरा और आतंकवादियों ने तुरंत यहूदी और इस्राइली बंधकों को बाकी बंदियों से अलग कर दिया।

आतंकी प्लेन को छोड़ने के लिए 35 करोड़ की रंगदारी मांग रहे थे
अपने नागरिकों को मुक्त कराने के लिए इस्राइल ने तीन जुलाई को ऑपरेशन थंडरबोल्ट चलाया गया। दरअसल, आतंकी प्लेन को छोड़ने के लिए उस वक्त करीब 35 करोड़ की रंगदारी मांग रहे थे। इसके साथ वह 40 दोषी आतंकियों और चार देशों के 13 अन्य कैदियों को मुक्त करने की भी मांग कर रहे थे। इसके लिए उन्होंने इस्राइली सरकार को 48 घंटे की समय सीमा दी। आतंकियों ने कहा कि उनकी मांगे नहीं माने जाने पर बंधक यात्रियों को मौत के घाट उतार दिया जाएगा। 

समय सीमा समाप्त होने को थी लेकिन इस्राइली सरकार और सुरक्षा अधिकारियों को अपहर्ताओं के असली उद्देश्यों, एंटेबे हवाई अड्डे में उनके सटीक ठिकाने के बारे में बहुत कम जानकारी ही थी।

मंगलवार 29 जून की दोपहर तक इस्राइली सेना बचाव प्रयास के लिए पर्याप्त जानकारी इकट्ठा करने में सफल रही। सरकार ने एक जुलाई को घोषणा की कि वह बातचीत करेगी। उधर आतंकवादियों ने अपनी समय सीमा रविवार चार जुलाई को दोपहर तक बढ़ा दी और अन्य 100 बंधकों को रिहा कर दिया, जिन्हें पेरिस ले जाया गया। हालांकि, 12 सदस्यीय एयर फ्रांस क्रू 105 यहूदी और इस्राइली बंधकों के साथ ही रहा।

अमेरिकी समेत कई देशों से मांगी गई मदद 
एक सेवानिवृत्त रक्षा अधिकारी बारूक बार-लेव, ईदी अमीन को कई वर्षों से जानते थे और उन्हें बंधकों की रिहाई के लिए अनुरोध करने के लिए उनसे संपर्क करने के लिए कहा गया। उन्होंने कई बार अमीन से फोन पर बात की, लेकिन तानाशाह को मदद के लिए राजी नहीं कर सके। इस्राइली सरकार ने मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात को एक संदेश देने के लिए अमेरिकी सरकार से भी संपर्क किया और उनसे हस्तक्षेप करने के लिए कहा। इस बीच, प्रधानमंत्री यित्जाक राबिन और रक्षा मंत्री शिमोन पेरेज के बीच अपहर्ताओं की मांगों को स्वीकार करने या न करने पर बहस हुई। 

राबिन ऐसा करने के इच्छुक थे, लेकिन पेरेज को डर था कि इससे और अधिक आतंकवाद को बढ़ावा मिलेगा। पेरेज की डर की वजह लेफ्टिनेंट कर्नल योनातन नेतन्याहू के साथ हुई उनकी एक बैठक भी थी, जिन्होंने उन्हें आश्वासन दिया था कि ऑपरेशन सफल होगा। विकल्पों पर चर्चा के बाद ब्रिगेडियर जनरल डैन शोम्रोन ने एक जुलाई को चीफ ऑफ स्टाफ मोर्दचाई गुर, पेरेस और राबिन के सामने अपनी बचाव योजना रखी। उन्होंने इस्राइल के 200 से अधिक विशेष सैनिकों को शामिल करने वाले एक मिशन का संचालन करने के लिए मंजूरी मांगी। अगले दिन उन सभी ने रिहर्सल की।

इसी के साथ तीन जुलाई को 13:20 बजे ऑपरेशन थंडरबोल्ट शुरू हुआ जब सैन्य विमान ने उड़ान भरी। इसके साथ ही तीन अन्य विशेष विमानों को मदद के लिए रवाना किया गया। लेफ्टिनेंट कर्नल योनातन नेतन्याहू के नेतृत्व में यह टीम एंटेबे की 2,500 मील की यात्रा पर निकल पड़ी। इसमें ईदी अमीन की निजी कार की जैसी दो जीप और एक काली मर्सिडीज भी थी। कई घंटों की उड़ान के बाद टीम 23:01 (स्थानीय समयानुसार) बजे उतर गई। दूसरे और तीसरे इजरायली विमान छह मिनट बाद पहुंचे, जिसमें हवाई अड्डे के आसपास युगांडा की सेना से लड़ने में मदद करने के लिए अतिरिक्त बल और सैनिक शामिल थे। चौथा विमान बंधकों को निकालने के लिए खाली आया।

आतंकवादियों को चकमा देने के लिए पहले गोलीबारी न करने का आदेश 
नेतन्याहू की टीम सधे कदमों से पुराने टर्मिनल की ओर चली, मानो वाहनों में युगांडा की सेनाएं हों। उन्हें आतंकवादियों को चकमा देने के लिए पुराने टर्मिनल पर पहुंचने से पहले गोलीबारी न करने का आदेश दिया गया था। हालांकि, जैसे ही वे टर्मिनल के पास पहुंचे, युगांडा के दो सैनिकों को पता चला कि ईदी अमीन ने हाल ही में एक सफेद मर्सिडीज खरीदी है, उन्होंने वाहनों को रोकने का आदेश दिया। नेतन्याहू ने कमांडो को साइलेंट पिस्टल से एक सैनिक को गोली मारने का आदेश दिया तो लैंड रोवर्स में से एक अन्य कमांडो ने सैनिक को राइफल से मार दिया जिससे दूर तक आवाज आई। बचाव अभियान में लगे कर्मियों को अब डर लगा कि दुश्मनों को उनके बारे में जानकारी हो गई है और वो टर्मिनल की ओर दौड़ पड़े।

बंधक हवाई अड्डे की इमारत के मुख्य हॉल में थे, जो रनवे से सटा हुआ था। टर्मिनल में प्रवेश करते हुए कमांडो ने मेगाफोन के माध्यम से चिल्लाया, 'नीचे रहो! नीचे रहना! हम इस्रराइली सैनिक हैं। महज छह मिनट में हुए ताबड़तोड़ हमले में सभी आठ आतंकवादी मारे गये। 

बंधकों को विमान की सुरक्षा की ओर ले जा रहे नेतन्याहू की मौत 
युगांडा के सैनिकों ने नियंत्रण टॉवर से इस्राइलियों पर गोलीबारी की। जब नेतन्याहू बंधकों को विमान की सुरक्षा की ओर ले जा रहे थे तो उनकी मौत हो गई। उनके भाई इद्दो का मानना है कि उन्हें टर्मिनल से एक आतंकवादी ने गोली मार दी थी। ऑपरेशन के दौरान पांच अन्य सैनिक घायल हो गए। युगांडा के 45 सैनिक मारे गये।

उनके आगमन के 20 मिनट के भीतर इस्राइली सैनिकों ने चौथे विमान में बंधकों को निकालना शुरू कर दिया। 23:59 बजे तक विमान इस्राइल के लिए उड़ान भर चुके थे। ऑपरेशन, जिसके एक घंटे तक चलने की भविष्यवाणी की गई थी, वास्तव में केवल 58 मिनट में ही पूरा कर लिया गया।
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