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पाकिस्तान में ईसाई के घर-दुकान में लगाई आग: 35 परिवारों ने छोड़े घर; ईशनिंदा के आरोप में क्या सामने आया?
Sat, 10 Oct 2026 11:41 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लाहौर।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लाहौर।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 10 Oct 2026 11:41 PM IST
सार
पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप के बाद एक ईसाई के घर और दवा की दुकान को आग के हवाले कर दिया गया। घटना के बाद 35 से ज्यादा परिवारों को पलायन करना पड़ा। आखिर फेसबुक पर साझा किए गए वीडियो को लेकर ऐसा क्या हुआ कि पूरा इलाका दहशत में आ गया? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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पाकिस्तान में दहशत में ईसाई समुदाय (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
विस्तार
पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप का सामना कर रहे एक ईसाई व्यक्ति के घर और दवा की दुकान में भीड़ ने आग लगा दी। इस घटना के बाद अल्पसंख्यक समुदाय के 35 से ज्यादा परिवारों को अपने घर छोड़कर भागना पड़ा। उन्हें डर था कि आगे भी हमले हो सकते हैं। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।
कहां और कैसे भड़की हिंसा?
यह घटना गुरुवार को शेखूपुरा जिले के घड़ियाल कलां गांव में हुई। यह गांव लाहौर से करीब 50 किलोमीटर दूर है। आरोप लगाए गए थे कि 40 साल के कमरान गुल मसीह ने सोशल मीडिया पर ईशनिंदा से जुड़ी सामग्री साझा की थी।
आरोपी को सुरक्षित जगह क्यों ले गई पुलिस?
पुलिस अधिकारी जुबैर अब्बास ने बताया कि मसीह को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें सुरक्षा के लिए एक सुरक्षित घर में रखा गया है। ऐसा इसलिए किया गया, ताकि भीड़ उन्हें पीट-पीटकर मार न डाले।
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हालांकि, एक स्थानीय मस्जिद से लोगों को मसीह के घर के आसपास इकट्ठा होने की घोषणा की गई। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग वहां जमा हो गए। अब्बास ने बताया कि भीड़ ने पहले मसीह के घर में आग लगाई। बाद में उनकी दवा की दुकान को भी आग के हवाले कर दिया।
डर के कारण कितने परिवारों ने छोड़े घर?
जब लोगों को पता चला कि भीड़ उनके घर की ओर बढ़ रही है, तो मसीह के परिवार और स्थानीय ईसाई समुदाय के लोगों ने वहां से निकलना शुरू कर दिया। वे अपनी सुरक्षा के लिए इलाके से जाने लगे। अब्बास ने बताया कि 35 से ज्यादा ईसाई परिवार अपने घर छोड़कर चले गए। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने हालात को काबू में किया।
ये भी पढ़ें: अमेरिका: भारतीय आईटी कंपनियों के ग्रीन कार्ड आवेदनों में गिरावट, पीईआरएम पर रोक का कितना पड़ेगा असर?
ईशनिंदा के आरोप में दर्ज हुआ मामला
मसीह के खिलाफ पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 295-सी के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह धारा पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने से जुड़े मामलों पर लागू होती है।
प्राथमिकी के मुताबिक, पुलिस की ओर से शिकायत दर्ज कराने वाले रईस अहमद ने बताया कि वह अन्य पुलिसकर्मियों के साथ इलाके में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि मसीह ने फेसबुक पर एक वीडियो साझा किया है। आरोप है कि यह वीडियो एक दिन पहले जॉन शाकी नाम के एक यूजर ने अपलोड किया था।
एफआईआर में कहा गया है कि पुलिस अधिकारी ने वीडियो को अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड किया। इसके बाद गवाहों की मौजूदगी में उसे एक यूएसबी ड्राइव में डाला गया। फिर उस सामग्री को सील करके जब्त कर लिया गया। पुलिस ने वीडियो के स्क्रीनशॉट भी लिए।
पांच संदिग्धों पर मामला दर्ज
एक अलग मामले में पुलिस ने पांच नामजद संदिग्धों और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इन लोगों पर कथित तौर पर घर और दवा की दुकान में तोड़फोड़ करने और उनमें आग लगाने में शामिल होने का आरोप है।
ईशनिंदा पाकिस्तान में कितना संवेदनशील मुद्दा?
