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जी20: जयशंकर की दो टूक- सैन्य ताकत से नहीं सुलझेंगे वैश्विक संकट, कूटनीति जरूरी; आतंकवाद पर चेताया, क्या कहा?
Sat, 31 Oct 2026 01:31 AM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, वाशिंगटन।
पीटीआई, वाशिंगटन।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 31 Oct 2026 01:31 AM IST
सार
जी-20 बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया के संकट सैन्य ताकत से नहीं, बल्कि कूटनीति से सुलझेंगे। उन्होंने समुद्री जहाजों पर हमलों, आतंकवाद और औद्योगिक विकास में आ रही बाधाओं का मुद्दा भी उठाया। आखिर वैश्विक संकटों से निपटने के लिए भारत ने क्या रास्ता सुझाया? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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एस. जयशंकर, विदेश मंंत्री
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
भारत ने शुक्रवार को कहा कि दुनिया की चुनौतियों से निपटने के लिए सैन्य समाधान काम नहीं आएंगे। इन मुद्दों को सुलझाने के लिए कूटनीति को मौका दिया जाना चाहिए। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अटलांटा में जी-20 के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के पहले पूर्ण सत्र को संबोधित किया।
इस दौरान उन्होंने समुद्री जहाजों पर होने वाले हमलों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने समुद्री रास्तों से आवाजाही की आजादी बनाए रखने पर जोर दिया। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत हमलों को रोकने की जरूरत बताई। इसमें खास तौर पर समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधि (यूएनसीएलओएस) का जिक्र किया।
जयशंकर ने किन मुद्दों को उठाया?
जयशंकर ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सैन्य समाधान काम नहीं करेंगे और कूटनीति को मौका दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह बात अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में हुई जी-20 के विदेश मंत्रियों की बैठक में रखे गए अपने विचारों के बारे में बताते हुए कही।
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जयशंकर का यह बयान दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों के बीच आया है। इनमें रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में तनाव भी शामिल हैं। जयशंकर ने कहा, 'बाजारों में सामान की बाढ़ लाकर, आपूर्ति शृंखलाओं को हथियार बनाकर, बाजार तक पहुंच सीमित करके और बाजार में गड़बड़ी को बढ़ावा देकर देशों के औद्योगिक विकास के अधिकार से वंचित किया जा रहा है'। उन्होंने कहा, 'यह बंद होना चाहिए'।
विदेश मंत्री ने दुनिया में ऐसे संपर्क मार्ग विकसित करने की अहमियत पर भी जोर दिया, जो संकट के समय भी काम कर सकें। उन्होंने कहा, 'वैकल्पिक संपर्क मार्ग बनाने की जरूरत है। ऐसा इसलिए जरूरी है, क्योंकि दुनिया जोखिम कम करने और अपने विकल्प बढ़ाने की कोशिश कर रही है'। जयशंकर ने कहा, 'रणनीतिक जरूरतों से जुड़े फैसलों के कारण आतंकवाद के खतरों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यह एक बेहद जोखिम भरी गतिविधि है। इसका खामियाजा इसे अंजाम देने वालों को भी भुगतना पड़ा है'।
ये भी पढ़ें: एआई पर पोप लियो ने जताई चिंता: बोले- सिद्धांत हैं, लेकिन संस्थाएं नहीं; कौन करेगा तकनीक की निगरानी?
उन्होंने कहा, 'वैश्विक दक्षिण के देश नागरिक जहाजों और नाविकों पर होने वाले हमलों के नतीजों का असमान रूप से ज्यादा बोझ उठा रहे हैं। इन हमलों से ईंधन, भोजन और उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। साथ ही, इनकी कीमतों पर भी असर पड़ रहा है'।
इस साल फरवरी में पश्चिम एशिया में जंग शुरू होने के बाद से 22 भारतीयों की जान जा चुकी है। इनमें 14 नाविक शामिल हैं। जयशंकर गुरुवार देर शाम अटलांटा पहुंचे थे। बैठक से पहले उन्होंने कई देशों के अपने समकक्षों से बातचीत की।
रुबियो ने क्या कहा?
