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रूस-यूक्रेन युद्ध: ट्रंप की पत्नी ने की सीजफायर की पहल, 29 अक्तूबर से रूस के कब्जे वाले इस शहर में मिलेगी राहत
Fri, 23 Oct 2026 08:36 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Fri, 23 Oct 2026 08:36 PM IST
सार
अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध से तबाह ओलेश्की शहर में मानवीय सहायता पहुंचाने और नागरिकों को निकालने के लिए युद्धविराम की पहल की है। यह 29 अक्तूबर से शुरू होना है। शहर में भोजन, दवाओं, बिजली और पानी की कमी है। क्या इस पहल से फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा सकेगा? क्या रूस और यूक्रेन तय शर्तों का पालन करेंगे? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मेलानिया ट्रंप की बड़ी पहल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
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रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान तबाही झेल रहे ओलेश्की शहर में आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने इस शहर में मानवीय सहायता पहुंचाने और नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए स्थानीय स्तर पर युद्धविराम कराने में अहम भूमिका निभाई है। व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की। यह युद्धविराम 29 अक्तूबर से शुरू होने वाला है।
मेलानिया ट्रंप की पहल पर रूस और यूक्रेन के नेतृत्व के बीच बातचीत हुई है। इसका मकसद ओलेश्की में लड़ाई को सीमित समय और क्षेत्र के लिए रोककर जरूरतमंद लोगों तक भोजन और चिकित्सा सामग्री पहुंचाना और वहां फंसे नागरिकों को बाहर निकालना है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, मेलानिया ने बातचीत शुरू कराई और अपने एक प्रतिनिधि के साथ मिलकर रूस तथा यूक्रेन के नेतृत्व से सीधे चर्चा की। इसी बातचीत में युद्धविराम की शर्तें तय की गईं। हालांकि, इस घोषणा पर रूस और यूक्रेन की सरकारों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
मेलानिया ट्रंप ने युद्धविराम के लिए पहल क्यों की?
मेलानिया ट्रंप ने संघर्ष के बीच फंसे बच्चों की सुरक्षा को प्रथम महिला के रूप में अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है। इसी साल उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक की मेजबानी भी की थी, जिसमें संघर्ष के दौरान बच्चों की स्थिति पर चर्चा हुई थी। वह इससे पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को व्यक्तिगत रूप से पत्र लिख चुकी हैं। इस पत्र के जरिए उन्होंने युद्ध के कारण अपने परिवारों से बिछड़े बच्चों को उनके परिजनों से दोबारा मिलाने की दिशा में काम करने की कोशिश की थी। ओलेश्की में युद्धविराम की पहल भी मानवीय सहायता और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी है।
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ओलेश्की में आम लोगों के सामने कितनी बड़ी चुनौती है?
ओलेश्की में कई महीनों से भोजन और चिकित्सा सामग्री की भारी कमी बनी हुई है। शहर में बिजली, गर्मी और नल से पानी की सुविधा भी नहीं है। शहर से बाहर जाने वाली सड़कों पर बारूदी सुरंगें बिछी हैं और कई जगह जली हुई गाड़ियां दिखाई देती हैं। आसमान में ड्रोन लगातार मंडराते रहते हैं, जिससे लोगों की सुरक्षा का खतरा बना हुआ है। कभी करीब 24 हजार लोगों की आबादी वाला यह शहर अब गंभीर संकट से जूझ रहा है। वहां बचे लोगों के सामने भूख और बीमारियों से जान गंवाने का खतरा है। सर्दियों के करीब आने के कारण उनकी मुश्किलें और बढ़ने की आशंका है।
ओलेश्की में युद्ध और बाढ़ ने कैसे बढ़ाई तबाही?
