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Pakistan: 'ईसाइयों पर भीड़ का हमला अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा अभियान का हिस्सा,' मानवाधिकार आयोग ने कही यह बात

Sat, 26 Aug 2023 09:31 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 26 Aug 2023 09:31 PM IST
सार

Pakistan: लाहौर से 130 किलोमीटर दूर फैसलाबाद जिले के जरांवाला कस्बे में 16 अगस्त को एक ईसाई व्यक्ति के खिलाफ ईशनिंदा के आरोपों को लेकर आक्रोशित भीड़ ने कई चर्चों और ईसाई इलाकों पर हमला किया था।

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Mob attack on Christians suspected orchestrated hate campaign against minority, says Pakistan's rights body
पाकिस्तान में गिरिजाघर पर हमला। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में गिरजाघरों और ईसाई इलाकों पर हाल में भीड़ का हमला अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ बड़े घृणा अभियान का हिस्सा था। एक स्वतंत्र मानवाधिकार निकाय ने इस घटना में कट्टरपंथी इस्लामवादियों की भागीदारी और पुलिस की मिलीभगत को उजागर किया है।  

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लाहौर से 130 किलोमीटर दूर फैसलाबाद जिले के जरांवाला कस्बे में 16 अगस्त को एक ईसाई व्यक्ति के खिलाफ ईशनिंदा के आरोपों को लेकर आक्रोशित भीड़ ने कई चर्चों और ईसाई इलाकों पर हमला किया था। उन्होंने एक ईसाई कब्रिस्तान पर भी हमला किया और स्थानीय सहायक आयुक्त के कार्यालय में तोड़फोड़ की। पुलिस ने भीड़ के हमले के सिलसिले में अब तक तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के कार्यकर्ताओं सहित 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। 

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पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) के फैक्ट फाइंडिंग मिशन ने शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में कहा, 'अल्पसंख्यक समुदाय पर हमले को पूरी तरह से आकस्मिक या स्वत: स्फूर्त नहीं माना जा सकता है। यह स्थानीय ईसाइयों के खिलाफ एक बड़े घृणा अभियान के हिस्से के रूप में किया गया था। पुलिस की भूमिका और स्थिति को प्रभावी ढंग से कम करने और नियंत्रित करने की इसकी क्षमता संदिग्ध है।'

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रिपोर्ट में कहा गया है कि कम से कम 24 चर्चों और कई दर्जन छोटे प्रार्थनाघरों के साथ-साथ कई घरों को आग लगा दी गई और स्थानीय ईसाई समुदाय के खिलाफ क्रूर भीड़ के नेतृत्व में हमलों की एक श्रृंखला में लूटपाट की गई। पंजाब पुलिस के अनुसार, भीड़ ने 20 चर्चों और 86 ईसाई घरों को जला दिया। 

गैर-लाभकारी संगठन के निष्कर्षों में कहा गया है कि यह एक स्वत:स्फूर्त भीड़ नहीं थी जिसने चर्चों और घरों पर हमला किया था, बल्कि वे स्थानीय ईसाइयों के खिलाफ नफरत के एक बड़े अभियान का हिस्सा थे। इसमें पाया कि जरांवाला में रहने वाले 500 ईसाई परिवारों में से ज्यादातर गरीब पृष्ठभूमि से हैं और स्थानीय सरकारी ढांचे या निजी कारखानों में नगरपालिका सेवाओं में काम करते हैं।
 

एचआरसीपी ने कहा कि जिस घटना से भीड़ भड़की और उसके बाद हिंसा हुई, वह इलाके में रहने वाले दो ईसाई भाइयों के गैस मीटर पर लगी कथित ईशनिंदा सामग्री थी, जिसे 16 अगस्त की सुबह एक महिला ने पाया था। सुबह 6:30 बजे तक दो ईसाई भाइयों (जिनमें से एक स्थानीय पादरी था) के खिलाफ ईशनिंदा के आरोप पूरे इलाके में फैल गया था, और कई लोगों के साथ एक धार्मिक पार्टी के नेताओं ने मामला दर्ज करने के लिए पुलिस से संपर्क किया था।
 

दोनों भाइयों के खिलाफ सुबह सात बजे प्राथमिकी दर्ज की गई। जब पुलिस टीएलपी कार्यकर्ताओं सहित मुस्लिम धार्मिक नेताओं के साथ बातचीत में लगी हुई थी, तब विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते तनाव की खबरें आने लगीं, इसके अलावा ईसाई निवासियों ने हिंसा के डर से अपने घरों को छोड़ दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमले केवल जरांवाला शहर तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि उसने आसपास के गांवों को भी अपनी चपेट में ले लिया, जहां ईसाई पूजा स्थलों और ईसाइयों के घरों पर एक व्यवस्थित हमला किया गया था।

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