दो दिन की बैठक की शुरुआत करते हुए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, दुनिया आर्थिक और भू-राजनीतिक संकटों के बीच एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां उसे फैसला करना होगा।
रुबियो ने बैठक में कहा, 'मुझे उम्मीद है कि आज की यह बैठक उपयोगी साबित होगी, क्योंकि हम एक अहम दौर में हैं। मैं इसे फैसले लेने का समय कहूंगा। और मैं कहूंगा कि यह सिर्फ मेरे देश अमेरिका के लिए ही नहीं, बल्कि सच कहूं तो पूरी दुनिया के लिए फैसले लेने का समय है'। इस बैठक में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी शामिल हुए। वह मेक्सिको और सऊदी अरब के अपने समकक्षों के बीच बैठे थे।
रुबियो ने कहा, 'हम आपस में जुड़े कई आर्थिक और भू-राजनीतिक संकटों का सामना कर रहे हैं। इनमें से कई संकट वैश्विक आर्थिक व्यवस्था की बुनियादी नींव के लिए गंभीर खतरा हैं। इनसे वैश्विक ऊर्जा और खाद्य बाजारों, वैश्विक आपूर्ति शृंखला, व्यापार और समुद्री रास्तों से आवाजाही की आजादी पर नए दबाव और रुकावटें पैदा हो रही हैं'।
उन्होंने कहा, 'जी-20 को इन खतरों का सामना करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। साथ ही, अपनी आर्थिक क्षमता को मजबूत करना चाहिए। अपने बाजारों और उन पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं की सुरक्षा करनी चाहिए'।
वैश्विक संकटों पर देशों में मतभेद?
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक संकटों को लेकर जी-20 देशों के बीच गहरे मतभेद हैं। रुबियो ने अपने संबोधन के बाद एक्स पर पोस्ट किया, 'आज की जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में मैंने स्पष्ट किया कि समुद्री सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा को आगे बढ़ाती हैं। अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत अमेरिका सहयोगी देशों को समुद्री रास्तों की सुरक्षा करने, खाद्य सुरक्षा मजबूत करने और भू-राजनीतिक संकटों के आर्थिक नतीजों को कम करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है'।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि बैठक के दौरान अमेरिका जी-20 के सहयोगी देशों के साथ मिलकर उन भू-राजनीतिक संकटों से निपटने की कोशिश करेगा, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटके दे रहे हैं। इनमें समुद्री रास्तों से आवाजाही की आजादी, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए खतरे और आपूर्ति शृंखला से जुड़ी चुनौतियां शामिल हैं। अमेरिका 14 और 15 दिसंबर को मियामी में जी-20 देशों के नेताओं की बैठक की मेजबानी करेगा।
क्वाड की बैठक में भी शामिल होंगे जयशंकर?
जयशंकर जी-20 बैठक से इतर जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के अपने समकक्षों के साथ क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी शामिल होंगे। इस साल होने वाली यह दूसरी क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक होगी। इसके बाद अगले महीने फिलीपींस में अमेरिका की मेजबानी में क्वाड देशों के नेताओं की संभावित बैठक हो सकती है। अटलांटा से जयशंकर एंटीगुआ और बारबुडा जाएंगे। वहां वह 1 से 4 नवंबर तक होने वाली राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक में शामिल होंगे।
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इस दौरान उन्होंने समुद्री जहाजों पर होने वाले हमलों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने समुद्री रास्तों से आवाजाही की आजादी बनाए रखने पर जोर दिया। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत हमलों को रोकने की जरूरत बताई। इसमें खास तौर पर समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधि (यूएनसीएलओएस) का जिक्र किया।
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जयशंकर ने किन मुद्दों को उठाया?
जयशंकर ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सैन्य समाधान काम नहीं करेंगे और कूटनीति को मौका दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह बात अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में हुई जी-20 के विदेश मंत्रियों की बैठक में रखे गए अपने विचारों के बारे में बताते हुए कही।
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जयशंकर का यह बयान दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों के बीच आया है। इनमें रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में तनाव भी शामिल हैं। जयशंकर ने कहा, 'बाजारों में सामान की बाढ़ लाकर, आपूर्ति शृंखलाओं को हथियार बनाकर, बाजार तक पहुंच सीमित करके और बाजार में गड़बड़ी को बढ़ावा देकर देशों के औद्योगिक विकास के अधिकार से वंचित किया जा रहा है'। उन्होंने कहा, 'यह बंद होना चाहिए'।
विदेश मंत्री ने दुनिया में ऐसे संपर्क मार्ग विकसित करने की अहमियत पर भी जोर दिया, जो संकट के समय भी काम कर सकें। उन्होंने कहा, 'वैकल्पिक संपर्क मार्ग बनाने की जरूरत है। ऐसा इसलिए जरूरी है, क्योंकि दुनिया जोखिम कम करने और अपने विकल्प बढ़ाने की कोशिश कर रही है'। जयशंकर ने कहा, 'रणनीतिक जरूरतों से जुड़े फैसलों के कारण आतंकवाद के खतरों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यह एक बेहद जोखिम भरी गतिविधि है। इसका खामियाजा इसे अंजाम देने वालों को भी भुगतना पड़ा है'।
ये भी पढ़ें: एआई पर पोप लियो ने जताई चिंता: बोले- सिद्धांत हैं, लेकिन संस्थाएं नहीं; कौन करेगा तकनीक की निगरानी?