ओलेश्की पर रूस की सेना ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण स्तर पर हमला शुरू होने के पहले ही दिन कब्जा कर लिया था। इसके बाद शहर की कई इमारतों पर गोलाबारी हुई, आग लगी और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। जून 2023 में यहां एक और बड़ी आपदा आई, जब काखोवका बांध टूटने के बाद बाढ़ का पानी शहर में भर गया। एसोसिएटेड प्रेस की जांच में बांध में हुए विस्फोट के पीछे रूसी सेना की भूमिका होने की आशंका जताई गई थी। इस बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी। ड्निप्रो नदी के किनारे स्थित ओलेश्की में रूसी कब्जे वाली सेना और यूक्रेनी बलों के बीच नदी एक सीमा की तरह है। यूक्रेन पहले भी नागरिकों को निकालने के लिए स्थानीय युद्धविराम की मांग करता रहा है, लेकिन रूस ने अब तक ऐसी कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई थी। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कब्जा करने वाली शक्ति की जिम्मेदारी है कि वह अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र में नागरिकों को जीवित रहने के लिए जरूरी चीजें उपलब्ध कराए।
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मेलानिया ट्रंप की पहल पर रूस और यूक्रेन के नेतृत्व के बीच बातचीत हुई है। इसका मकसद ओलेश्की में लड़ाई को सीमित समय और क्षेत्र के लिए रोककर जरूरतमंद लोगों तक भोजन और चिकित्सा सामग्री पहुंचाना और वहां फंसे नागरिकों को बाहर निकालना है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, मेलानिया ने बातचीत शुरू कराई और अपने एक प्रतिनिधि के साथ मिलकर रूस तथा यूक्रेन के नेतृत्व से सीधे चर्चा की। इसी बातचीत में युद्धविराम की शर्तें तय की गईं। हालांकि, इस घोषणा पर रूस और यूक्रेन की सरकारों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
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मेलानिया ट्रंप ने युद्धविराम के लिए पहल क्यों की?
मेलानिया ट्रंप ने संघर्ष के बीच फंसे बच्चों की सुरक्षा को प्रथम महिला के रूप में अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है। इसी साल उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक की मेजबानी भी की थी, जिसमें संघर्ष के दौरान बच्चों की स्थिति पर चर्चा हुई थी। वह इससे पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को व्यक्तिगत रूप से पत्र लिख चुकी हैं। इस पत्र के जरिए उन्होंने युद्ध के कारण अपने परिवारों से बिछड़े बच्चों को उनके परिजनों से दोबारा मिलाने की दिशा में काम करने की कोशिश की थी। ओलेश्की में युद्धविराम की पहल भी मानवीय सहायता और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी है।
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ओलेश्की में आम लोगों के सामने कितनी बड़ी चुनौती है?
ओलेश्की में कई महीनों से भोजन और चिकित्सा सामग्री की भारी कमी बनी हुई है। शहर में बिजली, गर्मी और नल से पानी की सुविधा भी नहीं है। शहर से बाहर जाने वाली सड़कों पर बारूदी सुरंगें बिछी हैं और कई जगह जली हुई गाड़ियां दिखाई देती हैं। आसमान में ड्रोन लगातार मंडराते रहते हैं, जिससे लोगों की सुरक्षा का खतरा बना हुआ है। कभी करीब 24 हजार लोगों की आबादी वाला यह शहर अब गंभीर संकट से जूझ रहा है। वहां बचे लोगों के सामने भूख और बीमारियों से जान गंवाने का खतरा है। सर्दियों के करीब आने के कारण उनकी मुश्किलें और बढ़ने की आशंका है।
ओलेश्की में युद्ध और बाढ़ ने कैसे बढ़ाई तबाही?
ओलेश्की पर रूस की सेना ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण स्तर पर हमला शुरू होने के पहले ही दिन कब्जा कर लिया था। इसके बाद शहर की कई इमारतों पर गोलाबारी हुई, आग लगी और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। जून 2023 में यहां एक और बड़ी आपदा आई, जब काखोवका बांध टूटने के बाद बाढ़ का पानी शहर में भर गया। एसोसिएटेड प्रेस की जांच में बांध में हुए विस्फोट के पीछे रूसी सेना की भूमिका होने की आशंका जताई गई थी। इस बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी। ड्निप्रो नदी के किनारे स्थित ओलेश्की में रूसी कब्जे वाली सेना और यूक्रेनी बलों के बीच नदी एक सीमा की तरह है। यूक्रेन पहले भी नागरिकों को निकालने के लिए स्थानीय युद्धविराम की मांग करता रहा है, लेकिन रूस ने अब तक ऐसी कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई थी। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कब्जा करने वाली शक्ति की जिम्मेदारी है कि वह अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र में नागरिकों को जीवित रहने के लिए जरूरी चीजें उपलब्ध कराए।