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Moody's: ट्रंप के पदभार संभालने के बाद भारत-आसियान देशों को हो सकता है फायदा; चीन को उठाना पड सकता है नुकसान
Sat, 09 Nov 2024 01:21 AM IST
शिव शुक्ला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: शिव शुक्ला
Updated Sat, 09 Nov 2024 01:21 AM IST
सार
अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि अमेरिका रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश को सख्त बना रहा है। साथ ही ट्रंप के पदग्रहण करने के बाद चीन से व्यापार और निवेश प्रवाह भी कम हो सकता है।
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डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद चीन से व्यापार और निवेश प्रवाह कम हो सकता है क्योंकि अमेरिका रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश को सख्त कर रहा है। हालांकि इस बदलाव से भारत और आसियान देशों को फायदा हो सकता है।
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ट्रंप की विदेश नीति के बारे में मूडीज ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में व्यापार और निवेश प्रवाह चीन से और दूर हो सकता है क्योंकि अमेरिका रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश को सख्त कर रहा है। इसका चीन की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और परिणामस्वरूप क्षेत्रीय विकास में कमी आएगी। हालांकि अमेरिकी नीति में इस बदलाव से भारत और आसियान देशों को लाभ हो सकता है। अमेरिका-चीन के बीच निरंतर ध्रुवीकरण से क्षेत्र में भू-राजनीतिक विभाजन बढ़ने का भी खतरा है जो सेमीकंडक्टर की वैश्विक आपूर्ति में खलल डाल सकता है।
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आव्रजन नीतियों में सख्ती से कई क्षेत्रों में श्रमिकों की हो सकती है कमी
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर मूडीज ने एक बयान में कहा कि ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद मौजूदा नीतियों में बदलाव व्यापक बदलाव आने की उम्मीद है। ट्रंप के दूसरे प्रशासन में बड़े राजकोषीय घाटे, संरक्षणवादी व्यापारिक कदमों, जलवायु उपायों में गतिरोध, आव्रजन पर सख्त रुख और नियमों में ढील दिए जाने की उम्मीद है। इनका मकसद अनधिकृत आव्रजन को कम करना और योग्यता के आधार पर वैध आव्रजन को प्राथमिकता देना है। हालांकि आव्रजन नीतियों में सख्ती से कृषि, खुदरा, आतिथ्य, निर्माण और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी हो सकती है।
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नाटो से अमेरिका के अलग होने यूरोप में बढ़ेगा सुरक्षा जोखिम
मूडीज ने कहा कि यूरोप में, यूक्रेन के लिए अमेरिका के घटते समर्थन से यूरोपीय सरकारों का राजकोषीय बोझ बढ़ सकता है, क्योंकि सरकारें शुरू में अमेरिकी समर्थन की भरपाई करने का प्रयास करेंगी। नाटो से अमेरिका के अलग होने से रूस का हौसला बढ़ेगा और यूरोप में सुरक्षा जोखिम बढ़ेगा जिससे नाटो की पूर्वी सीमा पर स्थित देश सबसे अधिक खतरे में पड़ जाएंगे। इसके अलावा, प्रस्तावित व्यापक टैरिफ और अमेरिका-चीन तनाव से क्षेत्र के व्यापारिक साझेदारों को नुकसान पहुंचने की संभावना है, लेकिन इससे यूरोप को अपनी सापेक्ष नीति स्थिरता के कारण अधिक आकर्षक निवेश गंतव्य बनाकर अप्रत्यक्ष रूप से लाभ हो सकता है।