उन्होंने कहा, 'वैश्विक दक्षिण के देश नागरिक जहाजों और नाविकों पर होने वाले हमलों के नतीजों का असमान रूप से ज्यादा बोझ उठा रहे हैं। इन हमलों से ईंधन, भोजन और उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। साथ ही, इनकी कीमतों पर भी असर पड़ रहा है'।
इस साल फरवरी में पश्चिम एशिया में जंग शुरू होने के बाद से 22 भारतीयों की जान जा चुकी है। इनमें 14 नाविक शामिल हैं। जयशंकर गुरुवार देर शाम अटलांटा पहुंचे थे। बैठक से पहले उन्होंने कई देशों के अपने समकक्षों से बातचीत की।
रुबियो ने क्या कहा?
दो दिन की बैठक की शुरुआत करते हुए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, दुनिया आर्थिक और भू-राजनीतिक संकटों के बीच एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां उसे फैसला करना होगा।
रुबियो ने बैठक में कहा, 'मुझे उम्मीद है कि आज की यह बैठक उपयोगी साबित होगी, क्योंकि हम एक अहम दौर में हैं। मैं इसे फैसले लेने का समय कहूंगा। और मैं कहूंगा कि यह सिर्फ मेरे देश अमेरिका के लिए ही नहीं, बल्कि सच कहूं तो पूरी दुनिया के लिए फैसले लेने का समय है'। इस बैठक में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी शामिल हुए। वह मेक्सिको और सऊदी अरब के अपने समकक्षों के बीच बैठे थे।
रुबियो ने कहा, 'हम आपस में जुड़े कई आर्थिक और भू-राजनीतिक संकटों का सामना कर रहे हैं। इनमें से कई संकट वैश्विक आर्थिक व्यवस्था की बुनियादी नींव के लिए गंभीर खतरा हैं। इनसे वैश्विक ऊर्जा और खाद्य बाजारों, वैश्विक आपूर्ति शृंखला, व्यापार और समुद्री रास्तों से आवाजाही की आजादी पर नए दबाव और रुकावटें पैदा हो रही हैं'।
उन्होंने कहा, 'जी-20 को इन खतरों का सामना करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। साथ ही, अपनी आर्थिक क्षमता को मजबूत करना चाहिए। अपने बाजारों और उन पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं की सुरक्षा करनी चाहिए'।
वैश्विक संकटों पर देशों में मतभेद?
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक संकटों को लेकर जी-20 देशों के बीच गहरे मतभेद हैं। रुबियो ने अपने संबोधन के बाद एक्स पर पोस्ट किया, 'आज की जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में मैंने स्पष्ट किया कि समुद्री सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा को आगे बढ़ाती हैं। अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत अमेरिका सहयोगी देशों को समुद्री रास्तों की सुरक्षा करने, खाद्य सुरक्षा मजबूत करने और भू-राजनीतिक संकटों के आर्थिक नतीजों को कम करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है'।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि बैठक के दौरान अमेरिका जी-20 के सहयोगी देशों के साथ मिलकर उन भू-राजनीतिक संकटों से निपटने की कोशिश करेगा, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटके दे रहे हैं। इनमें समुद्री रास्तों से आवाजाही की आजादी, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए खतरे और आपूर्ति शृंखला से जुड़ी चुनौतियां शामिल हैं। अमेरिका 14 और 15 दिसंबर को मियामी में जी-20 देशों के नेताओं की बैठक की मेजबानी करेगा।
क्वाड की बैठक में भी शामिल होंगे जयशंकर?
जयशंकर जी-20 बैठक से इतर जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के अपने समकक्षों के साथ क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी शामिल होंगे। इस साल होने वाली यह दूसरी क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक होगी। इसके बाद अगले महीने फिलीपींस में अमेरिका की मेजबानी में क्वाड देशों के नेताओं की संभावित बैठक हो सकती है। अटलांटा से जयशंकर एंटीगुआ और बारबुडा जाएंगे। वहां वह 1 से 4 नवंबर तक होने वाली राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक में शामिल होंगे।