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दावा : कोरोना के हल्के लक्षण अच्छे हैं.. शरीर में बनाते हैं स्थायी एंटीबॉडी

Thu, 27 May 2021 06:47 PM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन। Published by: योगेश साहू Updated Thu, 27 May 2021 06:47 PM IST
सार

अच्छे हैं.. कोरोना के हल्के लक्षण। जी हां आप सही पढ़ रहे हैं। कोरोना के हल्के लक्ष्ण दिखाई देना, इस महामारी से बचाव के लिए अच्छा संकेत हैं। यह दावा के एक अध्यन में किया गया है।

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Mild COVID 19 induces lasting antibody protection, study finds
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

अच्छे हैं.. कोरोना के हल्के लक्षण। जी हां आप सही पढ़ रहे हैं। कोरोना के हल्के लक्ष्ण दिखाई देना, इस महामारी से बचाव के लिए अच्छा संकेत हैं। यह दावा के एक अध्यन में किया गया है। दरअसल, कोरोना महामारी से पूरी दुनिया जूझ रही है। इसे लेकर कई तरह के अध्ययन भी किए जा रहे हैं। अब इन्हीं में से एक अध्ययन में दावा किया गया है कि यदि किसी शख्स में कोरोना के हल्के लक्षण हैं और वह कुछ समय में ठीक हो जाता है तो यह उसके शरीर में स्थायी एंटीबॉडी विकसित होने का संकेत हैं।

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कोविड-19 के मामूली संक्रमण से निपटने के कुछ महीने बाद भी लोगों में प्रतिरक्षी कोशिकाएं होती हैं जो कोरोना वायरस के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न करती हैं। यह जानकारी एक अध्ययन में दी गई है। अमेरिका के सेंट लूइस में वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने कहा कि इस तरह की कोशिकाएं जीवन भर रह सकती हैं जिससे हर समय रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रह सकती है।
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लंबे समय तक बनी रहती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
नेचर पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि कोविड-19 के मामूली संक्रमण से लंबे समय तक रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है और इसमें बार-बार बीमार होने की संभावना कम हो जाती है।
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वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर और शोध के वरिष्ठ लेखक अली एल्लेबेडी ने कहा कि पिछली गर्मियों में इस तरह की खबरें आईं कि संक्रमण के बाद रोग प्रतिरोधी क्षमता तेजी से कम होती है जिससे कोविड-19 हो जाता है और मुख्य धारा के मीडिया ने कहा कि इस कारण शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता लंबे समय तक नहीं टिक पाती है।

एल्लेबेडी ने कहा कि लेकिन यह आंकड़ों को गलत तरीके से पेश करना है। संक्रमण के बाद रोग प्रतिरोधक स्तर का नीचे आना सामान्य बात है, लेकिन वह बिल्कुल ही खत्म नहीं हो जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि पहले लक्षण के 11 महीने बाद लोगों में फिर से रोग प्रतिरोधी कोशिकाएं उत्पन्न होती हैं। 

प्रतिरोधी कोशिकाएं तेजी से विभाजित होती हैं..
उन्होंने बताया कि ये कोशिकाएं लोगों के शेष जीवन तक जीवित रहेंगी और रोग प्रतिरोधी क्षमता उत्पन्न करेंगी जो कि यह लंबे समय तक प्रतिरक्षण क्षमता का दमदार सबूत है। शोधकर्ताओं के अनुसार, संक्रमण के दौरान एंटीबॉडी उत्पन्न करने वाली प्रतिरोधी कोशिकाएं तेजी से विभाजित होती हैं और रक्त में आ जाती हैं जिससे एंटीबॉडी का स्तर तेजी से बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि संक्रमण दूर होने पर ऐसी ज्यादातर कोशिकाएं खत्म हो जाती हैं और रक्त में एंटीबॉडी का स्तर कम हो जाता है।


शोधकर्ताओं ने बताया कि एंटीबॉडी उत्पन्न करने वाली कुछ कोशिकाएं लंबे समय तक रहने वाली प्लाज्मा कोशिकाएं कहलाती है। ये कोशिकाएं अस्थि मज्जा यानी बोन मैरो में पहुंच कर वहां रहने लगती हैं और कम संख्या में ही सही, एंटीबॉडी उत्पन्न कर रक्त प्रवाह में पहुंचाती हैं। ये एंटीबॉडी वायरस के संक्रमण से बचाव करती हैं।
 

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