पाकिस्तान में ईसाइयों और हिंदुओं समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों को भेदभाव, धमकियों और हमलों का सामना करना पड़ा है। पाकिस्तान में ईशनिंदा एक संवेदनशील मुद्दा है। यहां केवल ईशनिंदा के संदेह के आधार पर भी लोगों की हत्या की जा चुकी है।
ईशनिंदा के आरोपों के कारण बार-बार भीड़ की हिंसा भड़की है। कई बार अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया है। ऐसा तब भी हुआ है, जब आरोपों की जांच नहीं हुई थी या अदालतों ने उन पर फैसला नहीं सुनाया था।
साल 2021 में पाकिस्तान के पूर्वी औद्योगिक केंद्र सियालकोट की एक फैक्टरी में काम करने वाले श्रीलंकाई नागरिक की हत्या कर दी गई थी। ईशनिंदा के संदेह में गुस्साई भीड़ ने उसे मार डाला था। इस घटना की खबर पाकिस्तान से बहुत दूर तक सुर्खियों में रही थी।
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कहां और कैसे भड़की हिंसा?
यह घटना गुरुवार को शेखूपुरा जिले के घड़ियाल कलां गांव में हुई। यह गांव लाहौर से करीब 50 किलोमीटर दूर है। आरोप लगाए गए थे कि 40 साल के कमरान गुल मसीह ने सोशल मीडिया पर ईशनिंदा से जुड़ी सामग्री साझा की थी।
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आरोपी को सुरक्षित जगह क्यों ले गई पुलिस?
पुलिस अधिकारी जुबैर अब्बास ने बताया कि मसीह को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें सुरक्षा के लिए एक सुरक्षित घर में रखा गया है। ऐसा इसलिए किया गया, ताकि भीड़ उन्हें पीट-पीटकर मार न डाले।
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हालांकि, एक स्थानीय मस्जिद से लोगों को मसीह के घर के आसपास इकट्ठा होने की घोषणा की गई। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग वहां जमा हो गए। अब्बास ने बताया कि भीड़ ने पहले मसीह के घर में आग लगाई। बाद में उनकी दवा की दुकान को भी आग के हवाले कर दिया।
डर के कारण कितने परिवारों ने छोड़े घर?
जब लोगों को पता चला कि भीड़ उनके घर की ओर बढ़ रही है, तो मसीह के परिवार और स्थानीय ईसाई समुदाय के लोगों ने वहां से निकलना शुरू कर दिया। वे अपनी सुरक्षा के लिए इलाके से जाने लगे। अब्बास ने बताया कि 35 से ज्यादा ईसाई परिवार अपने घर छोड़कर चले गए। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने हालात को काबू में किया।
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ईशनिंदा के आरोप में दर्ज हुआ मामला
मसीह के खिलाफ पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 295-सी के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह धारा पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने से जुड़े मामलों पर लागू होती है।
प्राथमिकी के मुताबिक, पुलिस की ओर से शिकायत दर्ज कराने वाले रईस अहमद ने बताया कि वह अन्य पुलिसकर्मियों के साथ इलाके में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि मसीह ने फेसबुक पर एक वीडियो साझा किया है। आरोप है कि यह वीडियो एक दिन पहले जॉन शाकी नाम के एक यूजर ने अपलोड किया था।
एफआईआर में कहा गया है कि पुलिस अधिकारी ने वीडियो को अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड किया। इसके बाद गवाहों की मौजूदगी में उसे एक यूएसबी ड्राइव में डाला गया। फिर उस सामग्री को सील करके जब्त कर लिया गया। पुलिस ने वीडियो के स्क्रीनशॉट भी लिए।
पांच संदिग्धों पर मामला दर्ज
एक अलग मामले में पुलिस ने पांच नामजद संदिग्धों और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इन लोगों पर कथित तौर पर घर और दवा की दुकान में तोड़फोड़ करने और उनमें आग लगाने में शामिल होने का आरोप है।
ईशनिंदा पाकिस्तान में कितना संवेदनशील मुद्दा?
पाकिस्तान में ईसाइयों और हिंदुओं समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों को भेदभाव, धमकियों और हमलों का सामना करना पड़ा है। पाकिस्तान में ईशनिंदा एक संवेदनशील मुद्दा है। यहां केवल ईशनिंदा के संदेह के आधार पर भी लोगों की हत्या की जा चुकी है।
ईशनिंदा के आरोपों के कारण बार-बार भीड़ की हिंसा भड़की है। कई बार अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया है। ऐसा तब भी हुआ है, जब आरोपों की जांच नहीं हुई थी या अदालतों ने उन पर फैसला नहीं सुनाया था।
साल 2021 में पाकिस्तान के पूर्वी औद्योगिक केंद्र सियालकोट की एक फैक्टरी में काम करने वाले श्रीलंकाई नागरिक की हत्या कर दी गई थी। ईशनिंदा के संदेह में गुस्साई भीड़ ने उसे मार डाला था। इस घटना की खबर पाकिस्तान से बहुत दूर तक सुर्खियों में रही थी।